बाल सजग

Poem : Dazzling sound

" Dazzling sound "While playing in the ground,I heard a dazzling sound.then I looked around but not evidence I found.I determine not to play I informed my team, and run along the way.this time it was going dark outside, I seen all but avoid. I took up my books,and went on the roof.Poet : Devraj kumar , class : 9th , Apnaghar Poet introduction : This poem is belongs to Devraj kumar who is very inte...
clicks 28  Vote 0 Vote  6:11am 4 Sep 2019

कविता : आज़ादी का दिन

"आज़ादी का दिन "अब आया फुल आज़ादी का दिन, जिओ जिंदगी 370 धरा के बिन | रोक जो था कश्मीर के जमीं पर जो था बंधन घूमने वालों पर, अब वह रह सकते है जिंदगी भर | खाना हैं वहां...
clicks 15  Vote 0 Vote  5:57am 3 Sep 2019

कविता : सेब

"सेब "कश्मीर की सर जमीं पर,उगता हूँ बर्फ जमीं पर | ठण्ड की वजह से ख़राब नहीं हूँ,मैं तो एक लाल रसीला सेब हूँ,मीठा तो हूँ पर खट्टा नहीं,कश्मीर में तो हूँ , पर लो...
clicks 27  Vote 0 Vote  5:32am 2 Sep 2019

कविता : पानी की बूँदें

"पानी की बूँदें "ये पानी की बूँदें गिरती हुई कहती हैं,क्या मैं ही हूँ या पूरी दुनियां ऐसी है | मैं एक बून्द की तरह गिरती है, शरण न मिलने पर यूँ ही फिरती है | धूल ...
clicks 1  Vote 0 Vote  6:06am 29 Aug 2019

कविता : ऊँचे

"ऊँचे "ऊँचे है ये कितने ऊँचे हैं,सीधे हैं ये कितने सीधे हैं | पर ये है कितने फीके,इनसे हमको भी है सीखना,कठिनाइयों से है लड़ना | बस उनको तो है सिर्फ पढ़ना,ये हैं ह...
clicks 3  Vote 0 Vote  5:42am 28 Aug 2019

कविता : राखी का पर्व

"राखी का पर्व "राखी का पर्व है भी बहनों का, सम्बन्ध है यह रक्षा बंधन का | भाइयों के कलाइयों में बांधकर,चली जाती है रक्षा माँगकर | ख़ुशियों का त्यौहार है, रक्षा...
clicks 14  Vote 0 Vote  6:01am 26 Aug 2019

कविता : मन करता है पक्षी बनूँ

"मन करता है पक्षी बनूँ "मन करता है पक्षी बनकर,खुले आसमान में उड़ जाऊँ हर एक पल  को मैं,अपनी यादों में बसाऊँ | हरी भरी सी डालियों पर,मैं अपनी चहचाहट सुनाऊँ | ...
clicks 24  Vote 0 Vote  5:46am 25 Aug 2019

कविता : मुस्कुराते फूल

" मुस्कुराते फूल "हवाओं में हिलती हुई वह फूल जो कुछ कहना चाहती है | अपनी सजी हुई टहनियों को लेकर, हवाओं के साथ खेलना चाहती है | खुशबु से तन को महकाना चाहती ...
clicks 1  Vote 0 Vote  6:08am 23 Aug 2019

कविता : बूँदे भी कुछ कहना चाहती है

"बूँदे भी कुछ कहना चाहती है "ये बूँदे भी कुछ कहना चाहती है, कुछ बताना चाहती है | और कुछ सुनना चाहती है,जब मैं गिरूँ इस धरती पर,तो मुझे एक सरोवर में बचा लेना | या ...
clicks 3  Vote 0 Vote  6:06am 22 Aug 2019

कविता : मेरे देश के शहीदों

"मेरे देश के शहीदों "मेरे देश शहीदों ने,करवाया हमें आज़ाद |  दुश्मनों से लड़कर,किया उनके परिवारों को बर्बाद | हम लोगों को मिली है आज़ादी, आज़ादी को मत करना बर्...
clicks 2  Vote 0 Vote  6:00am 21 Aug 2019
[ Prev Page ] [ Next Page ]
 
CONTACT US ADVERTISE T&C [ FULL SITE ]

Copyright © 20018-2019