parwaz परवाज़.....

कितना मुश्किल होगा सोचो फिर से बच्चा हो जाना

हम बच्चा हो जाने की हसरत तो करते रहते हैंकितना मुश्किल होगा सोचो फिर &...
clicks 20  Vote 0 Vote  12:40am 4 Jul 2018

मुझे तन्हाइयां बख्शो

मुझे तन्हाइयां बख्शोकहीं इस शोर से आगेअंधेरे घोर के आगेजो पल पल कसी जाएगले की डोर के आगेमुझे तन्हाइयां बख्शोमुझे तन्हाइयां बख्शोमैं उतना ही अकेला हूँज...
clicks 15  Vote 0 Vote  1:53am 5 Apr 2018

ननिहाली किस्से-यादों का सफ़र भाग 1

प्यारे नानाजी,हम सच में आपको बहुत याद करते हैं।ये यादों का सफ़र आपके लिए आपके गांव और अपने ननिहाल को फिर से जी लेने की तमन्ना के साथ।ननिहाली किस्से हाँ यही...
clicks 27  Vote 0 Vote  3:05pm 18 Nov 2017

तुम इश्क़ में भोपाल हो जाओ हम इंदौर हो जाएं

चलो हम दोनों भी इश्क़ में मशहूर हो जाएंतुम भोपाल हो जाओ, हम इंदौर हो जाएं तुम धीरे से मुस्का देना हम ताली देकर हँस देंगेतुम शायरी एक उछालना, हम बाहों में त...
clicks 137  Vote 0 Vote  1:56pm 14 Nov 2017

वो भी खुश नहीं रहते

देकर के ज़ख्म ख़ुद भी तो मरहम नहीं लेतेजो बीच राह छोड़ते हैं वो भी खुश नही...
clicks 38  Vote 0 Vote  11:37am 14 Nov 2017

देहगंध (कहानी)

वोइत्र की शीशी को दाहिने हाथ में लेती है और अपने बाएं हाथ की तरफ धीरे से बढ़ा देती है ,हथेली को उल्टा करके रुई के फाहे से उसपर खुशबू बिखेर लेती है और उस हाथ को...
clicks 35  Vote 0 Vote  7:10pm 27 Aug 2017

अन्वित

बहुत दिनों बाद ब्लॉग पर पोस्ट कर रही हूँ ..बेटे के लिए एक कविता लिखी है कितना सुन्दर है प्यारे बेटे तेरा इस जीवन में आना शीतल कोमल पूर्ण चन्द्र सा मद्धम म...
clicks 54  Vote 0 Vote  12:05am 20 Sep 2016

तेरे इस शहर के बच्चे मुझे बच्चे नहीं लगते

उतने मासूम नहीं लगते,उतने कच्चे नहीं लगते तेरे इस शहर के बच्चे मुझे बच्चे नहीं लगते जहाँ लगते थे मेले कभी गर्मी की छुट्टी में उन जगहों को अब झूले अच्छे नह...
clicks 103  Vote 0 Vote  5:12pm 17 Mar 2015

दम लगा के हईशा :तुमसे मिले दिल में उठा दर्द करारा (dam laga ke haisha :movie review)

छोटा सा, शहर गंगा का किनारा, कुछ गलियां  इन गलियों से ही अन्दर की तरफ जाती और छोटी गलियां जिनके दोनों तरफ कुछ घर, बड़ी गलियों में कुछ दुकानें और इन दुकानों ...
clicks 96  Vote 0 Vote  7:07pm 4 Mar 2015

प्यार सच में पागल बना देता होगा न ? पता नहीं

मैं हमेशा से तुम्हे लिखना चाहती थी और  लिखना चाहती थी खुद को. लिखते लिखते जी लेना चाहती थी पर न जाने क्यों लिखते लिखते खो जाना इतना आसान नहीं , मैं ज़हर लिख...
clicks 108  Vote 0 Vote  5:52pm 30 Jan 2015
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