उच्चारण

दोहे "माँगे सबकी खैर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

करती धन की लालसा, जग को मटियामेट।दौलत से भरता नहीं, कभी किसी का पेट।।ज्ञान बाँटने के लिए, लिखते लोग निबन्ध।लेकिन सबके हैं यहाँ, धन से ही सम्बन्ध।। जो होते...
clicks 2  Vote 0 Vote  5:01pm 18 Aug 2017

कविता "सुख के सूरज से सजी धरा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

तुम शब्दयुक्त हो छन्दमुक्त,बहती हो निर्मल धारा सी।तुम सरल-तरल अनुप्रासयुक्त,हो रजत कणों की तारा सी।आलेख पंक्तियाँ जोड़-तोड़करबन जाती हो गद्यगीत।संयो...
clicks 0  Vote 0 Vote  3:33pm 17 Aug 2017

गीत "स्वार्थ छलने लगे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

करते-करते भजन, स्वार्थ छलने लगे। करते-करते यजन, हाथ जलने लगे।।  झूमती घाटियों में, हवा बे-रहम, घूमती वादियों में, हया  बे-शरम, शीत में है तपन, हि...
clicks 14  Vote 0 Vote  7:15am 16 Aug 2017

गीतिका "आजादी की वर्षगाँठ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

चौमासे में श्याम घटा जब आसमान पर छाती है।आजादी के उत्सव की वो मुझको याद दिलाती है।।देख फुहारों को उगते हैं, मेरे अन्तस में अक्षर,इनसे ही कुछ शब्द बनाकर तु...
clicks 19  Vote 0 Vote  7:00am 15 Aug 2017

दोहे "आजादी का जश्न" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

डरा रही नर-नार को, बन्दूकों की छाँव।नहीं सुरक्षित अब रहे, सीमाओं पर गाँव।।--देख दुर्दशा गाँव की, मन में बहुत मलाल।विद्यालय जाँये भला, कैसे अपने बाल।।--आजाद...
clicks 11  Vote 0 Vote  6:53am 15 Aug 2017

देशभक्तिगीत "भारत को करता हूँ शत्-शत् नमन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!आप सबको स्वतन्त्रता-दिवस कीहार्दिक शुभकामनाएँ।--"मुझको प्राणों से प्यारा है अपना वतन"जिसकी माटी में चहका हुआ है सुमन,मुझको प्राणों से प्यारा वो ...
clicks 18  Vote 0 Vote  7:13am 14 Aug 2017

दोहागीत "कमा रहे हैं माल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

तन के उजले मन के गन्दे।कितने बदल गये हैं बन्दे।।शब्दकोश तक रह गया, अब तो जग में प्यार।अपने सुख के ही लिए, करते सब व्यापार।।भोग-विलासों में सब अन्धे।कि...
clicks 15  Vote 0 Vote  6:24am 13 Aug 2017

गीत "फटी घाघरा-चोली" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कहाँ खो गई मीठी-मीठी इन्सानों की बोली।किसने नदियों की धारा में विष की बूटी घोली।।कहाँ गयीं मधुरस में भीगी निश्छल वो मुस्कानें,कहाँ गये वो देशप्रेम से सि...
clicks 21  Vote 0 Vote  11:49am 12 Aug 2017

कविता ''धान खेत में लहराते" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कई दिनों से नभ में,बादल ने डाला है डेरा।सूरज मना रहा है छुट्टी,दिन में हुआ अन्धेरा।।हरियाली बिखरी धरती पर,दादुर गाते गान मधुर।शाम ढली तो सन्नाटे को,चीर र...
clicks 16  Vote 0 Vote  4:38pm 11 Aug 2017

ग़ज़ल "हम तुम्हें हाल-ए-दिल सुनाएँगे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जो भी आगे कदम बढ़ायेंगे।फासलों को वही मिटायेंगे।। तुम हमें याद करोगे जब भी,हम बिना पंख उड़ के आयेंगे।    यही हसरत तो मुद्दतों से है,हम तुम्हें हाल-ए...
clicks 23  Vote 0 Vote  11:35am 10 Aug 2017
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