उच्चारण

बालकविता "हो विकास भारत के अन्दर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--तीन रंग का झण्डा न्यारा।हमको है प्राणों से प्यारा।।--त्याग और बलिदानों का वर।रंग केसरिया सबसे ऊपर।।--इसके बाद श्वेत रंग आता।हमें शान्ति का ढंग सुहाता।...
clicks 1  Vote 0 Vote  7:20am 23 Jan 2020

दोहे "यह उपवन आजाद" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--दुनिया के इतिहास में, दिवस आज का खास।अपने भारत देश में, जन्मा वीर सुभास।।--जीवित मृत घोषित किया, सबको हुआ मलाल।सत्ता पाने के लिए, चली गयी थी चाल।।--क्यों इत...
clicks 6  Vote 0 Vote  5:48am 22 Jan 2020

"मेरे ब्लॉग उच्चारण का जन्मदिन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों! 21 जनवरी मेरे लिए इतिहास से कम नहीं है! क्योंकि आज के ही दिन मैंने ब्लॉगिंग की दुनिया में अपना कदम बढ़ाया था।     आज से ठीक 12 वर्ष पूर...
clicks 15  Vote 0 Vote  7:40am 21 Jan 2020

दोहे "नंगेपन के ढ़ंग" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--अंग दिखाने का बढ़ा, कैसा आज जुनून।नयी पौध की है फटी, जगह-जगह पतलून।।--सिने-तारिका कर रहीं, लचर आज परिधान।चलता-फिरता हास्य अब, लगता है इंसान।।--भारतीयता बन ग...
clicks 9  Vote 0 Vote  1:00am 20 Jan 2020

गीत "निर्मल गंगा धार कहाँ है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

--हिमगिरि के शिखरों से चलकर,कलकल-छलछल, बहती अविरल,कुदरत का उपहार कहाँ है?निर्मल गंगा धार कहाँ है??--मैदानों पर रूप निखारा,दर्पण जैसी निर्मल धारा,अर्पण-तर्पण...
clicks 5  Vote 0 Vote  5:00pm 18 Jan 2020

विविध दोहे "माता करती प्यार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--चाहे कोई कल्प हो, या हो कोई काल।माता निज सन्तान को, रही प्यार से पाल।।-- सुख-दुख दोनों में रहे, कोमल और उदार।कैसी भी सन्तान हो, माता करती प्यार।। --पीर ...
clicks 5  Vote 0 Vote  1:11pm 17 Jan 2020

गीत "मन की बुझती नहीं पिपासा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--कल-कल करती व्यास-विपाशा।मन की बुझती नहीं पिपासा।। --प्यास कहो या आस कहो तुम,तृष्णा-इच्छा, लोभ निराशा,पल-पल राग सुनाता मौसम,जीवन में उगती अभिलाषा।--तन की तृ...
clicks 4  Vote 0 Vote  1:00am 17 Jan 2020

गीत "सूर्य भी शीत उगलता है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--सन-सन शीतल चला पवन,सरदी ने रंग जमाया।ओढ़ चदरिया कुहरे की,सूरज नभ में शर्माया।।--जलते कहीं अलाव, सेंकता बदन कहीं है कालू,कोई भूनता शकरकन्द को, कोई ...
clicks 13  Vote 0 Vote  1:00am 16 Jan 2020

गीत "त्यौहारों की गठरी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

धनु से मकर लग्न में सूरज, आज धरा पर आया।गया शिशिर का समय और ठिठुरन का हुआ सफाया।।गंगा जी के तट पर, अपनी खिचड़ी खूब पकाओ,खिचड़ी खाने से पहले, निर्मल जल से तुम ...
clicks 15  Vote 0 Vote  6:38am 15 Jan 2020

बालगीत "होती हाड़-कँपाई" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--कुहरे और सूरज दोनों में,जमकर हुई लड़ाई।जीत गया कुहरा, सूरज ने मुँहकी खाई।।--ज्यों ही सूरज अपनी कुछ किरणें चमकाता,लेकिन कुहरा इन किरणों को ढकता जाता,बास...
clicks 18  Vote 0 Vote  4:37pm 14 Jan 2020
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