बाल सजग

कविता : कभी कुछ खाश

"कभी कुछ खाश "मैं सोचता हूँ कभी कुछ खास,जिस पर मुझे खुद है विश्वास | मेरी बचपन से ये पढ़ने की प्यास,बना देती है मुझे उदास | मेरी ये जिंदगी और बड़नसबी,कहीं कर दे न ...
clicks 14  Vote 0 Vote  5:41am 9 Jul 2019

कविता : बहती हवाएँ

"बहती हवाएँ "चलती हवाएँ कुछ कह रहीं हैं,मानो वह मंद मंद बह रहीं हैं | फूल - पत्तों को छूकर,बंजर जमीं को फूँककर | वह सारी सौन्दर्य को बढ़ा रहीं हैं,चलती हवाएँ कुछ...
clicks 14  Vote 0 Vote  5:54am 8 Jul 2019

कविता : बारिस

"बारिस " रिमझिम - रिमझिम बारिस आई,अपने संग काले बादल लाई | लहराते हुए हवाओं में,पेड़ों की बौछारों में | ख़ुशी चहचाहट लाई,खेतों में हरियाली लाई | रिमझिम -रिमझि...
clicks 2  Vote 0 Vote  7:19am 7 Jul 2019

कविता : छोटा बन जाऊँ

"छोटा बन जाऊँ "मन करता है छोटा बन जाऊँ,माँ का प्यार दोबारा पाऊँ | उंगली पकड़कर चलना सिखाती,हर अनजान मोड़ पर राह दिखाती | `हर गलती को मेरी बक्श दे, जीवन में मुझे ढ...
clicks 1  Vote 0 Vote  9:39pm 28 Jun 2019

कविता : देश होता जा रहा है खोखला

"देश होता जा रहा है खोखला "फैशन का चल रहा है जलवा,देश होता जा रहा है खोखला | तरह -तरह की नई चीजें आती,ये सब बड़े बड़े को नाच नचाती | फैशन का चल रहा है जलवा,गन्दी ...
clicks 29  Vote 0 Vote  6:21am 9 Jun 2019

कविता : बचपन

"बचपन "जब मैं छोटा बच्चा था,बचपन में मैं गोरा था | बचपन में मैं शैतान था,मम्मी गलती पर डाटती थी | फिर भी वही काम करता था,पापा मेरे लिए रसगुल्ला लाता था | मिठाई म...
clicks 3  Vote 0 Vote  5:14am 6 Jun 2019

कविता : छोटी सी चिड़िया

 "छोटी सी चिड़िया"छोटी सी चिड़िया है, वह कुछ कहना चाहती है | उसकी भाषा समझ में न आती है,इसीलिए उदास होकर वह उड़ जाती है | वह अपने दुःख को ले जाती है,छोटी सी चिड़िय...
clicks 4  Vote 0 Vote  6:17am 2 Jun 2019

कविता : छुट्टी

"छुट्टी "जब छुट्टी हुई स्कूल से,खूब खेल रहे थे धूल से | हो गई बड़ी भूल हम से,मम्मी ने मना किया था खेलना धूल से | जब छुट्टी हुई स्कूल से | | पढ़ाई का कोई नाम नहीं,करने...
clicks 5  Vote 0 Vote  6:48am 31 May 2019

कविता : चन्दा मामा की बात

"चन्दा मामा की बात "सो रहे थे जब छत पे हम,गिन रहे थे तारे को | तभी कुछ देर बाद आ गए,चन्दा मां सुलाने को | तारे बोले अभी तुम न सोना,अभी करना है कुछ काम | फैलो जग में ...
clicks 5  Vote 0 Vote  5:02am 29 May 2019

कविता : जाति -धर्म

"जाति -धर्म "जाति - धर्म मैं क्या जानूँ,सभी को मैं भाई - बहन मानूँ | अल्लाह - ईश्वर है एक, फिर भी बैर रखते हैं लोग अनेक | रगों में रंग है ताली का, फिर भी बैर है गोरी ...
clicks 3  Vote 0 Vote  6:56am 26 May 2019
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