किरण की दुनिया

प्याली में तुफान

मानव समाज जब ताम्रयुग में पहुंचता हैसंस्कृति जब ग्रामीण पृष्ठभूमि पर खडीचरखे से बनाती है सभ्यताओं के विकास के धागेजिन का छोर पकड़प्राचीन जगत की नदीघाटी...
clicks 19  Vote 0 Vote  11:32am 5 Dec 2017

भाद्रपद के चाँद सा प्रेम

प्रेम की निर्जनता में उदासी हमेशा स्लेटी रंग की क्यों होती है?यही पूछा था न मैं नेऔर तुमने हस कर कहा थाबिना संकट के कुछ भी सार्थक की प्रति संभव कहां,संभव त...
clicks 20  Vote 0 Vote  12:37pm 9 Oct 2017

प्रेम पथ

प्रेम की निर्जनता में उदासी हमेशा स्लेटी रंग की क्यों होती हैयही पूछा था न मैं नेऔर तुमने हस कर कहा थाबिना संकट के कुछ भी सार्थक की प्रति संभव कहांसंभव तभ...
clicks 25  Vote 0 Vote  5:07pm 6 Oct 2017

सहजता ही जीवन है

जिंदगी मौत भी एक उम्र में मालूम हुआ।मेरा होना था महज़ मेरे न होने के लिए।।स्व. कुंवर रघुवीरसिंह ने सच ही लिखा इस दुनिया में प्रत्येक चीज का मूल्य चुकाना पढ...
clicks 16  Vote 0 Vote  11:02am 31 Aug 2017

स्त्री स्वर्ग का फाटक

पीड़ा की नीव में दबी वासना सुखी हो उठीजब जब स्त्री करहाई ,चिल्लाईऔर इस तरह बर्बर दंड ने जन्म लिया इस पृथ्वी परहर करहाने के बाद शिकारी बढते गएपहला शिकारी को...
clicks 41  Vote 0 Vote  9:51pm 27 Aug 2017

स्वधीनता की तरफ लौटने का समय

स्वतंत्रता का पौधा शहीदों के रक्त से फलता है लेकिन स्वतंत्रत हुए पौधें को स्वाधीन रहने के लिए किस तरह के हवा, पानी की जरुरत पड़ेगी ये विचार अपने आप में स्व...
clicks 46  Vote 0 Vote  4:44pm 20 Aug 2017

खड़कती खिड़कियां

दुनिया की सारी चीख़ें मेरे जहान में हैजेहन में रहना कोई अच्छी बात नहींइससे मांगने का डर रहता हैइंसाफ दर्द देता हैमेरे अंदर एक चुप्पी हैजिसे सुनकरखिड़किय...
clicks 42  Vote 0 Vote  7:04pm 24 Jul 2017

सूफ़ी पात

दरवेश से होते है पत्तेयहां वहां बिचरते हुयेबेनियाज़शाखों पर लगे ये करते हैं जुहदअतीत के गुम ये यायावरनिकल आते हैकच्ची दीवारों पुराने खंडहरों सेऔर पहुं...
clicks 77  Vote 0 Vote  10:24am 5 Jul 2017

अहसासों की बारिश

स्फटिक की छत कुछ देर पहले की बारिश से धुल कर किसी नायिका की हीरे की लौंग सी चमक रही है । छत के कोने पर रातरानी की डाल जैसे चूमना चाहती है उन सफेद लिहाफ को जो ...
clicks 28  Vote 0 Vote  5:29pm 1 Jul 2017

उनींदे समय में शब्द

इस उनींदे समय मेंशब्द जाग रहे हैवो बना रहे है रास्ताउन के विरुद्धजो जला कर देह कोसुर आत्मा से निकाल रहे हैवो ख़ामोश हो जाते हैउन चुप्पियों के विरुद्धजो उ...
clicks 48  Vote 0 Vote  12:35pm 28 Jun 2017
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