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एक ग़ज़ल : आप के आने से पहले--

 एक ग़ज़ल आप के आने से पहले आ गई ख़ुश्बू इधर,ख़ैरमक़्दम के लिए मैने झुका ली है नज़र ।यह मेरा सोज़-ए-दुरूँ, यह शौक़-ए-गुलबोसी मेरा,अहल-ए-दुनिया को नहीं होगी कभी  इ...
clicks 80  Vote 0 Vote  12:01pm 4 Jan 2022

एक व्यंग्य कथा : चुनाव और यक्ष प्रश्न

 एक व्यंग्य : चुनाव और यक्ष प्रश्नरेडियो पर गाना बज रहा है -कलियों ने घूँघट खोलेहर फ़ूल पे भौरें डोलेलो आया प्यार का मौसम, गुलो गुलजार का मौसम ।भारतीय़ लोक...
clicks 52  Vote 0 Vote  10:34am 26 Dec 2021

एक ग़ज़ल : वह अधेरों में इक रोशनी है

 एक ग़ज़लवह अँधेरे में इक रोशनी है,एक उम्मीद है, ज़िन्दगी है ।एक दरिया है और एक मैं हूँ,उम्र भर की मेरी तिश्नगी है ।नाप सकते हैं हम आसमाँ भी,हौसलों में कहाँ क...
clicks 86  Vote 0 Vote  8:01pm 19 Dec 2021

आ रही बस याद तेरी.. नवगीत

उलझनों में झूलता नितसुख बने हैं राख ढेरीछिन गया अब चैन मनकाआ रही बस याद तेरी।नीम की वो छाँव ठंडीधान के वे खेत सुंदरबोलती चौपाल पे जबदर्द के उमड़े समंदरब...
clicks 92  Vote 0 Vote  3:00pm 14 Dec 2021

एक गीत : मौसम है मौसम बदलेगा

 एक  गीत : -- मौसम है, मौसम बदलेगासुख का मौसम, दुख का मौसम, आँधी-पानी का हो मौसममौसम का आना-जाना है , मौसम है मौसम बदलेगा ।अगर कभी हो फ़ुरसत में तो, उसकी आँखों म...
clicks 56  Vote 0 Vote  11:07am 4 Dec 2021

कृष्णविवर

 प्रेम में टूटी स्त्री के भीतरपनपने लगते है,छोटे छोटे कृष्णविवर....कुछ उसकी उदास आंखों में.. कुछ उसकी खाली खोखलीआवाज़  में....और कुछउसके  उदास और ...
clicks 65  Vote 0 Vote  1:04am 14 Nov 2021

कुछ अनुभूतियाँ

 कुछ अनुभूतियाँ 1रात रात भर जग कर चन्दाढूँढ रहा है किसे गगन में ?थक कर बेबस सो जाता हैदर्द दबा कर अपने मन में | 2बीती रातों की सब बातेंमुझको कब सोने देती...
clicks 72  Vote 0 Vote  10:26am 21 Oct 2021

अनुभूतियाँ : क़िस्त 12

  क़िस्त 12 1साथ दिया है तूने इतना मुझ पर रही इनायत तेरीतुझे नया हमराह मिला हैफिर क्या रही ज़रूरत मेरी । 2रहने दे ’आनन’ तू अपनाप्यार मुहब्बत जुमलेबाजी...
clicks 76  Vote 0 Vote  10:09am 23 Sep 2021

एक व्यंग्य : शायरी का सर्टिफिकेट

 एक व्यंग्य : शायरी का सर्टिफ़िकेट चाय का एक घूँट जैसे ही मिश्रा जी के हलक के अन्दर गया कि एक शे’र बाहर निकला। चाय की प्याली नहीं है , ज़िन्दगी का स्वाद है, म...
clicks 76  Vote 0 Vote  11:17am 18 Sep 2021

एक ग़ज़ल : अभी नाज़-ए-बुताँ देखूँ--कि

 एक ग़ज़लअभी नाज़-ए-बुतां देखूँ  कि ज़ख़्मों के निशाँ देखूँ ,मिले ग़म से ज़रा फ़ुरसत तो फिर कार-ए-जहाँ देखूँ।    मसाइल हैं अभी बाक़ी ,मसाइब भी कहाँ कम हैं ,ज़म...
clicks 70  Vote 0 Vote  10:50am 15 Sep 2021
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