बिखरे आखर .

बहुत गहरी हैं ये आँखें मेरी

चंद बिखरे सिमटे आखर , बेतरतीब ,बेलौस से , बात बेबात कहे लिखे गए , उन्हें यूं ही सहेज दिया है ........दो दरखत एक शाख के , एक राजा की कुर्सी बनी दूसरी बुढापे की लाठी ...
clicks 53  Vote 0 Vote  5:48am 23 Jul 2017

घर मेरे भी ,बिटिया किलकने लगी है

अब नर्म धूप,मेरे आँगन भी,उतरने लगी है।टिमटिमाते तारों की रौशनी,और चाँद की ठंडक,छत पर,छिटकने लगी है।पुरबिया पवनें,खींच लाई हैं,जो बदली , वो,घुमड़ने लगी है।...
clicks 29  Vote 0 Vote  9:16am 2 Jul 2017

बहुत खराब लिखने बैठा हूँ मैं

बारूद की स्याही से , नया इंकलाब लिखने बैठा हूं मैं , सियासतदानों , तुम्हारा ही तो हिसाब लिखने बैठा हूं मैं बहुत लिख लिया , शब्दों को सुंदर बना बना के , कसम से त...
clicks 46  Vote 0 Vote  11:01am 13 Oct 2016

औरत : एक अंतहीन संघर्ष यात्रा

                                        औरत : एक अंतहीन संघर्ष यात्रा एक प्रकाशित आलेख आलेख को पढने के ल...
clicks 44  Vote 0 Vote  4:33pm 11 Oct 2016

सुनो लड़कियों ,तुम यूं न मरा करो ..

सुनो !आरुषी,प्रियदर्शनी ,निर्भया ,करुणा ,सुनो लड़कियोंतुम यूं न मरा करो ,हत्या कर दो ,या अंग भंग ,फुफकार उठो ,डसो ज़हर से,बन करैत,बेझिझक , बेधड़क ,प्रतिवाद , प्रति...
clicks 41  Vote 0 Vote  11:12am 24 Sep 2016

जीभ और दांत

एक संत थे | उनके कई शिष्य थे | जब उन्हें महसूस हुआ कि उनका अंतिम समय आ गया है तो उन्होंने अपने सभी शिष्यों को बुलाया | जब सभी शिष्य आ गए तो उन्होंने कहा ,"ज़रा मे...
clicks 129  Vote 0 Vote  6:37am 3 Oct 2015

हर औरंगजेब को अब मिटा देंगे

आज गाने दे मुझको , गीत मातृवंदना के ,मुहब्बत के नगमे, फिर कभी तुझको सुना देंगे ||उठ बढ़ा कदम अपनी हिम्मत और विशवास से  "वो"रुदाली हैं जो , रो रो के तुझको डरा दे...
clicks 88  Vote 0 Vote  5:04pm 28 Sep 2015

इस्सक उस्सक में जग मुआ .....

आजकल दिल्ली का मौसम अफ़लातून हुआ जा रहा है , यूं तो "दिल्ली मेरी जान".की तर्ज़ पे यहीं उत्ता मसाला तो तकरीबन रोज़ ही फ़ैला या फ़ैलाया जाता रहता है कि शाम को टेलिवि...
clicks 98  Vote 0 Vote  5:46pm 7 Feb 2015
[ Prev Page ] [ Next Page ]
 
CONTACT US ADVERTISE T&C

Copyright © 2009-2013