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Laxmirangam: ब्लॉग पर पोस्ट की सूचना.

Laxmirangam: ब्लॉग पर पोस्ट की सूचना.: कृपया टिप्पणियाँ ब्लॉग पर ही करें. गूगल + की टिप्पणियाँ अस्वीकार्य कर दी गई हैं. प्रिय पाठकगण, हाल ही में गूगल प्लस से एक सं...
clicks 6  Vote 0 Vote  2:12pm 15 Feb 2019

इन्द्रवज्रा/उपेंद्र वज्रा/उपजाति छंद "शिवेंद्रवज्रा स्तुति"

इन्द्रवज्रा/उपेंद्र वज्रा/उपजाति छंद"शिवेंद्रवज्रा स्तुति"परहित कर विषपान, महादेव जग के बने।सुर नर मुनि गा गान, चरण वंदना नित करें।।माथ नवा जयकार, मधुर ...
clicks 5  Vote 0 Vote  5:07pm 4 Feb 2019

एक गीत : तुम जितने चाहे पहरेदार बिठा दो---

एक गीत : तुम जितने चाहे पहरेदार बिठा दो---      तुम चाहे जितने पहरेदार बिठा दोदो नयन मिले तो भाव एक रहते हैं    दो दिल ने कब माना है जग का बन्धन  नव सप...
clicks 2  Vote 0 Vote  5:00pm 3 Feb 2019

हेमन्त ऋतु अपने यौवन पर---डा श्याम गुप्त

         हेमन्त ऋतु अपने यौवन पर  है , रात्रि- समारोहों आदि में ठिठुरन सेबचने के लिए  अलाव जलाए जाने  का क्रम प्रारम्भ हो चला है | प्रस्तुत है ए...
clicks 2  Vote 0 Vote  11:26pm 21 Jan 2019

एक व्यंग्य : धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे---

एक व्यंग्य : धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे---धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे   समवेता युयुत्सव:मामका: पाण्डवाश्चैव  किमकुर्वत संजयधृतराष्ट्र उवाच -- हे संज...
clicks 1  Vote 0 Vote  8:38pm 21 Jan 2019

एक व्यंग्य : आँख दिखाना-----

एक व्यंग्य : आँख दिखाना--आज उन्होने फिर आँख दिखाईऔर आँख के डा0 ने अपनी व्यथा सुनाई--"पाठक जी !यहाँ जो मरीज़ आता है ’आँख दिखाता है " - फीस माँगने पर ’आँख दिखाता ह...
clicks 14  Vote 0 Vote  6:30pm 16 Jan 2019

मेरी सद्य प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह------पीर ज़माने की -----डा श्याम गुप्त ---

डा श्याम गुप्त की  सद्य प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह------पीर ज़माने की -----अनुशंसा         महाकवि डा श्यामगुप्त का नया ग़ज़ल-संग्रह ‘पीर ज़माने की’प्रकाशित ...
clicks 32  Vote 0 Vote  10:55pm 13 Jan 2019

एक ग़ज़ल : लोग क्या क्या नहीं --

एक ग़ज़ल : लोग क्या क्या नहीं --लोग क्या क्या नहीं कहा करतेजब कभी तुमसे हम मिला करतेइश्क़ क्या है ? फ़रेब खा कर भीबारहा इश्क़ की दुआ करतेज़िन्दगी क्या तुम्हे शिका...
clicks 17  Vote 0 Vote  6:41pm 5 Jan 2019

एक ग़ज़ल : इधर आना नहीं ज़ाहिद--

एक ग़ज़ल : इधर आना नहीं ज़ाहिदइधर आना नहीं ज़ाहिद , इधर रिन्दों की बस्ती हैतुम्हारी कौन सुनता है ,यहाँ अपनी ही मस्ती  हैभले हैं या बुरे हैं हम ,कि जो भी हैं ,या ज...
clicks 9  Vote 0 Vote  6:27pm 27 Dec 2018

एक ग़ज़ल : आज इतनी मिली है--

एक ग़ज़ल : आज इतनी मिली है--आज इतनी मिली है  ख़ुशी आप सेदिल मिला तो मिली ज़िन्दगी आप सेतीरगी राह-ए-उल्फ़त पे तारी न होछन के आती रहे रोशनी  आप सेबात मेरी भी शामिल...
clicks 12  Vote 0 Vote  4:06pm 14 Dec 2018
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