स्वप्न मेरे ...

ये कहानी भी सुनानी, है अभी तक गाँव में ...

बस वही मेरी निशानी, है अभी तक गाँव में बोलता था जिसको नानी, है अभी तक गाँव में खंडहरों में हो गई तब्दील पर अपनी तो है  वो हवेली जो पुरानी, है अभी तक गाँव में ...
clicks 12  Vote 0 Vote  9:11am 13 Nov 2017

ज़िंदगी के गीत खुल के गाइए ...

जुगनुओं से यूँ न दिल बहलाइएजा के पुडिया धूप की ले आइएपोटली यादों की खुलती जाएगीवक़्त की गलियों से मिलते जाइएस्वाद बचपन का तुम्हें मिल जाएगाफिर उसी ठेले प...
clicks 21  Vote 0 Vote  9:51am 6 Nov 2017

गुज़रे थे मेरे दिन भी कुछ माँ की इबादत में ...

लिक्खी है गज़ल ताज़ा खामोश इबारत में दिन रात इसे रखना, होठों की हिफाज़त में हंसती है कहीं पायल, रोते हैं कहीं घुँघरूलटकी हैं कई यादें जालों सी इमारत मेंतारीफ़...
clicks 31  Vote 0 Vote  11:25am 31 Oct 2017

मिलते हैं मेरे जैसे, किरदार कथाओं में ...

बारूद की खुशबू है, दिन रात हवाओं में देता है कोई छुप कर, तकरीर सभाओं में इक याद भटकती है, इक रूह सिसकती है घुंघरू से खनकते हैं, खामोश गुफाओं में बादल तो नहीं ...
clicks 6  Vote 0 Vote  9:20am 18 Sep 2017

राधा के साथ मुरली-मनोहर चले गए ...

भुगतान हो गया तो निकल कर चले गए नारे लगाने वाले अधिकतर चले गएमाँ बाप को निकाल के घर, खेत बेच कर बेटे हिसाब कर के बराबर चले गए सूखी सी पत्तियाँ तो कभी धूल के ग...
clicks 6  Vote 0 Vote  10:16am 11 Sep 2017

दीवारों की दरारों में किसी का कान तो होगा ...

हुआ है हादसा इतना बड़ा वीरान तो होगाअभी निकला है दहशत से शहर सुनसान तो होगा घुसे आये मेरे घर में चलो तस्लीम है लेकिन  तलाशी की इजाज़त का कोई फरमान तो होगा ब...
clicks 18  Vote 0 Vote  9:33am 5 Sep 2017

माँ सामने खड़ी है मचल जाइए हुजूर ...

बहरों का है शहर ये संभल जाइए हुजूर क्यों कह रहे हैं अपनी गज़ल जाइए हुजूरबिखरे हुए जो राह में पत्थर समेट लो  कुछ दूर कांच का है महल जाइए हुजूरजो आपकी तलाश स...
clicks 31  Vote 0 Vote  6:20am 28 Aug 2017

जो अपने दिल में इन्कलाब लिए बैठा है ...

वो रौशनी का हर हिसाब लिए बैठा हैजो घर में अपने आफताब लिए बैठा है इसी लिए के छोड़नी है उसे ये आदत  वो पी नहीं रहा शराब लिए बैठा है पता है सच उसे मगर वो सुनेगा ...
clicks 31  Vote 0 Vote  8:44am 21 Aug 2017

सर्प कब तक आस्तीनों में छुपे पलते रहेंगे ...

सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभ-कामनाएं ... इस पावन पर्व की पूर्व संध्या पर आज के हालात पे लिखी गज़ल प्रस्तुत है ... आशा है सबका स्नेह मिलता रहेगा ...जब तल...
clicks 24  Vote 0 Vote  8:48am 14 Aug 2017

हर युग के कुछ सवाल हैं जो हल नहीं हुए ...

कविता के लम्बे दौर से निकलने का मन तो नहीं था, फिर लगा कहीं गज़ल लिखना भूल तो नहीं गया ... इसलिए आज ग़ज़ल के साथ हाजिर हूँ आपके बीच ... आशा है सबका स्नेह मिलता रहेगा...
clicks 40  Vote 0 Vote  12:10pm 2 Aug 2017
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