स्वप्न मेरे ...

उम्र के छलावे ...

सभी मित्रों को नव वर्ष की हार्दिक मंगल कामनाएं ... २०१८ सबके लिए शुभ हो. नव वर्ष की शुरुआत एक रचना के साथ ... जाने क्यों अभी तक ब्लॉग पे नहीं डाली ... अगर आपके द...
clicks 18  Vote 0 Vote  11:34am 3 Jan 2018

बचा कर के टांगें निकलना पड़ेगा ...

नया वर्ष आने वाला है ... सभी मित्रों को २०१८ की बहुत बहुत शुभकामनाएं ... २०१७ की अच्छी यादों के साथ २०१८ का स्वागत है ... ये किरदार अपना बदलना पड़ेगा जो जैसा है ...
clicks 1  Vote 0 Vote  2:36pm 25 Dec 2017

रो रही हैं आज क्यों फिर पुतलियाँ ...

छत भिगोने आ गईं जो बदलियाँशोर क्यों करती हैं इतना बिजलियाँ आदमी शहरों के ऐसे हो गए चूस कर छोड़ी हों जैसे गुठलियाँ फेर में कानून के हम आ गएअब कराहेंगी हमारी...
clicks 1  Vote 0 Vote  8:36am 18 Dec 2017

या फिर हमें भी इक चराग़ लेने दो ...

फूलों की कैद से पराग लेने दो इन तितलियों से कुछ सुराग लेने दो इस दौड़ में कहीं पिछड़ न जाएं हम मंजिल अभी है दूर भाग लेने दोराजा हो रंक पेट तो सताएगा उनको भी तो ...
clicks 30  Vote 0 Vote  9:53am 11 Dec 2017

कहानी खोल के रख दी है कुछ मजबूत तालों ने ...

लहू का रंग है यकसाँ कहा शमशीर भालों ने लगा डाली है फिर भी आग बस्ती के दलालों ने  यकीनन दूर है मंज़िल मगर मैं ढूंढ ही लूंगा झलक दिखलाई है मुझको अँधेरे में उज...
clicks 34  Vote 0 Vote  9:44am 4 Dec 2017

रँग चुके हैं यहाँ सब तेरे रंग में ...

अपने मन मोहने सांवले रंग में श्याम रँग दो हमें सांवरे रंग में मैं ही अग्नि हूँ जल पृथ्वी वायु गगनआत्मा है अजर सब मेरे रंग में ओढ़ कर फिर बसंती सा चोला चलोआज ...
clicks 34  Vote 0 Vote  10:32am 28 Nov 2017

हम तरक्की के सौपान चढ़ते रहे ...

हम बुज़ुर्गों के चरणों में झुकते रहे पद प्रतिष्ठा के संजोग बनते रहे वो समुंदर में डूबेंगे हर हाल में  नाव कागज़ की ले के जो चलते रहे इसलिए बढ़ गईं उनकी बदमा...
clicks 29  Vote 0 Vote  9:49am 20 Nov 2017

ये कहानी भी सुनानी, है अभी तक गाँव में ...

बस वही मेरी निशानी, है अभी तक गाँव में बोलता था जिसको नानी, है अभी तक गाँव में खंडहरों में हो गई तब्दील पर अपनी तो है  वो हवेली जो पुरानी, है अभी तक गाँव में ...
clicks 33  Vote 0 Vote  9:11am 13 Nov 2017

ज़िंदगी के गीत खुल के गाइए ...

जुगनुओं से यूँ न दिल बहलाइएजा के पुडिया धूप की ले आइएपोटली यादों की खुलती जाएगीवक़्त की गलियों से मिलते जाइएस्वाद बचपन का तुम्हें मिल जाएगाफिर उसी ठेले प...
clicks 35  Vote 0 Vote  9:51am 6 Nov 2017

गुज़रे थे मेरे दिन भी कुछ माँ की इबादत में ...

लिक्खी है गज़ल ताज़ा खामोश इबारत में दिन रात इसे रखना, होठों की हिफाज़त में हंसती है कहीं पायल, रोते हैं कहीं घुँघरूलटकी हैं कई यादें जालों सी इमारत मेंतारीफ़...
clicks 51  Vote 0 Vote  11:25am 31 Oct 2017
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