SHABD MANCH :Pradeep Bahuguna Darpan

दुख से अपना गहरा नाता

दुख से अपना गहरा नाता, सुख तो आता है, और जाता. दुख ही अपना सच्चा साथी, हरदम ही जो साथ निभाता. जब से जग में आंखें खोली, सुनी नहीं कभी मीठी बोली. दिल को...
clicks 146  Vote 0 Vote  12:39pm 9 Mar 2017

विद्यालय और बच्चे

विद्यालय और बच्चेआज के शैक्षिक ढांचे का सबसे बड़ा विद्रूप यह है कि इतन बड़ा ताम झाम जिन बच्चों के लिए खडा किया गया है, वही बच्चे विद्यालय की ओर आकर्षित नहीं ...
clicks 226  Vote 0 Vote  6:46pm 16 Jun 2016

एक बाल कविता- गोपी और मिठाई

आम पपीता केला लीची आडू हिसार और काफल अमरूद चुल्लू और खुबानी तरह तरह के खाए फल .इतना खाकर गोपी बोला पेट अभी भी भरा न भाई.टिहरी से सिंगौरी मंगा दो अल...
clicks 171  Vote 0 Vote  9:14pm 13 May 2016

रोटी सूरज भी लगता है फीका चाँद सी दिखती है रोटी।  धन्य हो  उठता है चूल्हा ,जब तवे पर सिकती है रोटी। । जिंदगी मिल जाती है जब भूख में मिलती है रोटी...
clicks 241  Vote 0 Vote  12:30pm 7 Nov 2015

सिर्फ तुम्हारे लिए

( हमारे विवाह की वर्षगांठ पर सिर्फ तुम्हारे लिए )तेरे अधरों की मुस्कान,भरती मेरे तन में प्राण. जीवन की ऊर्जा हो तुम,साँसों की सरगम की तान. मैं सीप तुम मेरा म...
clicks 226  Vote 0 Vote  7:15pm 27 Jul 2013

तेरी अहमियत

जिन्दगी  को तेरी आदत यूं हो गयी ,कि तेरे बिना हर  पल दुश्वार हो गया .कुछ  न रहा बाकी अब मेरे हाथ में , हर सांस पर भी तेरा अधिकार हो गया .     ...
clicks 215  Vote 0 Vote  4:10pm 6 Jun 2013

दो मुक्तक

         ........1......तुम्हे जब देखते हैं हम , हमारा दिल  मचलता है .तुम्हारे दिल में भी शायद हमारा ख्वाब पलता है.समझते तुम भी सब कुछ हो, समझते हम भी हैं सब कुछ ,मगर मुंह ...
clicks 196  Vote 0 Vote  6:54pm 15 Jun 2012

सारथी

जीवन   में कुछ  पल आते हैं ,रह  जाते जो    यादें   बनकर.पर  कुछ  पल  ऐसे हैं  होते  , संग चलते  हैं  जो जीवन  भर .जीवन  की  भूलभुलैय्या  में ,विस्मृत हो  जाता  ...
clicks 260  Vote 0 Vote  11:14am 12 May 2012

जिन्दगी इतनी सस्ती नहीं ..

जिन्दगी को  कुछ  लोग  इतना सस्ता समझ  लेते हैं कि खुदकुशी जैसा कायरतापूर्ण  कदम  उठाने  में भी गुरेज नहीं करते .   कल ही देहरादून  में एक   बी0 एस 0सी0 बा...
clicks 271  Vote 0 Vote  5:04pm 6 May 2012

'प्रेम'पर कुछ दोहे

प्रेम तो है परमात्मा, पावन अमर विचार.इसको तुम समझो नहीं , महज देह व्यापार.प्रेम गली कंटक भरी, रखो संभलकर पांव.जीवन भर भरते नहीं, मिलते ऐसे घाव.'दर्पण' हमसे ली...
clicks 270  Vote 2 Vote  8:56pm 22 Feb 2012
 
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