डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा के पास) गुजरात

मैंने भी सुना है लोगों से हाथों में रची तेरे मेंहदी,

ग़ज़लतन्हा तो बहुत पहले भी थे पर इस बार की तन्हाई तौबा.डूबेंगे यकीन लगता है तेरे प्यार  की गहराई तौबा.मैंने भी सुना है लोगों से हाथों में रची तेरे मेंहदी...
clicks 10  Vote 0 Vote  3:36pm 16 May 2018

गुजरात में गुरू जी तगाड़े उठाये हैं.

ग़ज़लअच्छे दिनों ने कैसे कैसे गुल खिलाये हैं.गुजरात में गुरू जी तगाड़े उठाये हैं.एक काम यही बाकी था किस्मत में हमारी,हगते हुए लोगों के भी फोटू खिचाये हैं....
clicks 34  Vote 0 Vote  5:06am 7 May 2018

गमों को हम तो खुशियों में ढाल देते हैं.

ग़ज़लगमों को हम तो खुशियों में ढाल देते हैं.सख़्त पत्थर से भी पानी निकाल देते हैं.जड़ों को काट वतन की बनायें वो बंजर,उगा दरख़्त हम सहरा का हाल देते हैं.बने ...
clicks 31  Vote 0 Vote  10:08am 4 May 2018

हाथ से तो किला गया लोगो,

ग़ज़लसारी ग़लती ये सब हमारी है.पाँव पर जो कुल्हाड़ी मारी है.हाथ से तो किला गया लोगो,ताज़ जाने की अबके बारी है.द्रौपदी देश हो गया अब तो,हार बैठा उसे जुआरी है...
clicks 27  Vote 0 Vote  3:01pm 1 May 2018

मेरी स्क्रीन महक उठती है,

ग़ज़लदूर ही दूर से लुभाते हैं.खूब अच्छा हमें बनाते हैं.मेरी स्क्रीन महक उठती है,ओन लाइन वो जब भी आते हैं.ख़ैर अपनी मनायें नींदों की,नींद मेरी जो अब चुराते ...
clicks 23  Vote 0 Vote  5:29pm 29 Apr 2018

हम तो फ़रियाद भी नहीं करते.

ग़ज़लअब तुझे याद भी नहीं करते.वक्त बर्बाद भी नहीं करते.देख मुंसिफ़ की अब तरफदारी,हम तो फ़रियाद भी नहीं करते.मेरी गर्दन पे तो रखे हैं छुरी,ज़ल्द आज़ाद भी न...
clicks 52  Vote 0 Vote  12:13pm 24 Apr 2018

कलियों को कुचलता पाँवों से, पत्थर की इबादत करता है.

ग़ज़लकलियों को कुचलता पाँवों से, पत्थर की इबादत करता है.शैतां भी करे ना भूले से, ऐसी वो हिमाक़त करता है.औलाद ही वाले समझेंगे, औलाद का ग़म क्या होता है,ख़ामो...
clicks 26  Vote 0 Vote  1:34pm 18 Apr 2018

जब से आयें हैं, वो ज़िन्दगी में.

ग़ज़लजब से आयें हैं, वो ज़िन्दगी में.दिल ये लगता नहीं अब किसी में.मौत पानी की लिक्खी थी मेरी,मैं तो डूबा हूँ गहरी नदी में.दिल मचलता है यूँ ही नहीं ये,बात कुछ ...
clicks 31  Vote 0 Vote  2:51pm 9 Apr 2018

रात दिन अब तेरे, मैं ख़यालों में हूँ.

ग़ज़लरात दिन अब तेरे, मैं ख़यालों में हूँ.मैं जवाबों में हूँ, मैं सवालों में हूँ.मुझको महसूस कर अय मेरे हमनशीं,उँगलियाँ बन के फिरता मैं बालों में हूँ.ज़िक...
clicks 21  Vote 0 Vote  4:35pm 1 Apr 2018

आँख सूरज लगा है दिखाने

ग़ज़लआँख सूरज लगा है दिखाने.छाँव की फिर लगी याद आने.हम तलबगार तेरे अभी भी,तू चली आ किसी भी बहाने.जुस्तजू एक तेरी ही थी बस,हमने चाहे कहाँ थे ख़जाने .जी रहे कि...
clicks 36  Vote 0 Vote  11:49am 31 Mar 2018
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