चर्चामंच

चर्चा - 3589

आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत हैयह उपवन आजादकुमार अम्बुज की कविताएँबिक रहे हैं लोग सरेआम दोपहर मेंलघु कविता-संग्रहजो तुम चाहो दिल समाधि का फू...
clicks 5  Vote 0 Vote  12:01am 23 Jan 2020

"देश मेरा जान मेरी" (चर्चा अंक - 3588)

मित्रों ! कल  नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन है, जो हम प्रतिवर्ष मनाते ही हैं। हाँ यह बात अलग है कि कहीं तो इसे धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाता ...
clicks 10  Vote 0 Vote  1:00am 22 Jan 2020

"आहत है परिवेश" (चर्चा अंक - 3587)

मित्रों ! शरद ऋतु धीरे-धीरे पलायन करती जा रही है। वार्षिक परीक्षा सिर पर खड़ी है। इसलिए छात्रों को चाहिए कि वो अपना अधिक से अधिक समय पठन-पाठन में लगायें।...
clicks 11  Vote 0 Vote  12:01am 21 Jan 2020

"बेनाम रिश्ते "(चर्चा अंक - 3586)

स्नेहिल अभिवादन।विशेष सोमवारीय प्रस्तुति में आपका स्वागत है।आजकल उभर आया है बातों में है विरोधाभास,ख़लिश रहती है दिल में  ओस में भीगे हैं एहसा...
clicks 16  Vote 0 Vote  12:01am 20 Jan 2020

"लोकगीत" (चर्चा अंक - 3585)

स्नेहिल अभिवादन।  रविवारीय प्रस्तुति में आपका हार्दिक स्वागत है।भारतीय संस्कृति की आत्मा लोकगीतों में बसती है,  यह कहना अतिश्योक्ति न होगी. लोक-प...
clicks 5  Vote 0 Vote  12:01am 19 Jan 2020

"शब्द-सृजन"- 4 (चर्चा अंक - 3584)

स्नेहिल अभिवादन। विशेष शनिवारीय प्रस्तुति में हार्दिक स्वागत है।पिपासा अर्थातप्यास, तृष्णा, चाह, लालसा, लोभआदि।  जीवन में पिपासा अलग-अलग अर्थों मे...
clicks 4  Vote 0 Vote  12:01am 18 Jan 2020

"सूर्य भी शीत उगलता है"(चर्चा अंक - 3583)

स्नेहिल अभिवादन ठंड अपने पूरी उफान पर है, मानो हम से कह रही हो इस घने कोहरे की चादर में तुम सबको लपेटे बिना मैं वापस नहीं जाऊंगा.. पर जाना तो सबको है फिर एक ...
clicks 18  Vote 0 Vote  12:01am 17 Jan 2020

चर्चा - 3582

आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत हैत्योहारों की गठरी एक अभाव की जिन्दगीसफेदपोशी चाँद का घर है आसमां मौन के भी शब्द होते हैं.खंजना सरमा की कविताए...
clicks 4  Vote 0 Vote  5:30am 16 Jan 2020

"मैं भारत हूँ" (चर्चा अंक - 3581)

मित्रों !चर्चा मंच विगत 11 वर्षों से अनवरत रूप से हिन्दी ब्लॉगों के लिंकों को पाठकों तक पहुँचाता रहा है। उद्देश्य मात्र यही है आपकी अद्यतन प्रविष्टियों क...
clicks 5  Vote 0 Vote  1:00am 15 Jan 2020

"सरसेंगे फिर खेत" (चर्चा अंक - 3580)

--मित्रों !लोहड़ी/मकर संक्रान्ति ने इस समय त्यौहारों-पर्वों का वातावरण बना दिया है। इसलिए आज पूरे देश में हर्ष और उल्लास का माहौल बन गया है। एक ओर जहाँ गुज...
clicks 5  Vote 0 Vote  1:00am 14 Jan 2020
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