उच्चारण

दोहे "कृष्णचन्द्र गोपाल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

बीत गया सावन सखे, आया भादौ मास।जन्मदिवस श्रीकृष्ण का,पर्व बहुत है खास।।दोपायों से हो रहे, चौपाये भयभीत।मिल पायेगा फिर कहाँ, दूध-दही नवनीत।।जब आयेंगे देश...
clicks 2  Vote 0 Vote  4:30am 24 Aug 2019

ग़ज़ल "सच्चाई अब डरने लगी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

झूठ से सच्चाई अब डरने लगीबेवफाई वफा से लड़ने लगीजब से अपने शहर आवारा हुएरास्तों में गन्दगी बढ़ने लगीजब से पच्छिम की चलीं हैं आँधियाँगाँव में अश्लीलता स...
clicks 5  Vote 0 Vote  9:49am 23 Aug 2019

दोहे "बदल गये हैं चित्र" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

नाजुक दौर निकल गया, बदल गये हैं मित्र।हुआ खेल का अन्त तो, बदल गये हैं चित्र।।--मानव मन की हो गयी, हालत बड़ी विचित्र।बाजारों में बिक रहा, अब तो चित्त-चरित्...
clicks 8  Vote 0 Vote  4:30am 23 Aug 2019

लघु कथा "माँ की ममता" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

लघु कथा-माँ की ममता     रम्भा देवी का एक ही बेटा है अर्जुन, जो मूम्बई में किसी कम्पनी में वाचमैन की नौकरी करता है। उसका परिवार उसके साथ ही रहता है। अ...
clicks 6  Vote 0 Vote  4:00am 22 Aug 2019

ग़ज़ल "साथ चलना सीखिए" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आदतें अपनी बदलना सीखिएजिन्दगी में साथ चलना सीखिएकंकड़ों और पत्थरों की राह मेंठोकरें खाकर सँभलना सीखिएदुःख और सुख जिन्दगी के अंग हैंफूल के मानिन्द ...
clicks 3  Vote 0 Vote  4:00am 21 Aug 2019

दोहे "चित्रकारिता दिवस" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

चित्रकारिता दिवस पर, सुखद बना संयोग।लिए कैमरा हाथ में, निकल पड़े हैं लोग।।--संग किसी के परिणिता, चली घूमने साथ।किसी-किसी ने प्रेयसी, का थामा है हाथ।।--क...
clicks 10  Vote 0 Vote  12:24pm 19 Aug 2019

गीत "मौत का पैगाम लाती है सुरा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

ज़िन्दगी को आज खाती है सुरा।मौत का पैगाम लाती है सुरा।।उदर में जब पड़ गई दो घूँट हाला,प्रेयसी लगनी लगी हर एक बाला,जानवर जैसा बनाती है सुरा।मौत का पैगाम ला...
clicks 9  Vote 0 Vote  6:54am 19 Aug 2019

दोहे "ढुल-मुल नहीं उसूल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जब से थामी केन्द्र ने, काशमीर की डोर।घाटी में होने लगी, तब से सुख की भोर।।--पत्थरबाजों का रुका, घाटी में सैलाब।नवयुवकों के हाथ में, होगी जल्द किताब।।--का...
clicks 10  Vote 0 Vote  12:30pm 18 Aug 2019

गीत "कॉफी की तासीर निराली" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

क्षणिक शक्ति को देने वाली।कॉफी की तासीर निराली।।जब तन में आलस जगता हो,नहीं काम में मन लगता हो,थर्मस से उडेलकर कप में,पीना इसकी एक प्याली।कॉफी की तासी...
clicks 8  Vote 0 Vote  9:19am 18 Aug 2019

देशभक्ति गीत "देशप्रेम का दीप जलेगा, एक समान विधान से" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

लालचौक पर आज तिरंगा, लहराता अभिमान से।आजादी का जश्न हो रहा, देखो कितनी शान से।।पत्थरबाजों के कुकृत्य से, मुक्त हो गयी है घाटी,उग्रवाद-आतंकवाद की, खतम ह...
clicks 14  Vote 0 Vote  6:16pm 16 Aug 2019
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