शिप्रा की लहरें

ब्लागर बंधु-बांधवियों को -

*ब्लागर बंधु-बांधवियों को ,सादर-सप्रेम -ले अपना हिस्सा, निकल चुका है विगत वर्ष ,यह आगत लाये शान्ति और सौहार्द मित्र,इस विश्व पटल पर  मंगल-मंत्र उचार भरेंम...
clicks 28  Vote 0 Vote  9:04am 1 Jan 2019

अभिव्यक्ति की तृष्णा अतृप्त है तुम्हारे बिना.

 *घर आँगन में चहकते,माटी की गंध सँजोयेवे महकते शब्द,कहाँ खो गये !सिर-चढ़े विदेशियों की भड़कीली भीड़ में , अपने जन कहाँ ग़ायब हो गये ! धरती के संस्कारों ...
clicks 31  Vote 0 Vote  6:24am 8 Dec 2018

ढलती धूप के अंतिम प्रहर में -

*बीतते जाते प्रहर निःशब्द ,नीरवनाम लेकर कौन अब आवाज़ देगा!खड़ी हूँ अब रास्ते पर मैं थकी सी पार कितनी दूरियाँ बाकी अभी हैं.बैठ जाऊँ बीच में थक कर अचानकअनि...
clicks 60  Vote 0 Vote  10:12am 15 Nov 2018

बोला था चलता हुआ वर्ष -

* बोला था नये साल से चलता हुआ वर्ष -जाते-जाते यह उचित लगा ओ मीत, तुम्हें कर दूँ सतर्क. मैं भी था अतिथि ,एक दिन तुम सा ही आदृत,ऐसे ही चाव कोलाहल-सँग पाया था ...
clicks 98  Vote 0 Vote  8:06pm 3 May 2018

तेरा राम रखैया...

*      सबकी चीत भलाई प्यारे ,तेरा राम रखैया, कहाँ टिका जीवन का पानी लहर लहरती कहती,चलता आना-जाना उड़ते पत्ते उड़ते पत्ते नदिया बहती जड़-जंगम को नाच न...
clicks 72  Vote 0 Vote  1:00am 10 Mar 2018

विनती -

*कृष्ण ,तुम्हारे श्री-चरणों में , मेरे  गुण औ दोष समर्पित !जनम भटकते बीता,अब बस इतना करो कि मिटें द्विधायें,यह गठरी अब  तुम्हीं सँभालो,  करो वही जो तुम्ह...
clicks 30  Vote 0 Vote  11:38am 9 Feb 2018

जब बोला चलता हुआ वर्ष -

*जब नये साल से बोला चलता हुआ वर्ष -जाते-जाते यह उचित लगा ओ मीत, तुम्हें कर दूँ सतर्क - मैं भी था अतिथि ,एक दिन तुम सा ही आदृत,,ऐसे ही चाव कोलाहल सँग मैने भी पाय...
clicks 111  Vote 0 Vote  9:58pm 11 Jan 2018

एक शुभ संकल्प -

*    नया संवत्सर खड़ा है द्वार-देहरी ,एक शुभ संकल्प की आशा लगाये .अर्थ का विस्तार कर सर्वार्थ कर दोआत्म का घेरा बढ़ा परमार्थ कर दो,बूंद-बूंद भरे, कृतार्...
clicks 47  Vote 0 Vote  11:05am 31 Dec 2017

आदमी ऐसा क्यों होता है ?

*हड्डी चिंचोड़ने की आदत अपने  बस में कहाँ  कुत्तों के .मांस देख ,मुँह से टपकाते लारवहीं मँडराते ,सूँघते .तप्त मांस-गंध से हड़कीलालसा रह-रह,आँखों में  ...
clicks 93  Vote 0 Vote  9:21am 11 Dec 2017

तुम्हारा दृष्टि भ्रम होगा.

( अपनी मित्र कल्पना की एक कविता यहाँ प्रस्तुत करने का लोभ नहीं संवरण कर पा रही हूँ. - प्रतिभा. )* मैं नहीं रोई , तुम्हारा दृष्टि भ्रम होगा.अचानक यों उमड़ कर क...
clicks 131  Vote 0 Vote  10:45am 20 Aug 2017
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