किरण की दुनिया

कविता का दिक्‌ काल

कुछ ठेके पर उठी कविताएंअपने आप पर रश्क़ कर सकती है उनके मालिक कुछ ख़ास किस्म के होते है। दुनिया उन्हें सलाम करती है।वैसे सजदा करते उनकी भी उम्र बीत रही है।क...
clicks 10  Vote 0 Vote  7:39pm 12 Feb 2018

घनघोर अंधेरे में

घनघोर अंधेरे में जो दिखती है,वो उम्मीद है जीवन कीहिंसक आस्थाओं के दौर में प्रार्थनाएं डूब रही हैअन्धकार के शब्द कुत्तों की तरह गुर्रातेभेड़ियों की तरह झ...
clicks 23  Vote 0 Vote  9:54pm 30 Jan 2018

सागर लहरी सा प्रेम

ले चल मुझे भुलावा दे कर मेरे नाविक धीरे-धीरेजिस निर्जन में सागर लहरी, अम्बर के कानों में गहरीनिश्चल प्रेम कथा कहती हो तज कोलाहल की अवनि रे”( जयशंकर प्रसाद...
clicks 24  Vote 0 Vote  4:42pm 27 Jan 2018

बीते बरस .....तुम जाते कहां हो

बीते बरस बीत गए ये सोच कर की आने वाले बरस कैसे बीतेंगे थोड़ी सी ख़ुशी देकर या बेरुखी से मुह मोड़ कर फिर चल देंगे ,साथ छोड़ कर। ये क्रम यूं ही चलेगा ,ये रहा गुजर रह...
clicks 39  Vote 0 Vote  12:12pm 1 Jan 2018

एक था सरवन

एक था सरवनपालकी उठाता थाजेठ की लू मेंपूस के जाड़े मेंगीत गाता थाचैता सुनाता थासरवन की पालकी मेंठहर गया एक दिनचुलबुला वसंतप्रीत कुसुंभ के संगफिर प्रेम र...
clicks 47  Vote 0 Vote  6:00pm 29 Dec 2017

न्याय की आस्थाएं

उसकी पीठ पर बैजनी फूल बंधे थे और हाथ में सपने अभी अभी उगे पंख उसने करीने से सजा रखे थे कुछ जुगनू उसके होठों पर चिपके थे कुछ हँसी बन आसमान मेंवो एक ...
clicks 38  Vote 0 Vote  8:50pm 16 Dec 2017

बोलो पद्मावती

पद्मावतीइतिहास की वीथिका में भटकतीक्या सोच रही हो ,खिलजी चला गया ?देह की राख से शांति के महल मत बनाओठुड्डी पर बने तुम्हारे तिल की चाहत लिएलौटता आदमखोर बा...
clicks 62  Vote 0 Vote  11:08am 15 Dec 2017

प्याली में तुफान

मानव समाज जब ताम्रयुग में पहुंचता हैसंस्कृति जब ग्रामीण पृष्ठभूमि पर खडीचरखे से बनाती है सभ्यताओं के विकास के धागेजिन का छोर पकड़प्राचीन जगत की नदीघाटी...
clicks 41  Vote 0 Vote  11:32am 5 Dec 2017

भाद्रपद के चाँद सा प्रेम

प्रेम की निर्जनता में उदासी हमेशा स्लेटी रंग की क्यों होती है?यही पूछा था न मैं नेऔर तुमने हस कर कहा थाबिना संकट के कुछ भी सार्थक की प्रति संभव कहां,संभव त...
clicks 37  Vote 0 Vote  12:37pm 9 Oct 2017

प्रेम पथ

प्रेम की निर्जनता में उदासी हमेशा स्लेटी रंग की क्यों होती हैयही पूछा था न मैं नेऔर तुमने हस कर कहा थाबिना संकट के कुछ भी सार्थक की प्रति संभव कहांसंभव तभ...
clicks 44  Vote 0 Vote  5:07pm 6 Oct 2017
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