डायरी

अक्टूबर : रातरानी की हल्की और भीनीभीनी महक जैसी फ़िल्म

विश्विख्यात फ़िल्मकार Federico Fellini कहते हैं - "I don’t like the idea of “understanding” a film. I don’t believe that rational understanding is an essential element in the reception of any work of art. Either a film has something to say to you or it hasn’t. If you are moved by it, you don’t need it explained to you. If not, no expla...
clicks 4  Vote 0 Vote  7:29pm 4 Jul 2018

कामयाबी इंतज़ार करवाती है, उसके लिए जल्दी मत मचाइए।

आलस से आराम मिल सकता है, पर यह आराम बड़ा ही महंगा पड़ता है। अमूमन सब सफल होना चाहते हैं, किसी भी स्थिति में कोई भी इंसान असफल तो नहीं ही होना चाहता है। तो क्या ...
clicks 41  Vote 0 Vote  7:18pm 25 May 2018

दरअसल कानून की भाषा बोलता हुआ यहां अपराधियों का एक संयुक्त परिवार है।

मध्यप्रदेश का एक किसान 45 डिग्री सेल्सियस में 4 दिन से मंडी में अपनी फसल की तुलाई होने का इंतज़ार लाइन में लगकर करता है और अन्तः उसकी मौत हो जाती है। अब मरने स...
clicks 48  Vote 0 Vote  8:14pm 21 May 2018

माँ कहते ही कितना कुछ एक साथ याद आने लगता है।

किसी भी मनुष्य के अनुभूतियों और ज्ञान के चक्षु जब खुलने लगते हैं तो माँ कहते ही स्मृतियों में एक साथ ना जाने कितने बिम्ब बनने लगते हैं। कभी गोर्की की माँ ...
clicks 12  Vote 0 Vote  6:45am 14 May 2018

फ़िल्म 102 Not Out : जिओ ज़िंदादिली से भरपूर ज़िन्दगी !

किसी भी इंसान के जीवन का मूल लक्ष्य क्या है? इस प्रश्न का सीधा जवाब है ख़ुशी की तलाश। इंसान जो कुछ भी करता है या करना चाहता है या नहीं भी करता है, उसके पीछे का ...
clicks 9  Vote 0 Vote  11:02am 7 May 2018

नाटक बिदेसिया का एक किस्सा

1980 का दशक था। उस वक्त भिखारी ठाकुर लिखित और संजय उपाध्याय निर्देशित बिदेसिया नाटक तीन घंटे से ऊपर का हुआ करता था। 25 मिनट का तो पूर्व रंग हुआ करता था अर्थात...
clicks 23  Vote 0 Vote  5:33pm 7 Feb 2018

बहुत संकीर्ण है Toilet एक प्रेम कथा

कल Toilet एक प्रेम कथा नामक प्रोपेगेंडा फ़िल्म देखी। फ़िल्म देखने के पीछे का मूल कारण यह था कि ऐसी ख़बर थी कि फ़िल्म हमारे मित्र Bulloo Kumar अभिनीति फ़िल्म गुंटर गुटरगूँ ...
clicks 23  Vote 0 Vote  5:29pm 7 Feb 2018

बनारस का महाश्मशान

जन्म और मृत्यु इस जगत के अकाट्य सत्य हैं जो एक न एक दिन सबके साथ घटित होता है। अमीर-गरीब, छोटा- बड़ा, लंबा-नाटा, सुंदर-कुरूप, प्रसिद्ध-गुमनाम यहां सब एक समान ह...
clicks 20  Vote 0 Vote  5:17pm 7 Feb 2018

भावनाएं : कलाकार, कला और समाज की भावना

एक फ़िल्म के लिए लोग मरने-मारने पर उतारू हैं। कानून व्यवस्था और संविधान को ताक पर रखकर भावना के नाम पर गुंडई कर रहे हैं। इन्हें लोकतांत्रिक मूल्यों को ताल...
clicks 23  Vote 0 Vote  5:15pm 7 Feb 2018

हिंदी रंगमंच की मूल समस्या - भाग दो

उदारीकरण के बाद विभिन्न सरकारी या गैरसरकारी अनुदानों के तहत कुछ पैसों का आगमन रंगमंच में हुआ है। यह पैसे क्यों बांटे जा रहे हैं, यह एक राजनैतिक खेल है जो ...
clicks 27  Vote 0 Vote  12:13am 25 Jan 2018
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