प्रेमरस

देश का सबसे बड़े मुद्दा - हमारे न्यूज़ चैनल्स

काफी दिनों से सैफ और करीना खासे परेशान चल रहे थे और उन की परेशानी का सबब था कि देश के इकलौते होनहार बालक तैमूर को पोटी नहीं आना, कई दिनों तक पूरा घर ही नहीं ब...
clicks 14  Vote 0 Vote  9:56am 17 Apr 2018

यह तो है कि मैं यहाँ तन्हा नहीं : ग़ज़ल

यह तो है कि मैं यहाँ तन्हा नहींतुझसे भी तो पर कोई रिश्ता नहींतिश्नगी तो है मयस्सर आपकीजुस्तजू दिल में मगर रखता नहींसाज़िशों से जिसकी हों ना यारियांआज कोई...
clicks 35  Vote 0 Vote  11:53am 20 Dec 2017

ग़ज़ल: फ़क़त रिश्ता बना के क्या करोगे

मेरी यादों में आके क्या करोगे आस दिल में जगा के क्या करोगे ज़माने का बड़ा छोटा सा दिल है सबसे मिल के मिला के क्या करोगे अगर राहों में ही वीरानियाँ हों इतनी ब...
clicks 53  Vote 0 Vote  11:50am 15 Dec 2017

ऐसे नाज़ुक वक़्त में हालात को मत छेड़िए - अदम गोंडवी

आज के मौजूं पर अदम गोंडवी साहबकी कुछ मेरी पसंदीदा ग़ज़लें:आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहेअपने शाहे-वक़्त का यूँ मर्तबा आला रहेतालिबे शोहरत हैं कै...
clicks 54  Vote 0 Vote  2:13pm 12 Dec 2017

व्यवस्था परिवर्तन के लिए सतत मेहनत की ज़रूरत है

"लोकतंत्र कमज़ोर है, वोट खरीदे जाते है, बूथ कैप्चर किये जाते है, मतगणना मे धांधली करवाई जाती है, विधायक और सांसद खरीदे जाते है, पूंजीवादी व्यवस्था है, भ्रष्ट...
clicks 100  Vote 0 Vote  3:27pm 16 Aug 2017

फलफूल रही है नफरत की राजनीति

कट्टरता से नफ़रत, नफ़रत से हिंसा और हिंसा से बर्बादी आती है!किसी समुदाय के नाम, पहनावे या चेहरे-मोहरे को देखकर या फिर गौमाँस जैसे इल्जाम पर कट्टरपंथी तत्व ल...
clicks 69  Vote 0 Vote  4:50pm 11 Aug 2017

जीवन नहीं समय अनमोल है

डेंगू, चिकन गुनिया जैसी बीमारियों से निपटने में हमारी उदासीनता और जीवन को जोखिम में डालने की हमारी आदतों पर दैनिक जनवाणी में मेरा कटाक्ष..."हरियालीहोनेक...
clicks 80  Vote 0 Vote  9:32am 27 Jul 2017

मेरा वजूद बदलता दिखाई देता है

उधर से चिलमन सरकता दिखाई देता हैइधर नशेमन फिसलता दिखाई देता हैतुझे पता क्या तेरे फैसले की कीमत हैमेरा वजूद बदलता दिखाई देता हैउमड़-उमड़ के जो आते हैं मेघ आ...
clicks 332  Vote 0 Vote  3:54pm 7 Jun 2016

कहो कब तलक यूँ सताते रहोगे

कहो कब तलक यूँ सताते रहोगे  कहाँ तक हमें आज़माते रहोगे  सवालों पे मेरे बताओ ज़रा तुम  यूँ कब तक निगाहें झुकाते रहोगे  हमें यूँ सताने को आख़ीर कब तक  रक़...
clicks 189  Vote 0 Vote  11:14am 25 May 2016

पकड़ ले आइना हाथों में बस उनको दिखाता चल

हज़ारों साज़िशें कम हैं सियासत की अदावत कीहर इक चेहरे के ऊपर से नकाबों को हटाता चलकभी सच को हरा पाई हैं क्या शैतान की चालें?पकड़ ले आइना हाथों में बस उनको दिख...
clicks 203  Vote 0 Vote  10:12am 23 Feb 2016
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