बाल सजग

कविता : एक ऐसे मोड़ पर

"एक ऐसे मोड़ पर "जब मैं खड़ा था एक ऐसे मोड़ पर,मेरी जिंदगी ले गई उस छोर पर | दिखाए मुझे कई किनारे उस छोर पर,पर मुझे ही नहीं था भरोसा अपनी सोच पर | मेरी जिंदगी ने मुझ...
clicks 18  Vote 0 Vote  6:06am 8 Apr 2019

कविता : सुबह का मौसम

"सुबह का मौसम "ये सुबह का मौसम कुछ ऐसा होता है | जो सुबह फिर सोने पर,मजबूर कर देता है | धीरे धीरे हौले हौले ठंडी ठंडी बहती ये हवाएँ | मेरे शरीर को छूकर है जाती,पत...
clicks 3  Vote 0 Vote  5:41pm 3 Apr 2019

कविता : सुहानी सी सुबह

"सुहानी सी सुबह "सुहानी सी सुबह खिली है,लगता है धरती सूरज से मिली है | उसके एक एक कण ऊर्जा से भरे है,ऐसा लगता है जैसे सागर में मोती बिखरे हैं | सुनहरी सुबह प्रक...
clicks 26  Vote 0 Vote  5:59am 3 Apr 2019

कविता : लम्हा जो मैंने खो दिया

"लम्हा जो मैंने खो दिया "वह लम्हा जो मैंने खो दिया,हर कदम वह लगन जो मैंने कम कर दिया | वह याद आती है और दुबारा बुलाती है,जोश और होश में आने की आशा दिलाती है | दिम...
clicks 3  Vote 0 Vote  5:55am 2 Apr 2019

कविता : वीरों को याद करो

"वीरों को याद करो "गर्मी के मौसम में,धरती के आँचल में | गर्म हवाएँ चल रही हैं,गर्मी से भू दहक रही है | लू लपाटा चले फर्राटा,कर न पाए कहीं सैर सपाटा | पेड़ पत्ते...
clicks 4  Vote 0 Vote  7:14am 31 Mar 2019

कविता : आसमां के परिंदे

"आसमां के परिंदे "आसमां के परिंदे, हमेशा उड़ना चाहते हैं | कुछ कर पाने के लिए,इंतज़ार करते रहते हैं | आसमां के छाए बादल,मौसम बदलना चाहते हैं | बारिश की बूंदें गि...
clicks 2  Vote 0 Vote  6:52am 30 Mar 2019

कविता : काश मेरा सपना ऐसा होता

"काश मेरा सपना ऐसा होता "काश मेरा सपना ऐसा होता,पक्षी की तरह मैं होता | आसमां में उड़ पाते,संसार को अलग से देख पाते | काश वह ऐसा होता,मेरे भी कुछ सपने होते | मैं क...
clicks 2  Vote 0 Vote  6:39am 30 Mar 2019

कविता : भगत सिंह बनना हम है चाहते

"भगत सिंह बनना हम है चाहते "वीरों के वीर थे,तीनों बड़े शेर थे | क्रान्तिकारी ये कहलाते थे,अंग्रेजों से ये न घबराते थे | बेम फेंक सबको चौकाया,बिना डरे इन्होने क...
clicks 2  Vote 0 Vote  6:25am 30 Mar 2019

कविता : दोस्ती तेरी याद में

"दोस्ती तेरी याद में "दोस्ती तेरी याद में,दिल धड़क रहा है | तुमसे मिलने के लिए,आंखें तरस रही है | याद आते हैं वो गाने,तेरे मेरे गुनगुनाने के,चाहत है तेरे संग रह ...
clicks 4  Vote 0 Vote  6:05am 30 Mar 2019

कविता : भगत सिंह

"भगत सिंह "वह लहू जो देश के काम आया,बढ़ते हुए जुल्म से मुल्क के लोग राहत पाया | सोते हुए भी नींद की अपेक्षा न रख पाया,असेम्ब्ली में बम फेकते हुए सबको सूचना दे आ...
clicks 4  Vote 0 Vote  7:19am 26 Mar 2019
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