डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा के पास) गुजरात

हम गले जो लगे आप घबरा गये, दूसरों को लगाओ तो कुछ भी नहीं.

ग़ज़लहम गले जो लगे आप घबरा गये,दूसरों को लगाओ तो कुछ भी नहीं. बात गन की ज़रूरी हो जिस वक्त में, बात मन की सुनाओ तो कुछ भी नहीं.आँख हमने जो मारी तो हँगामा क...
clicks 16  Vote 0 Vote  9:59pm 4 Aug 2018

फिटनिश ही दिखानी है सरहद पे दिखाओ अब.

ग़ज़लहर रोज़ न सरहद पे बेमौत मराओ अब.फिटनिश ही दिखानी है सरहद पे दिखाओ अब.कश्मीर गया कब का जम्मू भी है जाने को,आँखों पे पड़ा पर्दा बेहतर है हटाओ अब.इस योग स...
clicks 22  Vote 0 Vote  6:48pm 14 Jun 2018

याद आया तो बहुत देर रुलाया उसने.

ग़ज़लयाद आया तो बहुत देर रुलाया उसने.कितनी आसानी से हमको है भुलाया उसने.इससे ज़्यादा कोई  क्या हमसे मुहब्बत करता,मैं जो भूखा रहा इक कौर ना खाया उसने.हाथ ...
clicks 21  Vote 0 Vote  11:26am 2 Jun 2018

चिंता हगने के करते हैं वो हर घड़ी, पहले खाने का उपचार कुछ तो करें.

ग़ज़लचिंता हगने के करते हैं वो हर घड़ी,पहले खाने का उपचार कुछ तो करें.भूख से मर रहे हैं यहां आज हम, हो सके सच का इक़रार कुछ तो करें.आसमां में उड़े हम को कुछ ...
clicks 47  Vote 0 Vote  1:16pm 30 May 2018

अस्लिहे हाथ जो लिए फिरते,

ग़ज़लमेरे लफ़्ज़ों में जान दे मौला.सबको ऊँची उड़ान दे मौला.अस्लिहे हाथ जो लिए फिरते,हाथ उनके क़ुरान दे मौला.भाईचारा ख़ुलूस बख़्श हमें,नेकियों का जहान दे...
clicks 10  Vote 0 Vote  8:42pm 17 May 2018

मैंने भी सुना है लोगों से हाथों में रची तेरे मेंहदी,

ग़ज़लतन्हा तो बहुत पहले भी थे पर इस बार की तन्हाई तौबा.डूबेंगे यकीन लगता है तेरे प्यार  की गहराई तौबा.मैंने भी सुना है लोगों से हाथों में रची तेरे मेंहदी...
clicks 45  Vote 0 Vote  3:36pm 16 May 2018

गुजरात में गुरू जी तगाड़े उठाये हैं.

ग़ज़लअच्छे दिनों ने कैसे कैसे गुल खिलाये हैं.गुजरात में गुरू जी तगाड़े उठाये हैं.एक काम यही बाकी था किस्मत में हमारी,हगते हुए लोगों के भी फोटू खिचाये हैं....
clicks 62  Vote 0 Vote  5:06am 7 May 2018

गमों को हम तो खुशियों में ढाल देते हैं.

ग़ज़लगमों को हम तो खुशियों में ढाल देते हैं.सख़्त पत्थर से भी पानी निकाल देते हैं.जड़ों को काट वतन की बनायें वो बंजर,उगा दरख़्त हम सहरा का हाल देते हैं.बने ...
clicks 58  Vote 0 Vote  10:08am 4 May 2018

हाथ से तो किला गया लोगो,

ग़ज़लसारी ग़लती ये सब हमारी है.पाँव पर जो कुल्हाड़ी मारी है.हाथ से तो किला गया लोगो,ताज़ जाने की अबके बारी है.द्रौपदी देश हो गया अब तो,हार बैठा उसे जुआरी है...
clicks 49  Vote 0 Vote  3:01pm 1 May 2018

मेरी स्क्रीन महक उठती है,

ग़ज़लदूर ही दूर से लुभाते हैं.खूब अच्छा हमें बनाते हैं.मेरी स्क्रीन महक उठती है,ओन लाइन वो जब भी आते हैं.ख़ैर अपनी मनायें नींदों की,नींद मेरी जो अब चुराते ...
clicks 49  Vote 0 Vote  5:29pm 29 Apr 2018
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