कविता मंच

मैं बदन बेचती हूँ--

Monday, November 1, 2010मैं बदन बेचती हूँ--मैं बदन बेचती हूँ--उस औरत के तन काकतरा-कतरा फुट बहा है तभी तो चीख-चीख कहती हाँ मै बदन बेचती हूँ अपनी तपिश बुझाने को नही पे...
clicks 24  Vote 0 Vote  10:48pm 5 Feb 2018

तुम तितली बन जाओ.....पंकज भूषण पाठक"प्रियम"

चली वासन्ती मलयनभ्रमरों का ये अनुगूंजन हैनवकलियों का यौवनदेता निश्छल आमन्त्रण हैकामदेव का रति सेचला प्रणय अनुराग हैबावली बन फिर रहीतितली बैठी पराग ह...
clicks 5  Vote 0 Vote  5:41am 27 Jan 2018

मधुमास के प्रथम दिवस में......पंकज भूषण पाठक "प्रियम"

मधुमास के प्रथम दिवस मेंहै प्रियम का ये अभिनन्दन प्रियेपूर्णचन्द्र की क्षीण कला सीअम्बर को छूती चपला सीलहराई यूँ कनक लता सीधरा अम्बर का है ये मिलन प्रि...
clicks 6  Vote 0 Vote  3:04pm 22 Jan 2018

एक औरत का वेश्या बनना / मंजरी श्रीवास्तव

जब अजनबी थे हमतुमने मुझे जानना चाहामैंने भी हंसकरअपने बारे में तुम्हें बतायाहम दोस्त बनेजब तुमने दोस्ती का हाथ बढ़ायाफिर तुमने मुझे प्रेमिका कहाजब मै...
clicks 6  Vote 0 Vote  4:00am 20 Jan 2018

अन्याय के विरुद्ध / पूनम तुषामड़

शहर में कोई हिन्दू मरामैं इसके खिलाफ हूंकोई मुस्लिमदंगों का शिकार हुआमैं उसके खिलाफ हूंकिसी सिक्ख के धर्म का अपमान हुआमैं उसके भी खिलाफ हूंकिसी ईसाई क...
clicks 6  Vote 0 Vote  4:00am 19 Jan 2018

तलाक / मुंशी रहमान खान

सुजान न लेवहिं नाम यह तलाक न उमदह नाम।घ्रणित काम यह अति बुरा नहिं असलौं का काम।नहिं असलौं का काम नारि जो अपनी छोड़ै।करैं श्‍वान का काम हाथ दुसरी से जोडै़...
clicks 6  Vote 0 Vote  4:00am 18 Jan 2018

-------तीन कविताएँ...मनु वैरागी

माँ, मैं शून्य था।तुम्हारी कोख में आने से पहलेशून्य आकार था। एकदम शून्यआपने जीवन दिया मुझे...अंश बना तुम्हारा...अनेक उपकार हैं तुम्हारेमैं आहवान करता हूँ ...
clicks 6  Vote 0 Vote  4:00am 17 Jan 2018

ख्वाहिश मुझे जीने की ज़ियादा भी नहीं है / अनवर जलालपुरी

ख्वाहिश मुझे जीने की ज़ियादा भी नहीं हैवैसे अभी मरने का इरादा भी नहीं हैहर चेहरा किसी नक्श के मानिन्द उभर जाएये दिल का वरक़ इतना तो सादा भी नहीं हैवह शख़्...
clicks 6  Vote 0 Vote  4:00am 16 Jan 2018

आंख में आंसू भर—भर आये....सुदेश यादव जख्मी

वो  हमको   ऐसा  बिसराये,  सावन   मेंआंख में आंसू भर—भर आये, सावन मेंबिजली  चमके  बादल  गरजे,  डर जाउंरिमझिम मन में प्यास जगाये,सावन मेंखिलत...
clicks 6  Vote 0 Vote  12:00pm 15 Jan 2018

अगर ख़ुदा न करे सच ये ख़्वाब हो जाए / दुष्यंत कुमार

अगर ख़ुदा न करे सच ये ख़्वाब हो जाए तेरी सहर हो मेरा आफ़ताब हो जाए हुज़ूर! आरिज़ो-ओ-रुख़सार क्या तमाम बदन मेरी सुनो तो मुजस्सिम गुलाब हो जाए उठा के फेंक दो ...
clicks 5  Vote 0 Vote  4:00am 14 Jan 2018
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