कविता मंच

रमेशराज की तेवरियाँ

 रमेशराज की तेवरियाँ ----------------------------------------------------------रमेशराज की तेवरी....1 .............................................हर कोई आहत मिलता है दर्दों में जड़वत मिलता |कुंठा जलन घुटन सिसकन का अब...
clicks 8  Vote 0 Vote  8:45pm 25 Sep 2018

दुनिया क्या कहेगी... एक लघु कथा

एक साधू किसी नदी के पनघट पर गया और पानी पीकर पत्थर पर सिर रखकर सो गया....!!!पनघट पर पनिहारिन आती-जाती रहती हैं!!!पनिहारिने आईं तो एक ने कहा- "आहा! साधु हो गया, फि...
clicks 7  Vote 0 Vote  3:03pm 22 Aug 2018

शहर

शहरशहर ..... ही शहरहै,फैला हुआ,जहाँ तलक जाती नजर है शहर ..... ही शहरहै|फैली हुई कंक्रीट और का बड़ा अम्बार,वक्त की कमी से बिखरते रिश्ते,बढ़ती हुयी दूरी का कहर है,...
clicks 15  Vote 0 Vote  11:40am 12 May 2018

जख्म

                      वो जो अक्सर फजर से उगा करते हैसुना है बहुत दिल से धुआं करते है।जलता है इश्क या खुद ही जल जाते हैकलमे में खूब चेहरे पढा करते है...
clicks 18  Vote 0 Vote  1:26pm 11 May 2018

गीत -दर्द दिल में छिपा मुसकराते रहे

राजेश त्रिपाठी          वक्त कुछ इस कदर हम बिताते रहे ।दर्द  दिल  में  छिपा मुसकराते रहे ।।     जिसपे भरोसा किया उसने हमको छला।    ...
clicks 23  Vote 0 Vote  8:11pm 1 May 2018

पाँच लिंकों का आनन्द: 911... मेले- लोहड़ी-खिचड़ी की शुभकामनायें

पाँच लिंकों का आनन्द: 911... मेले- लोहड़ी-खिचड़ी की शुभकामनायें...
clicks 32  Vote 0 Vote  11:02am 17 Mar 2018

हां देखा हैं,किसान को मरते हुए....शुभम सिसौदिया

मंद मंद आंसू,आंखो में प्यास,सरकारी चिट्टीसूखा बदन,माथे से लगाए अपने खेत की मिट्टीदिल में उम्मीद,सीने में दर्द,भूखा और प्यासाकल दिखा इक किसान मुझे ओढ़े न...
clicks 37  Vote 0 Vote  3:17pm 16 Mar 2018

कविता मंच का बहुत बहुत आभार

कविता मंच का बहुत बहुत आभार आपने मुझे अपने ब्लॉग पक आमंत्रित किया ।।दो पंक्तियो मे मेरा परिचयशिव शंकर का डमरू बाजे ताण्डव करे भयंकर ।उन शिव की मै पूजा कर...
clicks 35  Vote 0 Vote  4:06pm 15 Mar 2018

मूर्ति

सोचता हूँ गढ़ दूँ मैं भी अपनी मिट्टी की मूर्ति, ताकि होती रहे मेरे अहंकारी-सुख की क्षतिपूर्ति। मिट्टी-पानी का अनुपात अभी तय नहीं हो पाया ह...
clicks 25  Vote 0 Vote  7:30pm 13 Mar 2018

गीत-

दर्द  दिल  में  छिपा मुसकराते रहेराजेश त्रिपाठीवक्त कुछ इस कदर हम बिताते रहे ।दर्द  दिल  में  छिपा मुसकराते रहे ।।     जिसपे भरोसा किया उस...
clicks 29  Vote 0 Vote  11:17am 7 Mar 2018
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