उच्चारण

गीत "दूषित हुआ वातावरण" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--कर्णधारों की कुटिलता देखकर,देश का दूषित हुआ वातावरण।सभ्यता, शालीनता के गाँव में,खो गया जाने कहाँ है आचरण?--सुर हुए गायब, मृदुल शुभगान में,गन्ध है अपमा...
clicks 2  Vote 0 Vote  5:34pm 18 Oct 2019

गीत "पथ नहीं सरल यहाँ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--सवाल पर सवाल हैं, कुछ नहीं जवाब है।राख में दबी हुई, हमारे दिल की आग है।।--गीत भी डरे हुए, ताल-लय उदास हैं.पात भी झरे हुए, शेष चन्द श्वास हैं,दो नयन में ...
clicks 6  Vote 0 Vote  8:07am 18 Oct 2019

दोहे "करवाचौथ सुहाग का, होता पावन पर्व" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--अपने पतियों पर करें, सभी नारियाँ गर्व।करवाचौथ सुहाग का, होता पावन पर्व।।--सजनी करवाचौथ पर, रखती है उपवास।साजन-सजनी के लिए, दिवस बहुत ये खास।।--जन्...
clicks 9  Vote 0 Vote  7:13am 17 Oct 2019

गीत "सलामत रहो साजना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--कर रही हूँ प्रभू से यही प्रार्थना।ज़िन्दगी भर सलामत रहो साजना।।--चन्द्रमा की कला की तरह तुम बढ़ो,उन्नति की सदा सीढ़ियाँ तुम चढ़ो,आपकी सहचरी की यही कामना...
clicks 3  Vote 0 Vote  4:00am 17 Oct 2019

गीत "करवाचौथ पर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

थक गईं नजरें तुम्हारे दर्शनों की आस में।आ भी आओ चन्द्रमा तारों भरे आकाश में।।चमकते लाखों सितारें किन्तु तुम जैसे कहाँ,साँवरे के बिन कहाँ अटखेलियाँ और म...
clicks 19  Vote 0 Vote  5:46am 16 Oct 2019

दोहे "आँखों का उपहार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--कह देती हैं सहज ही, सुख-दुख-करुणा-प्यार।कुदरत ने हमको दिया, आँखों का उपहार।।--आँखें नश्वर देह का, बेशकीमती अंग।बिना रौशनी के लगे, सारा जग बेरंग।।--मिल जाती ...
clicks 2  Vote 0 Vote  3:00am 16 Oct 2019

गीत "बिन आँखों के जग सूना है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--आशा और निराशा की जो,पढ़ लेते हैं सारी भाषा।दो नयनों में ही होती हैं,दुनिया की पूरी परिभाषा।।--दुख के बादल आते ही ये,खारे जल को हैं बरसाते।सुख का जब अनु...
clicks 6  Vote 0 Vote  3:00am 15 Oct 2019

दोहे "कालातीत बसन्त" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--भाव सुप्त अब हो गये, हुई शायरी बन्द।नहीं निकलते कलम से, नये-पुराने छन्द।। --अँधियारा छाने लगा, गया भास्कर डूब।लिखने-पढ़ने से गया, मेरा मन अब ऊब।।-- थक...
clicks 10  Vote 0 Vote  5:00am 14 Oct 2019

दोहे "पावस का त्यौहार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--शशि की किरणों में भरी, सबसे अधिक उजास।शरदपूर्णिमा धरा पर, लाती है उल्लास।१।--लक्ष्मीमाता धरा पर , आने को तैयार।शरदपूर्णिमा पर्व पर, लेती हैं अवतार।२...
clicks 8  Vote 0 Vote  7:49am 13 Oct 2019

दोहे "खुलकर हँसा मयंक" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

शरद पूर्णिमा आ गयी, खुलकर हँसा मयंक।गंगा जी के नीर की, दूर हो गयी पंक।।--धान घरों में आ गये, कृषक रहे मुसकाय।अपने मन के छन्द को, रचते हैं कविराय।।--हरी-हरी उ...
clicks 11  Vote 0 Vote  7:19am 12 Oct 2019
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