उच्चारण

गीत "पहाड़ों की सतह में" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

है यहाँ जीवन कठिन,वातावरण कितना सलोना।बाँटता सुख है सभी को,मखमली जैसा बिछौना।पेड़-पौधें हैं सजीले,खेत हैं सीढ़ीनुमा,पर्वतों की घाटियों में,पल रही है हर...
clicks 2  Vote 0 Vote  1:01pm 19 Dec 2018

दोहे "ज्ञान न कोई दान" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’).

लोगों अपने आप पर, करना यह अहसान।भूले से भी कृतघ्न को, मत देना सम्मान।।जो खाता जिस थाल में, करता उसमें छेद।ऐसे कपटी व्यक्ति को, कभी न देना भेद।।मतलब वाले...
clicks 11  Vote 0 Vote  12:02pm 18 Dec 2018

दोहे "कुम्भ की महिमा अपरम्पार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कुम्भ शब्द बहुविकल्पी, जिसके अर्थ अनेक।मन में होना चाहिए, श्रद्धाभाव-विवेक।।कुम्भराशि में हो गुरू, मेष राशि में सूर्य।तभी चमकती वो धरा, जैसे हो वैदू...
clicks 9  Vote 0 Vote  3:24pm 17 Dec 2018

ग़ज़ल "अपने ज़माने याद आते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

हमें जब भी हसीं लम्हे पुराने याद आते हैंतुम्हें मिलने-मिलाने के बहाने याद आते हैंचमन में गूँजती हैं आज भी वो ही सदाएँ हैंतुम्हारे गुनगुनाए गीत-गाने याद ...
clicks 15  Vote 0 Vote  11:04am 15 Dec 2018

दोहे "कठिन झेलना शीत" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सरदी पड़ती ग़ज़ब की, गया दिवाकर हार।मैदानी भूभाग में, कुहरे की है मार।।--लकड़ी-ईंधन का हुआ, अब तो बड़ा अभाव।बदन सेंकने के लिए, कैसे जले अलाव।।--हैं काजू-बाद...
clicks 10  Vote 0 Vote  10:51am 14 Dec 2018

गीत "पौधे मुरझाये गुलशन में" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सुख का सूरज नहीं गगन में।कुहरा पसरा है कानन में।।पाला पड़ता, शीत बरसता,सर्दी में है बदन ठिठुरता,तन ढकने को वस्त्र न पूरे,निर्धनता में जीवन मरता,पौधे मुरझ...
clicks 8  Vote 0 Vote  3:04pm 13 Dec 2018

तेरह दोहे "फूली-फूली रोटियाँ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

फूली रोटी देखकर, मन होता अनुरक्त।हँसी-खुशी से काट लो, जैसा भी हो वक्त।१।फूली-फूली रोटियाँ, सजनी रही बनाय।बाट जोहती है सदा, कब साजन घर आय।२।घर के खाने में भ...
clicks 13  Vote 0 Vote  4:20pm 12 Dec 2018

दोहे "महज नहीं संयोग" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

उलटफेर परिणाम में, महज नहीं संयोग।तानाशाही को सहन, कब तक करते लोग।।जनता की तो नाक में, पड़ती नहीं नकेल।जनमत पर ही है टिका, लोकतन्त्र का खेल।।जनसेवक जनतन्...
clicks 8  Vote 0 Vote  6:54pm 11 Dec 2018

दोहे "महावीर हनुमान" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 पुरखों का इससे अधिक, होगा क्या अपमान।जातिवाद में बँट गये, महावीर हनुमान।।राजनीति के बन गये, दोनों आज गुलाम।जनता को लड़वा रहे, पण्डित और इमाम।।भजन-य...
clicks 13  Vote 0 Vote  5:44pm 10 Dec 2018

संस्मरण "वो पतला सा शॉल" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

वो पतला सा शॉल      आज से ठीक अट्ठारह साल पुरानी बात है। उत्तराखण्ड को जन्मे हुए उस समय एक मास ही हुआ था और उसके पहले मनोनीत मुख्यमन्त्री थे नित्य...
clicks 6  Vote 0 Vote  1:42pm 9 Dec 2018
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