kabhee - kabhee ~~~~ कभी - कभी

पूरक

लहरों से  सजे  सागर का मुख, बदली से  निखरता है सावनचन्दा से सजता नील गगन, कलियों  से  सजे प्यारा उपवनयौवन से निखरती है तरुणी,  चंचल  होती है गति  ...
clicks 0  Vote 0 Vote  10:46pm 7 May 2018

पिछले 80 दिनों की उपलब्धि

नाहक गर्व स्वयं पर करिये, सबल तो समय-परिंदा हैपरोपकर से बड़ी खुशी नहिं, दुःख वृहद पर - निंदा हैमेरे संग परिवार खड़ा है, जीवन के इस काल-खंड मेंमरा नहीं है अभी भी...
clicks 0  Vote 0 Vote  11:01pm 2 May 2018

ज़हर

ज़िन्दगी भर इसे पीते, होता न असर देखोकभी तोला, कभी लोटा, कभी तीनों पहर देखोअगर रुसवा ये हो जाये, जरा सी बूँद से ही 'जय'हमारी जान ले लेता, बड़ा बेदर्द ज़हर देखोhttp://k...
clicks 0  Vote 0 Vote  11:57am 1 May 2018

सपने

सपने सुहाने देखो और  आँखों में  बसाओ तुमइन्हें साकार करने का साहस  भी दिखाओ तुमपंजों के बल खड़े होकर हाथों को उठाओ 'जय'गगन से तोड़ के इनको कदमों पर बिछाओ...
clicks 0  Vote 0 Vote  11:55am 1 May 2018

शख्सियत

मैं   देखता  रहा  उस  जनाजे  को  देर  तकहोने को  जा  रही  थी  नष्ट  वही शख्सियतजिसके नुमाया होने से दुनिया थी मुस्कुरायीकन्धों पे जा रह...
clicks 0  Vote 0 Vote  7:28pm 30 Apr 2018

फिर से ..

(1)अब भी हमारी साँसों में एक साँस घुली हैजैसे कि जन्नतों की कोई खिड़की खुली हैमेरे  नसीब में नहीं 'जय'जिसकी  यारियाँकुदरत उसी से आज मिलाने को तुली है (2)'ज...
clicks 0  Vote 0 Vote  10:05pm 29 Apr 2018

फलसफा

जब भी हकीकतों से हुआ दूर है कोईना जाने कैसे  हो  गया मशहूर है कोईफलसफा हमें भी तो समझोगे ये 'जय'नज़दीक हम चले तो चला दूर है कोईhttp://kadaachit.blogspot.in/ ...
clicks 0  Vote 0 Vote  12:01pm 29 Apr 2018

चन्दा है जामुनी

पिघली है चाँदनी, चलो कुछ बात करें हममौसम न फागुनी, चलो कुछ बात करें हमजीवन में ऐसे रंग क्यों उभरे न आज तकचन्दा है जामुनी, चलो 'जय'बात करें हमhttp://kadaachit.blogspot.in/ ...
clicks 0  Vote 0 Vote  10:42pm 28 Apr 2018

बंदिश बनाम उसूल

तुम्हारा अपनी बंदिश से निकल पाना बहुत मुश्किलहमारा  खुद  उसूलों  से   उबर   पाना   नहीं   आसां तुम अपने घर से निकलो तो मन्दिर तक हम आएंग...
clicks 0  Vote 0 Vote  11:34pm 26 Apr 2018

पहाड़ की शाम

पहाड़ की चोटियों पर फैला सुनहरा उजाला सूरज के ढलने का उदघोष करने लगा है ।पक्षियों ने पंख फैलाये और नीड़ की तरफ उड़ चले हैं। कोयल की कूक में व्यग्रता सी है। बा...
clicks 0  Vote 0 Vote  7:19pm 25 Apr 2018
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