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ब्राहमणवाद जातिसूचक संज्ञान नहीं, विचारधारा

डॉ सेवा सिंहके लियेब्राहमणवादजातिसूचक संज्ञान नहीं एक विचारधारा है, वचर्स्वी वर्गों के प्रभुत्व को आधार प्रदान करने वाली एक सत्तामूलक विचारधारा। बौ...
clicks 1  Vote 0 Vote  11:40am 6 Nov 2018

मुखर बौद्धिक कवि : कुमार मुकुल ... कृष्ण समिद्ध

( 2017 - आज मुकुल जी को दुसरी बार सुना...मुझे उनके स्वेत धवल बालों से जलन है...वो मुझे भी चाहिए था।)कविता तब दीर्घजीवी होती है ....जब समय को लांघकर बार बार प्रासंगि...
clicks 20  Vote 0 Vote  11:03am 5 Nov 2018

अँधकार के बाद लौटकर आती सुबह जैसी कविताएँ - शहंशाह आलम

चर्चित किताब : बयालीस - 'एक उर्सुला होती है' ( कुमार मुकुल )            इससे पहले भी युद्घ हुए थे           पिछला युद्ध जब ख़त्म ह...
clicks 3  Vote 0 Vote  10:27am 3 Nov 2018

गहरे प्रेम की गहरी कविताएँ ... प्रांजल धर

‘एक उर्सुला होती है’कवि कुमार मुकुल का ताज़ा कविता संग्रह है जिसकी कविताएँ जीवन और समाज में छीजते जा रहे प्रेम को केन्द्र में लाते हुए एक सार्थक-साहित्...
clicks 15  Vote 0 Vote  1:55pm 2 Nov 2018

सृजनात्‍मक जिजीविषा और जिगीषा का प्रतीक 'उर्सुला' - अनिल अनलहातु

हर रचनात्‍मक यात्रा में सहजीवन के रूप में किसी न किसी 'उर्सुला'की मौजूदगी अवश्‍य रहती है, इस संग्रह की कविताएं इसी बात की तस्‍दीक करती हैं। इस तरह कुमार म...
clicks 15  Vote 0 Vote  11:15am 1 Nov 2018

सहज तरंगित काव्यात्मक रिपोर्टिंग का सुंदर कोलाज - राधेश्‍याम तिवारी

भारतीय साहित्य में यह विचित्र सी स्थिति हैे कि जिन आचार्याें ने काव्य की आलेाचना के सिद्धान्त गढ़े आमतौर पर वे कविता लिखने से बचते रहे। प्लेटो या अरस्तू...
clicks 5  Vote 0 Vote  12:26pm 31 Oct 2018

अस्तित्व के अभिप्रेरक प्रेम की खरी कविताएँ - सवाई सिंह शेखावत

मित्र कवि कुमार मुकुलका अंतिका प्रकाशन से :'एक उर्सुला होती है'शीर्षक से तीसरा कविता संकलनआया है। इससे पूर्व 'परिदृश्य के भीतर''(2000)और'ग्यारह सितम्बर और अ...
clicks 2  Vote 0 Vote  11:47am 30 Oct 2018

जो नहीं मिला, उसे पाने की कोशिश में सर्वोत्तम रचना - कैलाश मनहर

"परस्पर अर्थों को अन्तिम सीमाओं तक समझते हुये/एक-दूसरे के स्पर्श तक की इच्छा नहीं करते थे"(द्रोपदी के विषय में कृष्ण) कवि विष्णु खरे की पंक्तियों को उध्द...
clicks 2  Vote 0 Vote  11:37am 29 Oct 2018

सांस्कृतिक गौरवबोध को ध्वस्त करती ‘पुतैये’ - सुशील 'मानव'

संस्कृति संस्कृति व्यक्ति एवं उसकी सावयवी व्यवस्था दोनों से श्रेष्ठ होती है। संस्कृति ही मनुष्य की भौतिक अभौतिककृतियों की वो संपूर्णता है जिसके जरिय...
clicks 8  Vote 0 Vote  11:11am 26 Oct 2018

पत्राचार - सियाराम शर्मा, राजूरंजन प्रसाद व कुमार मुकुल

सियाराम शर्मा - राजूरंजन प्रसादभिलाई, 27. 11. 2000।प्रिय भाई राजू,तुम्हारा पत्र और मुकुल जी के कविता संग्रह की समीक्षा मिली। मैंने अभी-अभी मुकुल जी का संग्रह द...
clicks 4  Vote 0 Vote  11:41am 25 Oct 2018
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