उच्चारण

दोहे "धधक रही है आग" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

माँ-बहनों के लाडले, सजनी के सिन्दूर। रखवाले अब हो गये, भारत माँ से दूर।भाषण तक सीमित ने हों, भीषण-भाषणवीर।जन-गण अब यह चाहता, नेता हों प्रणवीर।।जन-जन में ...
clicks 5  Vote 0 Vote  9:00pm 16 Feb 2019

दोहे "बदला लो सरकार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 सहन करोगे कब तलक, चूहों की ललकार।अब तो पाकिस्तान से, बदला लो सरकार।।सीना छप्पन इंच का, कहाँ गया श्रीमान।सीधे-सीधे युद्ध का, कर दो अब ऐलान।।नीच कर्म प...
clicks 7  Vote 0 Vote  8:30pm 15 Feb 2019

दोहे "करना मत हठयोग" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अंगारा टेसू हुआ, सेमल भी है लाल।बासन्ती परिवेश में, निर्मल नदियाँ-ताल।।--मैदानों में हो गयी, थोड़ी सी बरसात।पेड़ों के तन पर सजे, नूतन-कोमल पात।।--आम-नीम गदर...
clicks 10  Vote 0 Vote  3:23pm 14 Feb 2019

दोहे "प्रेमदिवस का खेल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

प्रेमदिवस पर आ गये, युगल आज नज़दीक।सागर तट पर देखिए, लगे चहकने बीच।१।--तोता-तोती पर चढ़ा, प्रेम-दिवस का रंग।दोनों ही सहला रहे, इक-दूजे के अंग।२।--...
clicks 5  Vote 0 Vote  6:14pm 13 Feb 2019

ग़ज़ल "सभ्यता के हिमालय पिघलने लगे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आदमी के इरादे बदलने लगेदीन-ईमान पल-पल फिसलने लगेचल पड़ी गर्म अब तो हवाएँ यहाँसभ्यता के हिमालय पिघलने लगेफूल कैसे खिलेंगे चमन में भला,लोग मासूम कलियाँ मस...
clicks 14  Vote 0 Vote  7:00am 13 Feb 2019

दोहे "छोड़ विदेशी ढंग (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जो दिल से उपजे वही, होता सच्चा प्यार।मिलन नहीं है वासना, आलिंगन उपहार।।पश्चिम के परिवेश की, ले करके हम आड़।आलिंगन के नाम पर, करते हैं खिलवाड़।।एकद...
clicks 14  Vote 0 Vote  9:55am 12 Feb 2019

दोहे "फीका पड़ा बसन्त" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आम आदमी के नहीं, हुआ दुखों का अन्त।शीत और बरसात से, फीका पड़ा बसन्त।।वासन्ती परिवेश में, काँप रहा है गात।अब भी रोज पहाड़ पर, होता है हिमपात।।मौसम को भगव...
clicks 14  Vote 0 Vote  4:19pm 11 Feb 2019

गीत "खेतों ने परिधान बसन्ती पहना है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

हर्षित होकर राग भ्रमर ने गाया है!  लगता है बसन्त आया है!!नयनों में सज उठे सिन्दूरी सपने से,कानों में बज उठे साज कुछ अपने से,पुलकित होकर रोम-रोम मुस्काया ...
clicks 16  Vote 0 Vote  5:02pm 10 Feb 2019

दोहे "लड़ा रहे हैं आँख" (डॉ.रूप चन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आया है ऋतुराज अब, समय हुआ अनुकूल।बौराये हैं पेड़ भी, पाकर कोमल फूल।।--टेसू अंगारा हुआ, खेत उगलते गन्ध।सपने सिन्दूरी हुए, देख नये सम्बन्ध।।--पंछी कलरव कर रह...
clicks 10  Vote 0 Vote  7:05am 9 Feb 2019

दोहे "तम्बाकू दो त्याग" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गघे नहीं खाते जिसे, तम्बाकू वो चीज।खान-पान की मनुज को, बिल्कुल नहीं तमीज।।--रोग कैंसर का लगे, समझ रहे हैं लोग।फिर भी करते जा रहे, तम्बाकू उपयोग।।--खैनी-गुटक...
clicks 17  Vote 0 Vote  12:50pm 8 Feb 2019
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