कुछ अलग सा

बसंत अभी भी उद्विग्न है !

पर जैसे ही प्रकृति खुद कुछ सुधार ला देती है, हम बेफिक्रे हो अपनी पुरानी औकात पर आ जाते हैं। मुसीबत टलते ही फिर ना किसी को पर्यावरण का ध्यान रहता है, ना ह...
clicks 17  Vote 0 Vote  3:19pm 15 Feb 2018

एक है, सफदरजंग रेलवे स्टेशन

दिल्ली का  #सफदरजंग_रेलवे_स्टेशन ऐसी ही एक जगह है। वैसे तो इसका पहुँच मार्ग, पार्किंग, प्रवेश पथ व प्लेटफार्म नंबर एक काफी साफ़-सुथरे और खुले-खुले है प...
clicks 19  Vote 0 Vote  12:08pm 9 Feb 2018

एक है, #सफदरजंग_रेलवे_स्टेशन

दिल्ली का सफदरजंग रेलवे स्टेशन ऐसी ही एक जगह है, जिसका पहुँच मार्ग, पार्किंग, प्रवेश पथ व एक नंबर प्लेटफार्म, काफी साफ़-सुथरे और खुले-खुले है पर यदि आप प...
clicks 1  Vote 0 Vote  12:08pm 9 Feb 2018

अनजाने में जूते हमारी बिमारी का कारण तो नहीं बन रहे....!

बहुत से लोगों को कहते सुना है कि पता नहीं क्यों हजार उपायों के बावजूद हमारे घर में कोई ना कोई किसी ना किसी व्याधि से पीड़ित ही रहता है। ऐसे लोगों का ध्यान ...
clicks 3  Vote 0 Vote  6:23pm 6 Feb 2018

इंसुलिन प्लांट

विशेषज्ञों के अनुसार डाइबटीज टू से पीड़ित रोगियों की संख्या करीब 80 प्रतिशत है और इनके लिए "इंसुलिन प्लांट"बहुत ही कारगर साबित हुआ है। इसके पत्तों का न...
clicks 3  Vote 0 Vote  4:04pm 5 Feb 2018

रायपुर का नवनिर्मित, श्रीराम मंदिर

सीढ़ियां चढ़ते ही सूर्यमण्डप है जो नक्काशीदार खंबों पर टिका हुआ है। इसके बीचो-बीच आठ फिट का खूबसूरत झूमर लगाया गया है। स्वर्ण-खचित द्वार के बाद गर्भ-गृ...
clicks 4  Vote 0 Vote  12:18pm 1 Feb 2018

ऐटिकेटेड बहू

यह काल्पनिक कहानी नहीं है, बल्कि यथार्थ में घटित प्रकरण से प्रेरित एक सत्य कथा है जो हसने की बजाय  सोचने पर ज्यादा मजबूर करती है ! आज की पीढ़ी का आभासी सं...
clicks 3  Vote 0 Vote  3:48pm 30 Jan 2018

कुछ और भी कारण हैं मकर संक्रांति के विशेष होने के

सूर्यदेव के उत्तरायण होने के अलावा और भी बहुतेरे कारण हैं जिनकी वजह से मकर संक्रांति का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। भले ही नाम और रूप अलग-अलग हों प...
clicks 3  Vote 0 Vote  6:49pm 13 Jan 2018

फिल्मों को जरुरत है, स्वस्थ दिलो-दिमाग वाले निर्माताओं की

आज एक फिल्म अपनी शुद्ध, भदेश गाली-गलौच वाली भाषा के कारण सुर्ख़ियों में है, जिसके निर्माता का दावा है कि  "स्लैंगी लैंग्वेज समाज की सच्चाई है" ! उसके अ...
clicks 2  Vote 0 Vote  5:55pm 11 Jan 2018

यह अवसाद है या प्रकृति का इशारा, निःस्पृहता के लिए ?

जब साठ-सत्तर की उम्र के बाद, हर सुख, सुविधा, उपलब्धि, निरोगिता के बावजूद मन उचाट रहने लगे, डाक्टरी भाषा में अवसाद जैसी स्थिति बनी रहने लग जाए ! तो क्य...
clicks 14  Vote 0 Vote  5:30pm 9 Jan 2018
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