शिप्रा की लहरें

बोला था चलता हुआ वर्ष -

* बोला था नये साल से चलता हुआ वर्ष -जाते-जाते यह उचित लगा ओ मीत, तुम्हें कर दूँ सतर्क. मैं भी था अतिथि ,एक दिन तुम सा ही आदृत,ऐसे ही चाव कोलाहल-सँग पाया था ...
clicks 41  Vote 0 Vote  8:06pm 3 May 2018

तेरा राम रखैया...

*      सबकी चीत भलाई प्यारे ,तेरा राम रखैया, कहाँ टिका जीवन का पानी लहर लहरती कहती,चलता आना-जाना उड़ते पत्ते उड़ते पत्ते नदिया बहती जड़-जंगम को नाच न...
clicks 36  Vote 0 Vote  1:00am 10 Mar 2018

विनती -

*कृष्ण ,तुम्हारे श्री-चरणों में , मेरे  गुण औ दोष समर्पित !जनम भटकते बीता,अब बस इतना करो कि मिटें द्विधायें,यह गठरी अब  तुम्हीं सँभालो,  करो वही जो तुम्ह...
clicks 11  Vote 0 Vote  11:38am 9 Feb 2018

जब बोला चलता हुआ वर्ष -

*जब नये साल से बोला चलता हुआ वर्ष -जाते-जाते यह उचित लगा ओ मीत, तुम्हें कर दूँ सतर्क - मैं भी था अतिथि ,एक दिन तुम सा ही आदृत,,ऐसे ही चाव कोलाहल सँग मैने भी पाय...
clicks 66  Vote 0 Vote  9:58pm 11 Jan 2018

एक शुभ संकल्प -

*    नया संवत्सर खड़ा है द्वार-देहरी ,एक शुभ संकल्प की आशा लगाये .अर्थ का विस्तार कर सर्वार्थ कर दोआत्म का घेरा बढ़ा परमार्थ कर दो,बूंद-बूंद भरे, कृतार्...
clicks 25  Vote 0 Vote  11:05am 31 Dec 2017

आदमी ऐसा क्यों होता है ?

*हड्डी चिंचोड़ने की आदत अपने  बस में कहाँ  कुत्तों के .मांस देख ,मुँह से टपकाते लारवहीं मँडराते ,सूँघते .तप्त मांस-गंध से हड़कीलालसा रह-रह,आँखों में  ...
clicks 61  Vote 0 Vote  9:21am 11 Dec 2017

तुम्हारा दृष्टि भ्रम होगा.

( अपनी मित्र कल्पना की एक कविता यहाँ प्रस्तुत करने का लोभ नहीं संवरण कर पा रही हूँ. - प्रतिभा. )* मैं नहीं रोई , तुम्हारा दृष्टि भ्रम होगा.अचानक यों उमड़ कर क...
clicks 91  Vote 0 Vote  10:45am 20 Aug 2017

चल रे हर सिंगार ,तुझे मैं साथ ले चलूँ.

.*चल रे हर सिंगार तुझे मैं साथ ले चलूँ. चंदन कुंकुंम धारे तरु डालों पर जगतीं दीप शिखाएँ  ,संध्या के रोशमी पटों में शीतल सुरभित श्वास समायेइस जीवन से माँ...
clicks 79  Vote 0 Vote  9:59am 14 Aug 2017

समय का हिसाब -

*कूड़े के ढेर परबिखरा पड़ा कितना सामान,किसी ज्योनार का फिंका खाना तमाम.जूठन लगी पेपर प्लेटें,पिचकी बोतलें, गिलास,पालिथीन की ,मुड़ी-चुड़ी थैलियाँ .और बहुत-...
clicks 62  Vote 0 Vote  6:03am 1 Jul 2017

माँ -

* थक गई है माँ , उम्र के उतार पर लड़खड़ाती, अब समय के साथ चल नही पाती . बेबस काया परबड़प्पन का बोझ लादे,झुकी जा रही है माँ. *त्याग के, गरिमा के ,पुल बाँध...
clicks 72  Vote 0 Vote  1:36am 5 Jun 2017
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