किरण की दुनिया

तेरी कहानी-1

रामरती (एक थी रामरती ) अपनी निर्भीकता कई पीढ़ियों में बाँट कर आखिर अपनी कोशिश में कामयाब हो ही जाती  और तैयार कर ही देती है न जाने कितनी मणिकर्णिका।दरवाजे...
clicks 28  Vote 0 Vote  10:07pm 1 Apr 2018

सुनो परदेसी !

वो जहाँ हम मिलते थे खेत कितने होते थे हरे पीले और किसान कितने होते थे खुश गुड की मीठी खुशबू हवा में तैरती चिपक जाती थी हमारे चेहरे पर उसका जायका जैसे कच्ची ...
clicks 54  Vote 0 Vote  10:42am 12 Mar 2018

पुरुषों के नाम पत्र

पुरुषों के नाम पत्र------------------------एक पत्र जो आप को वो पात्र बना देगा जिसकी कोशिश आप एक युग से कर रहे है....सारी दुनिया औरत के इर्द गिर्दऔरत की दुनिया चूल्हे के इर्...
clicks 64  Vote 0 Vote  11:35am 8 Mar 2018

तुतलाते बोलों में मौत की आहट

एक अंतहीन रात मेंएक औरत तोडना चाहती है दुस्वप्न के जालों कोवो छाती की दर्दनाक गांठ में दबेउस शून्य को निकाल देना चाहती हैजो हर चीख के साथ बढ़ता जाता हैऔर ...
clicks 49  Vote 0 Vote  10:58pm 5 Mar 2018

कविता का दिक्‌ काल

कुछ ठेके पर उठी कविताएंअपने आप पर रश्क़ कर सकती है उनके मालिक कुछ ख़ास किस्म के होते है। दुनिया उन्हें सलाम करती है।वैसे सजदा करते उनकी भी उम्र बीत रही है।क...
clicks 30  Vote 0 Vote  7:39pm 12 Feb 2018

घनघोर अंधेरे में

घनघोर अंधेरे में जो दिखती है,वो उम्मीद है जीवन कीहिंसक आस्थाओं के दौर में प्रार्थनाएं डूब रही हैअन्धकार के शब्द कुत्तों की तरह गुर्रातेभेड़ियों की तरह झ...
clicks 37  Vote 0 Vote  9:54pm 30 Jan 2018

सागर लहरी सा प्रेम

ले चल मुझे भुलावा दे कर मेरे नाविक धीरे-धीरेजिस निर्जन में सागर लहरी, अम्बर के कानों में गहरीनिश्चल प्रेम कथा कहती हो तज कोलाहल की अवनि रे”( जयशंकर प्रसाद...
clicks 40  Vote 0 Vote  4:42pm 27 Jan 2018

बीते बरस .....तुम जाते कहां हो

बीते बरस बीत गए ये सोच कर की आने वाले बरस कैसे बीतेंगे थोड़ी सी ख़ुशी देकर या बेरुखी से मुह मोड़ कर फिर चल देंगे ,साथ छोड़ कर। ये क्रम यूं ही चलेगा ,ये रहा गुजर रह...
clicks 54  Vote 0 Vote  12:12pm 1 Jan 2018

एक था सरवन

एक था सरवनपालकी उठाता थाजेठ की लू मेंपूस के जाड़े मेंगीत गाता थाचैता सुनाता थासरवन की पालकी मेंठहर गया एक दिनचुलबुला वसंतप्रीत कुसुंभ के संगफिर प्रेम र...
clicks 66  Vote 0 Vote  6:00pm 29 Dec 2017

न्याय की आस्थाएं

उसकी पीठ पर बैजनी फूल बंधे थे और हाथ में सपने अभी अभी उगे पंख उसने करीने से सजा रखे थे कुछ जुगनू उसके होठों पर चिपके थे कुछ हँसी बन आसमान मेंवो एक ...
clicks 52  Vote 0 Vote  8:50pm 16 Dec 2017
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