किरण की दुनिया

लोक का रंग लोकगीत

रोपा रोपे गेले रे डिंडा दंगोड़ी गुन्गु उपारे जिलिपी लगायेलाजो नहीं लगे रे डिंडा दंगोड़ी गुन्गु उपारे जिलिपी लगायेहर जोते गेले रे डिंडा दंगोड़ा एड़ी भईर तो...
clicks 19  Vote 0 Vote  9:31am 12 Nov 2018

शहर क्यूँ साएँ साएँ करता है

हवा में ठंडक है शायद गांव में कांस फूला हैआज धूप का मिजाज़ किसी प्रेमिका सा है जो बार-बार छत पर आती जाती है इंतजारे इश्क में । बाहर हल्का शोर है लेकिन भीतर श...
clicks 47  Vote 0 Vote  9:37pm 29 Sep 2018

उदगीथ 🌾🌾🌾

भूख के रूदन कोशांत कराती स्त्री रचती है गीतऔर इस तरहभूख के भय को करती है कमउदगीथ, रचिता को अन्न से कर धन्यचल पड़ता हैगुंजाते गूंजतेतमाम युद्धों, बर्बरता स...
clicks 21  Vote 0 Vote  3:44pm 17 Sep 2018

जिंदगी की धुन

समय के भाल पर न जाने कितनी गीत- संगीत सजे है न जाने जिंदगी ने कितने रूप धरे है ।प्रकृति की सारी थिरकन सिर्फ उसी से हैजिगर की पीर हल्की और दिल से रूह के रिश्त...
clicks 57  Vote 0 Vote  9:50am 7 Sep 2018

स्वतंत्रता का अनुष्ठान

🇮🇳 🇮🇳स्वतंत्रता का आलोकहर तरफ फैला ही था किअपनी- अपनी पताका के साथअपने -अपने उदघोष हुएद्वार पर ही स्वतंत्रता ठिठक गईप्रकाश की किरणें धीरे- धीरे काट दी ग...
clicks 62  Vote 0 Vote  1:21pm 15 Aug 2018

तेरी कहानी-1

रामरती (एक थी रामरती ) अपनी निर्भीकता कई पीढ़ियों में बाँट कर आखिर अपनी कोशिश में कामयाब हो ही जाती  और तैयार कर ही देती है न जाने कितनी मणिकर्णिका।दरवाजे...
clicks 76  Vote 0 Vote  10:07pm 1 Apr 2018

सुनो परदेसी !

वो जहाँ हम मिलते थे खेत कितने होते थे हरे पीले और किसान कितने होते थे खुश गुड की मीठी खुशबू हवा में तैरती चिपक जाती थी हमारे चेहरे पर उसका जायका जैसे कच्ची ...
clicks 101  Vote 0 Vote  10:42am 12 Mar 2018

पुरुषों के नाम पत्र

पुरुषों के नाम पत्र------------------------एक पत्र जो आप को वो पात्र बना देगा जिसकी कोशिश आप एक युग से कर रहे है....सारी दुनिया औरत के इर्द गिर्दऔरत की दुनिया चूल्हे के इर्...
clicks 110  Vote 0 Vote  11:35am 8 Mar 2018

तुतलाते बोलों में मौत की आहट

एक अंतहीन रात मेंएक औरत तोडना चाहती है दुस्वप्न के जालों कोवो छाती की दर्दनाक गांठ में दबेउस शून्य को निकाल देना चाहती हैजो हर चीख के साथ बढ़ता जाता हैऔर ...
clicks 91  Vote 0 Vote  10:58pm 5 Mar 2018

कविता का दिक्‌ काल

कुछ ठेके पर उठी कविताएंअपने आप पर रश्क़ कर सकती है उनके मालिक कुछ ख़ास किस्म के होते है। दुनिया उन्हें सलाम करती है।वैसे सजदा करते उनकी भी उम्र बीत रही है।क...
clicks 58  Vote 0 Vote  7:39pm 12 Feb 2018
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