चैतन्यपूजा

आशादीप

निराशा के अंधकार में डूबे हुए  मनों में आओ आशाओं के दीप जलाएं प्रकाश तो खुदमें ही था हमेशासे बुझे हर मनको आओ फिरसे बताएं मन जरा बुझा पर प्रकाश तो नही...
clicks 48  Vote 0 Vote  5:57pm 7 Nov 2018

मंथन: देवी मां के भक्तों ने फेमिनिस्ट क्यों होना चाहिए।

नवरात्रोत्सव का उल्लास और उमंग हर ओर छायी हुई है। नवरात्रि में प्रतिदिन देवी मां की पूजा हम एक भिन्न रूप नौ दिनों तक करते हैं। इस नवरात्रि में जो परिदृ...
clicks 9  Vote 0 Vote  1:12am 14 Oct 2018

क्षणिका: मीठी यादोंमें

सदाही अशांत, अस्वस्थ, और चंचल रहनेवाले मन के लिए प्रेम जैसी कोई दूसरी औषधि नहीं हो सकती। प्यारकी मीठी यादों पर चैतन्यपूजा की नई प्रस्तुति, एक क्षणिका 'म...
clicks 51  Vote 0 Vote  8:46am 30 Sep 2018

सर्वमान्य और सर्व-स्वीकृत अटल

अटलप्रवाह ये कविता अटलजी को आदरांजली लिखने के प्रयास में बन गयी। गहरे शोक की इन भावनाओं लिखकर मैं शायद ठीक से समझ पाऊं इसलिए ये प्रयास। मैंने जो लिखने क...
clicks 58  Vote 0 Vote  7:53pm 22 Aug 2018

भावस्पन्दन: अटलप्रवाह

अटलजी के जाने से हर ओर शोक फैल गया। आज की प्रस्तुति अटलजी को समर्पित कुछ पंक्तियां उनकीही कविताओं की ऊर्जा से प्रेरित। एक सिसकी  सहमी सी चुपकेसे गिरी ज...
clicks 74  Vote 0 Vote  12:47pm 19 Aug 2018

प्रार्थना: अर्पित

हिन्दू संस्कृति के अनुसार धार्मिक व्रत और ईश्वर की उपासना के लिए वर्ष का सबसे उत्तम समय चातुर्मास चल रहा है। इन चार पवित्र महीनों में विभिन्न व्रतों क...
clicks 65  Vote 0 Vote  5:50pm 4 Aug 2018

व्यंग: नेताओं की फकीरी

आजके समय में राजनीति में एक सकारात्मक बदलाव नजर आ रहा है। फकीर लोग झोला लेकर जनसामान्यों के नेता बन रहे हैं और अपने बढ़ते कार्य से जनता के जीवन में फकीरी क...
clicks 25  Vote 0 Vote  11:27am 27 Jun 2018

नेताओं की फकीरी

आजके समय में राजनीति में एक सकारात्मक बदलाव नजर आ रहा है। फकीर लोग झोला लेकर जनसामान्यों के नेता बन रहे हैं और अपने बढ़ते कार्य से जनता के जीवन में फकीरी क...
clicks 47  Vote 0 Vote  11:27am 27 Jun 2018

कविता: छांव यादों की...

अप्रिल महिने में प्रतिदिन एक कविता ब्लॉग पर प्रकाशित करने का एक प्रयास किया था जो कि आप सबके प्रोत्साहन से यशस्वी भी रहा। वे कविताएं अंग्रेजी में हैं। ...
clicks 37  Vote 0 Vote  2:14pm 13 Jun 2018

भावस्पंदन: नयनाभिराम

रात के साढ़े ग्यारह बजे हमारी बस मुंबई से धुले की ओर चल पड़ी । बस  धीरे धीरे शहर को छोड़कर हाईवे पर आते ही  अपनी रफ़्तार तेज करने लगी। दो दिन मुंबई की अपरिचित भ...
clicks 59  Vote 0 Vote  7:30pm 1 Mar 2018
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