उच्चारण

दोहे "देवदत्त सा शंख" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सज्जनता अब हो गई, भारत में लाचार।मानवता दम तोड़ती, फैला भ्रष्टाचार।।सत्तापक्ष सबल हुआ, है विपक्ष कमजोर।इसीलिए जनतन्त्र में, बनते नियम कठोर।।अब बिल्ली ...
clicks 2  Vote 0 Vote  11:00am 19 Jun 2019

दोहे "बरसे सरस फुहार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आया मास अषाढ़ का, योग कर रहे सन्त।धरा-गगन मिलते जहाँ, होता वही दिगन्त।।नद-नाले सूखे पड़े, सूख गये हैं ताल।गरमी के कारण हुए, जन्तु सभी बेहाल।।मौसम अब तक था...
clicks 8  Vote 0 Vote  5:58pm 17 Jun 2019

"वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की 161वीं पुण्यतिथि पर विशेष"

अमर वीरांगना झाँसी की महारानी लक्ष्मीबाई की161वीं पुण्यतिथि पर उन्हें अपने श्रद्धासुमन समर्पित करते हुएश्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान कीयह अमर कविता&nbs...
clicks 1  Vote 0 Vote  7:03am 17 Jun 2019

दोहे "पिता विधातारूप" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मन्दिर, मसजिद-चर्च की, हमें नहीं दरकार।पितृ-दिवस पर पिता को, नमन हजारों बार।। पिता विधातारूप है, घर का पालनहार। जीवनरूपी नाव को, तात लगाता पार।।माली बनकर ...
clicks 15  Vote 0 Vote  11:28am 15 Jun 2019

दोहागीत "खिसक रहा आधार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

सूख रही है धरा से, गीत-ग़ज़ल की धार।धीरे-धीरे घट रहा, लोगों में अब प्यार।।--कैसे देंगे गन्ध को, ये काग़ज़ के फूल।फूल नोच माली चला, बचे नुकीले शूल।।मन में तो ह...
clicks 10  Vote 0 Vote  7:27am 15 Jun 2019

दोहे "पूज्य पिता जी आपका, वन्दन शत-शत बार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

पूज्य पिता जी आपका, वन्दन शत-शत बार।बिना आपके कुछ नहीं, जीवन का आधार।।--बचपन मेरा खो गया, हुआ वृद्ध मैं आज।सोच-समझकर अब मुझे, करने हैं सब काज।।--जब तक ...
clicks 6  Vote 0 Vote  10:44am 14 Jun 2019

दोहे "जंगल का कानून" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मन में तो है मलिनता, होठों पर हरिनाम।मतलब में आता उन्हें, याद राम का नाम।।काम पड़ा तो आ गये, लोग हमारे धाम।महज दिखावे के लिए, करते दुआ-सलाम।।बलशाली के सामन...
clicks 10  Vote 0 Vote  1:00pm 13 Jun 2019

कविता "काले अक्षर" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

काले अक्षर कभी-कभी, तो बहुत सताते है।कभी-कभी सुख का, सन्देशा भी दे जाते हैं।।इनका दर्द मुझे बिल्कुल, अपना जैसा लगता है।कभी बेरुखी कभी प्यार से, सीध...
clicks 10  Vote 0 Vote  5:00am 13 Jun 2019

दोहे "अपना नैनीताल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

शीतल-सुखद पहाड़ में, चढ़ो चढ़ाई-ढाल।शान उत्तराखण्ड की, प्यारा नैनीताल।।मई-जून की तपिश से, तन जब हो बेहाल।जाओ ठण्डक देखने, तब तुम नैनीताल।।नयना देवी का जह...
clicks 17  Vote 0 Vote  12:27pm 11 Jun 2019

ग़ज़ल "बहारों के चार पल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मुश्किल हैं जिन्दगी में गुजारों चार पलमुमकिन नहीं हसीन नजारों के चार पलबेमौसमी बरसात कहर बनके बरसतीपाते हैं खुशनसीब बयारों के चार पलसबके नहीं नसीब में...
clicks 11  Vote 0 Vote  4:53pm 10 Jun 2019
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