ऋषभ उवाच

भक्तिकाल की काव्य प्रवृत्तियाँ : राम भक्ति काव्य परंपरा

भक्तिकाल में सगुणमार्गीय कवियों का एक वर्ग रामभक्ति काव्यधारा के रूप में माना जाता है। इसमें सगुण भक्ति के आलंबन के रूप में विष्णु के अवतार राम की प्रति...
clicks 8  Vote 0 Vote  4:38pm 10 Oct 2018

भक्तिकाल की काव्य प्रवृत्तियाँ : कृष्ण भक्ति काव्य परंपरा

सगुणमार्गीय भक्तिकाव्य में कृष्ण को आराध्य मानने वाले कवियों ने कृष्ण भक्ति काव्य परंपरा का विकास किया। भारतीय संस्कृति में कृष्ण का व्यक्तित्व अत्य...
clicks 6  Vote 0 Vote  4:34pm 10 Oct 2018

भक्तिकाल की काव्य प्रवुत्तियाँ : निर्गुण भक्तिकाव्य : प्रेमाख्यानक

निर्गुण काव्यधारा के “जिन कवियों ने प्रेम द्वारा ईश्वर की प्राप्ति पर बल दिया, वे प्रेममार्गी अथवा सूफी कवि कहलाए। जायसी, मंझन, कुतुबन, उस्मान आदि इस धार...
clicks 6  Vote 0 Vote  4:12pm 10 Oct 2018

भक्तिकाल की काव्य प्रवृत्तियाँ : निर्गुण भक्तिकाव्य : संतमत

भक्तिकाल को ‘हिंदी साहित्य का स्वर्णयुग’ कहा जाता है। इस काव्य की दो मुख्य धाराएँ हैं – एक निर्गुण काव्य धारा, दो – सगुण काव्य धारा। इनके भी प्रवृत्तिगत ...
clicks 6  Vote 0 Vote  3:52pm 10 Oct 2018

हिंदी साहित्य का भक्तिकाल : सांस्कृतिक-दार्शनिक परिस्थिति

भक्तिकाल : पृष्ठभूमि : सांस्कृतिक परिस्थिति सांस्कृतिक दृष्टि से भक्तिकालीन वातावरण में हिंदू और मुस्लिम संस्कृतियों का आमना-सामना, विरोध और समन्वय ...
clicks 6  Vote 0 Vote  5:15pm 7 Oct 2018

हिंदी साहित्य का इतिहास : सामाजिक परिस्थिति

भक्तिकालीन साहित्य की पृष्ठभूमि में विद्यमान समाज संक्रमण काल से गुजरने वाला समाज है। यों तो भारतीय समाज में अलग-अलग स्रोतों से आई हुई जातियाँ सम्मिलि...
clicks 8  Vote 0 Vote  5:10pm 7 Oct 2018

हिंदी साहित्य का भक्तिकाल : राजनैतिक परिस्थिति

राजनैतिक दृष्टि से भक्तिकाल के एक छोर पर मुहम्मद तुगलक और दूसरे छोर पर शाहजहाँ की सत्ता विद्यमान है अर्थात यह काल भारतीय इतिहास का वह महत्वपूर्ण समय है ...
clicks 6  Vote 0 Vote  5:04pm 7 Oct 2018

हिंदी साहित्य का भक्तिकाल : पृष्ठभूमि

14 वीं शताब्दी के मध्य से 17 वीं शताब्दी के मध्य तक के काल को हिंदी साहित्य के इतिहास में पूर्वमध्यकाल और भक्तिकाल कहा जाता है। इस काल का समग्र साहित्य मध्य...
clicks 6  Vote 0 Vote  5:00pm 7 Oct 2018

[रामायण संदर्शन] !! रीझत राम सनेह निसोतें !!

तुलसी के राम का स्वभाव अत्यंत कोमल है। उन्हें रिझाने के लिए बस एक ही योग्यता चाहिए। भक्त के हृदय में अगर सच्चा प्रेम है तो राम इतने दयालु हैं कि उसके सारे ...
clicks 7  Vote 0 Vote  2:20am 22 Sep 2018

(पुस्तक) प्राचीन भारत में खेल-कूद : स्वरूप एवं महत्व

अवधेश कुमार सिन्हा (ज. 9 सितंबर, 1950) की 68वीं वर्षगाँठ पर उनकी शोधपूर्ण कृति "प्राचीन भारत में खेल-कूद (स्वरूप एवं महत्व)" (2018. हैदराबाद : मिलिंद प्र.) का प्रकाशन/ल...
clicks 27  Vote 0 Vote  8:03pm 7 Sep 2018
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