डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा के पास) गुजरात

ये उदासी मेरे दिल की नहीं जाने वाली.

ग़ज़लये उदासी मेरे दिल की नहीं जाने वाली.हाथ अब ज़िंदगी वापस नहीं आने वाली.कैसे जीते हो अकेले भला तन्हाई में,बात मत पूछो कोई मुझसे रुलाने वाली.लाश अपनी को...
clicks 20  Vote 0 Vote  10:31pm 11 Feb 2018

अब पकोड़ों को बनाओ लोगो.

ग़ज़लअब पकोड़ों को बनाओ लोगो.खुद भी खाओ व खिलाओ लोगो.हाथ धर सर पे यूँ रोते क्यों हो,और सर हमको बिठाओ लोगो.सीख लो चाय बनाने का हुनर,बाद में सबको  बनाओ लोगो....
clicks 16  Vote 0 Vote  5:18am 3 Feb 2018

और क्या आग लगाओगे बताओ तो सही.

ग़ज़लऔर क्या आग लगाओगे बताओ तो सही.फिर मुझे छोड़ के जाओगे बताओ तो सही. आँसू बनकर जो उमड़ा मैं कभी आँखों में,हँस के पलकों पे छिपाओगे बताओ तो सही.हमसे बिछुड़...
clicks 26  Vote 0 Vote  8:15pm 1 Feb 2018

अश्कों को इन आँखों से बर्बाद किया जाये.

ग़ज़लअश्कों को इन आँखों से बर्बाद किया जाये.उस बेवफ़ा को फिर से अब याद किया जाये.टूटे जो मकां कोई आबाद करें उसको,टूटा हुआ ये दिल ना आबाद किया जाये.सूरत ही न...
clicks 31  Vote 0 Vote  6:32pm 29 Jan 2018

मैं जहां भी गया यादें भी तेरी साथ रहीं,

ग़ज़लदिल का ये ज़ख़्म है गहरा नहीं भरने वाला. तेरा शैदाई ये ज़ल्दी नहीं मरने  वाला.मैं जहां भी गया यादें भी तेरी साथ रहीं,ये नशा अब न मुहब्बत का उतरने व...
clicks 19  Vote 0 Vote  7:00pm 28 Jan 2018

मेरी तन्हाईयाँ लगता है मुझको मार डालेंगी.

ग़ज़लतेरी यादें कहां तक अब भला मुझको संभालेंगी.मेरी तन्हाईयाँ लगता है मुझको मार डालेंगी.तुम्हें शिकवे बहुत थे ये कि ज़्यादा बोलता हूँ मैं,मेरी ख़ामोशि...
clicks 33  Vote 0 Vote  10:35pm 10 Jan 2018

तेरी गली तो क्या, तेरा शहर भी छोड़ दिया .

ग़ज़लकभी जो नाता था तुझसे, वो कब का तोड़ दिया.तेरी गली तो क्या, तेरा शहर भी छोड़ दिया .क़फ़स में सांस भी लेने में दिक्कतें थी बहुत,अना ने हमको भी अंदर से ...
clicks 43  Vote 0 Vote  10:48pm 2 Jan 2018

चेहरे की चमक, होटों की मुस्कान ले गया.

ग़ज़लचेहरे की चमक, होटों की मुस्कान ले गया.जीने के मेरे सारे ,वो अरमान ले गया .सिगरिट, शराब, अश्क, तन्हाई, व बेकली,किन रास्तों पे मेरा, महरबान ले गया.अब लोग पू...
clicks 22  Vote 0 Vote  7:54pm 31 Dec 2017

घर मेरे उसने जो आना चाहा.

ग़ज़लघर मेरे उसने जो आना चाहा.रास्ता सबने भुलाना चाहा.और भी सर पे चढ़ गये अपने,हमने उनको जो मनाना चाहाऐब गिनवाके मेरे मुहसिन ने,दूर जाने का बहाना चाहा.तोड...
clicks 34  Vote 0 Vote  10:57pm 30 Dec 2017

हाथ में जब भी जाम लेते हैं.

ग़ज़लहाथ में जब भी जाम लेते हैं.बेवफ़ाओं का नाम लेते हैं.हमसे रखते हैं फ़ासले अक्सर,सबका झुक झुक सलाम लेते है.तुझको रुस्वा नहीं होने देंगे,सब गुनाह अपने न...
clicks 45  Vote 0 Vote  9:30pm 29 Dec 2017
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