बाल सजग

कविता : हौशलों के उस सागर में

"हौशलों के उस सागर में "हौशलों के उस सागर में,लहरें चलती रहती हैं | छोटे से नाव साहस से,मंजिल की ओर चलती है  तन छोटा है तो क्या ,साहस बड़ा होना चाहिए | बड़ी...
clicks 0  Vote 0 Vote  2:32pm 6 Oct 2018

कविता : कौन थे भीमराव अम्बेडकर

"कौन थे भीमराव अम्बेडकर "जब मैं बैठा माँ से हटकर,पूछा उनसे एक सवाल डटकर | कौन है भीमराव अंबेडकर,सोचने लगी वह कुछ देर बैठकर | चुपके से खिसक लिया वहां से,मा...
clicks 5  Vote 0 Vote  5:38am 25 Sep 2018

कविता : आसमां को छूकर आऊँगा

 "आसमां को छूकर आऊँगा "मैं  सूरज की रौशनी बनकर, उजाला धरती पर पहुँचाऊँगा | जो मैंने कुछ बनने के सपने देखे थे, वह मैं जीवन में सच कर दिखाऊँगा | जितन...
clicks 3  Vote 0 Vote  5:50pm 21 Sep 2018

कविता : हंस लो हसने वालों

"हंस लो हसने वालों,"हंस लो हसने वालों, करो घृणा करने वालों | पर दिल का दुःख नहीं,समझ पाओगे पैसा वालों | दुःख की धरा को लेकर मैं निडर रहता हूँ, जुल्म करो ...
clicks 22  Vote 0 Vote  5:21am 19 Sep 2018

कविता : चंद्रशेखर आज़ाद

" चंद्रशेखर आज़ाद "चंद्रशेखर आज़ाद की थी यह क़ुरबानी, खूनों से भरी थी तालाब और नदियों का पानी | अंग्रेज़ भारतवासियों को लटका रहे थे, मौका मिलने पर धीरे स...
clicks 1  Vote 0 Vote  8:02pm 15 Sep 2018

कविता : हिंदुस्तान में पली बड़ी है हिंदी

"हिंदुस्तान में पली- बड़ी है हिंदी "हिंदुस्तान में पली -बड़ी है हिंदी,देश के हर गली में है हिंदी | जिह्वा के हर कण में है हिंदी,मातृभाषा के हर शब्द में है हिंद...
clicks 2  Vote 0 Vote  7:44pm 15 Sep 2018

कविता : ये खुला आसमान है अपना

"ये खुला आसमान है अपना "ये खुला आसमान है अपना ,  जिस पर सजाना है सपना |हर एक दिन हो अपना ,  जिस पर हक़ हो अपना | जीने और मरने की हो आज़ादी ,  जाति धर...
clicks 2  Vote 0 Vote  7:56pm 6 Sep 2018

कविता : बारिश का दिन आया

"बारिश का दिन आया "पहले काले  बादलों ने डराया ,  फिर पानी खूब बरसाया | बारिश का दिन आया ,  बूंदों का भंडार लाया | गर्मी का तापमान गिराया ,  ...
clicks 2  Vote 0 Vote  5:03am 5 Sep 2018

कविता : कल का भविष्य हैं हम

"कल का भविष्य हैं हम "हम मज़दूर हैं तो क्या हुआ ,  कल का भविष्य हैं हम | मेरी सफलताओं को ,  कदम चूमेगी एक दिन | हौसला और जज्बा को ,  कम होने नहीं ...
clicks 3  Vote 0 Vote  8:06pm 4 Sep 2018

कविता :पाँच उँगलियाँ मिलने से

"पाँच उँगलियाँ मिलने से "पाँच उँगलियाँ मिलने से , एक हाथ बन जाता है |हर जन लोग मिलने से , एक समाज बन जाता है |एक दूसरे का साथ दो तो , वह  सहारा बन जात...
clicks 10  Vote 0 Vote  6:22am 3 Sep 2018
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