डॉ.सुभाष भदौरिया शहेरा (गोधरा के पास) गुजरात

अब कितना रूलाओगे बोलो तो ज़रा हमको.

ग़ज़लअब कितना रूलाओगे बोलो तो ज़रा हमको.फिर छोड़ के जाओगे बोलो तो ज़रा हमको.सब लोग जुदाई का पूछे हैं सबब हमसे,दिन ये भी दिखाओगे बोलो तो ज़रा हमको.मुश्किल ...
clicks 32  Vote 0 Vote  4:52pm 30 Sep 2018

या तो आ जाओ, या फिर हमको बुलाकर देखो.

ग़ज़लया तो आ जाओ, या फिर हमको बुलाकर देखो.आशिक़ी चीज है क्या दिल को लगाकर देखो.दूर ही दूर से मौज़ो को नहीं समझोगे,लुत्फ़ लेना है समंदर में नहाकर के देखो.दूर...
clicks 9  Vote 0 Vote  4:07pm 29 Sep 2018

दिल तवाइफ़ का कोठा था अपना कोई.

ग़ज़लउम्र-भर वो मेरा दिल दुखाते रहे.हम ग़मों को गले से लगाते रहे.दिल तवाइफ़ का कोठा था अपना कोई,लोग आते रहे लोग जाते रहे.ये अलग बात उसने सुना ही नहीं,दर्दे-...
clicks 9  Vote 0 Vote  7:43am 9 Sep 2018

हम गले जो लगे आप घबरा गये, दूसरों को लगाओ तो कुछ भी नहीं.

ग़ज़लहम गले जो लगे आप घबरा गये,दूसरों को लगाओ तो कुछ भी नहीं. बात गन की ज़रूरी हो जिस वक्त में, बात मन की सुनाओ तो कुछ भी नहीं.आँख हमने जो मारी तो हँगामा क...
clicks 61  Vote 0 Vote  9:59pm 4 Aug 2018

फिटनिश ही दिखानी है सरहद पे दिखाओ अब.

ग़ज़लहर रोज़ न सरहद पे बेमौत मराओ अब.फिटनिश ही दिखानी है सरहद पे दिखाओ अब.कश्मीर गया कब का जम्मू भी है जाने को,आँखों पे पड़ा पर्दा बेहतर है हटाओ अब.इस योग स...
clicks 41  Vote 0 Vote  6:48pm 14 Jun 2018

याद आया तो बहुत देर रुलाया उसने.

ग़ज़लयाद आया तो बहुत देर रुलाया उसने.कितनी आसानी से हमको है भुलाया उसने.इससे ज़्यादा कोई  क्या हमसे मुहब्बत करता,मैं जो भूखा रहा इक कौर ना खाया उसने.हाथ ...
clicks 46  Vote 0 Vote  11:26am 2 Jun 2018

चिंता हगने के करते हैं वो हर घड़ी, पहले खाने का उपचार कुछ तो करें.

ग़ज़लचिंता हगने के करते हैं वो हर घड़ी,पहले खाने का उपचार कुछ तो करें.भूख से मर रहे हैं यहां आज हम, हो सके सच का इक़रार कुछ तो करें.आसमां में उड़े हम को कुछ ...
clicks 66  Vote 0 Vote  1:16pm 30 May 2018

अस्लिहे हाथ जो लिए फिरते,

ग़ज़लमेरे लफ़्ज़ों में जान दे मौला.सबको ऊँची उड़ान दे मौला.अस्लिहे हाथ जो लिए फिरते,हाथ उनके क़ुरान दे मौला.भाईचारा ख़ुलूस बख़्श हमें,नेकियों का जहान दे...
clicks 20  Vote 0 Vote  8:42pm 17 May 2018

मैंने भी सुना है लोगों से हाथों में रची तेरे मेंहदी,

ग़ज़लतन्हा तो बहुत पहले भी थे पर इस बार की तन्हाई तौबा.डूबेंगे यकीन लगता है तेरे प्यार  की गहराई तौबा.मैंने भी सुना है लोगों से हाथों में रची तेरे मेंहदी...
clicks 73  Vote 0 Vote  3:36pm 16 May 2018

गुजरात में गुरू जी तगाड़े उठाये हैं.

ग़ज़लअच्छे दिनों ने कैसे कैसे गुल खिलाये हैं.गुजरात में गुरू जी तगाड़े उठाये हैं.एक काम यही बाकी था किस्मत में हमारी,हगते हुए लोगों के भी फोटू खिचाये हैं....
clicks 83  Vote 0 Vote  5:06am 7 May 2018
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