ऋषभ उवाच

साहित्य : सुधारात्मक दृष्टिकोण

साहित्य : सुधारात्मक दृष्टिकोण-ऋषभदेव शर्मा एवं पूर्णिमा शर्मासाहित्य की भारतीय अवधारणा ‘सहित’ अर्थात सामाजिकता, सामूहिकता और लोकमंगल के साथ जुड़ी ह...
clicks 4  Vote 0 Vote  1:31am 31 Dec 2018

(भूमिका) किन्नर विमर्श : समाज और साहित्य

सं. बिश्नोई, मिलन (2018), किन्नर विमर्श : साहित्य और समाज, कानपुर : विद्या भूमिका उत्तर आधुनिक विमर्श का दौर आने पर हिंदी साहित्य सृजन और समीक्षा के क्षेत्र...
clicks 21  Vote 0 Vote  10:06pm 29 Dec 2018

भक्तिकाल की काव्य प्रवृत्तियाँ : राम भक्ति काव्य परंपरा

भक्तिकाल में सगुणमार्गीय कवियों का एक वर्ग रामभक्ति काव्यधारा के रूप में माना जाता है। इसमें सगुण भक्ति के आलंबन के रूप में विष्णु के अवतार राम की प्रति...
clicks 12  Vote 0 Vote  4:38pm 10 Oct 2018

भक्तिकाल की काव्य प्रवृत्तियाँ : कृष्ण भक्ति काव्य परंपरा

सगुणमार्गीय भक्तिकाव्य में कृष्ण को आराध्य मानने वाले कवियों ने कृष्ण भक्ति काव्य परंपरा का विकास किया। भारतीय संस्कृति में कृष्ण का व्यक्तित्व अत्य...
clicks 22  Vote 0 Vote  4:34pm 10 Oct 2018

भक्तिकाल की काव्य प्रवुत्तियाँ : निर्गुण भक्तिकाव्य : प्रेमाख्यानक

निर्गुण काव्यधारा के “जिन कवियों ने प्रेम द्वारा ईश्वर की प्राप्ति पर बल दिया, वे प्रेममार्गी अथवा सूफी कवि कहलाए। जायसी, मंझन, कुतुबन, उस्मान आदि इस धार...
clicks 20  Vote 0 Vote  4:12pm 10 Oct 2018

भक्तिकाल की काव्य प्रवृत्तियाँ : निर्गुण भक्तिकाव्य : संतमत

भक्तिकाल को ‘हिंदी साहित्य का स्वर्णयुग’ कहा जाता है। इस काव्य की दो मुख्य धाराएँ हैं – एक निर्गुण काव्य धारा, दो – सगुण काव्य धारा। इनके भी प्रवृत्तिगत ...
clicks 12  Vote 0 Vote  3:52pm 10 Oct 2018

हिंदी साहित्य का भक्तिकाल : सांस्कृतिक-दार्शनिक परिस्थिति

भक्तिकाल : पृष्ठभूमि : सांस्कृतिक परिस्थिति सांस्कृतिक दृष्टि से भक्तिकालीन वातावरण में हिंदू और मुस्लिम संस्कृतियों का आमना-सामना, विरोध और समन्वय ...
clicks 17  Vote 0 Vote  5:15pm 7 Oct 2018

हिंदी साहित्य का इतिहास : सामाजिक परिस्थिति

भक्तिकालीन साहित्य की पृष्ठभूमि में विद्यमान समाज संक्रमण काल से गुजरने वाला समाज है। यों तो भारतीय समाज में अलग-अलग स्रोतों से आई हुई जातियाँ सम्मिलि...
clicks 16  Vote 0 Vote  5:10pm 7 Oct 2018

हिंदी साहित्य का भक्तिकाल : राजनैतिक परिस्थिति

राजनैतिक दृष्टि से भक्तिकाल के एक छोर पर मुहम्मद तुगलक और दूसरे छोर पर शाहजहाँ की सत्ता विद्यमान है अर्थात यह काल भारतीय इतिहास का वह महत्वपूर्ण समय है ...
clicks 14  Vote 0 Vote  5:04pm 7 Oct 2018

हिंदी साहित्य का भक्तिकाल : पृष्ठभूमि

14 वीं शताब्दी के मध्य से 17 वीं शताब्दी के मध्य तक के काल को हिंदी साहित्य के इतिहास में पूर्वमध्यकाल और भक्तिकाल कहा जाता है। इस काल का समग्र साहित्य मध्य...
clicks 17  Vote 0 Vote  5:00pm 7 Oct 2018
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