उच्चारण

गीत "कोई सोपान नहीं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--दुर्गम पथरीला पथ है, जिसमें कोई सोपान नहीं।मैदानों से पर्वत पर, चढ़ना होता आसान नहीं।।--रहते हैं आराध्य देव, उत्तुंग शैल के शिखरों में,कैसे दर्शन करूँ आप...
clicks 1  Vote 0 Vote  1:00am 12 Jul 2020

प्रश्नजाल-चम्पू काव्य "व्योम में घनश्याम क्यों छाया हुआ?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

चम्पू श्रव्य काव्य का एक भेद है, अर्थात गद्य-पद्य के मिश्रित् काव्य को चम्पू कहते हैं। गद्य तथा पद्य मिश्रित काव्य को "चम्पू"कहते हैं। चम्पूकाव्य परम्...
clicks 0  Vote 0 Vote  10:31am 10 Jul 2020

बालकविता "पर्वत से बह निकले धारे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--रिमझिम-रिमझिम पड़ीं फुहारे।बारिश आई अपने द्वारे।।--तन-मन में थी भरी पिपासा,धरती का था आँचल प्यासा,झुलस रहे थे पौधे प्यारे।बारिश आई अपने द्वारे।।--आँधी आ...
clicks 11  Vote 0 Vote  1:00am 10 Jul 2020

ग़ज़ल "मेढक सुनाते सुर-सुरीला" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--गन्दुमी सी पर्त ने ढक ही दिया आकाश नीला देखकर घनश्याम को होने लगा आकाश पीला --छिप गया चन्दा गगन में, हो गया मज़बूर सूरज पर्वतों की गोद में से बह गया कम...
clicks 8  Vote 0 Vote  1:00am 7 Jul 2020

अतुकान्त "जीना पड़ेगा कोरोना के साथ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कोरोना नेहमारे चारों ओर जाल बुन लिया है--जाल!हाँ जी!जाल तो जाल ही होता हैचाहे वह मकड़ी का जाल होया बहेलिए का जाल --नदी, सरोवर सिन्धु मेंचाहे मछलियाँ हों याम...
clicks 16  Vote 0 Vote  1:00am 6 Jul 2020

गीत "नदी-नाले उफन आये" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

--चमकती बिजुरिया चपला,गगन में मेघ हैं छाये।मिटाने प्यास धरती की,जलद जल धाम ले आये।--धरा की घास थी सूखी,त्वचा थी राख सी रूखी,हुई घनघोर जब बारिस,नदी-नाले उफन आ...
clicks 20  Vote 0 Vote  1:00am 5 Jul 2020

दोहे "सरहद पर मुस्तैद" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--सैन्य शक्ति से देश की, बैरी है हैरान।सरहद पर मुस्तैद हैं, अपने वीर जवान।।--सेनाओं को दे दिये, अब उन्नत हथियार।सीमाओं पर फौज को, हैं सारे अधिकार।।--भारत ...
clicks 12  Vote 0 Vote  1:00am 4 Jul 2020

भूमिका "शिक्षा और संस्कार से ओत-प्रोत, बालकृति ‘खिलता उपवन" (अनीता सैनी)

भूमिकाशिक्षा और संस्कार से ओत-प्रोतबालकृति ‘खिलता उपवन’         वरिष्ठ लेखक, कवि, दोहा विशेषज्ञ, बाल साहित्यकार डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री‘मयं...
clicks 13  Vote 0 Vote  1:00am 2 Jul 2020

दोहे "जीवित रहती घास" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--आये थे हरि भजन को, ओटन लगे कपास। कैसे जीवन में उगे, हास और परिहास।।--बन्धन आवागमनका, नियम बना है खास। अमर हुआ कोई नहीं, बता रहा इतिहास।।--निर्ब...
clicks 11  Vote 0 Vote  1:00am 1 Jul 2020

ग़ज़ल "जीने का आधार हो गया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

पथ पर आगे बढ़ते-बढ़ते, पाषाणों से प्यार हो गयाजीवन का दुख-दर्द हमारे, जीने का आधार हो गया--पत्थर का सम्मान करो तो, देवदिव्य वो बन जायेगापर्वतमालाओं में उपज...
clicks 18  Vote 0 Vote  1:00am 30 Jun 2020
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