अनकहे किस्से

था कौन मेरा? क्या अपना था?

शिथिल पड़ी इच्छाओं कोसहसा ही कोई उछाल गयाथा कौन मेरा? क्या अपना था?क्यों अपनी आदत डाल गयाबंजर बस्ती सूनी गलियांबरसों से बरखा को तरसीडेरा डाले पतझड़ बैठाना...
clicks 6  Vote 0 Vote  12:40pm 18 Oct 2019

अगली कविता

अगली पूर्णिमा को जब चाँद अपने पूरे रुआब में आसमान पर बैठा इतरा रहा होगा और टिमटिमाते तारे उसके सम्मान में ख़ुद को बिछा चुके होंगे। रात का वो पहर जब ठंडी ह...
clicks 11  Vote 0 Vote  10:23am 15 Oct 2019

ये वादा है लौटूँगा

ना होना किसी का, जब किसी का हो लेनासीखा है तुमसे ही , कैसे किसी का हो लेनाये वादा है लौटूँगा, फिर मैं अगले जन्मरखना सिर मेरे काँधे, और खुल के रो लेनाकरो ये वा...
clicks 9  Vote 0 Vote  3:07pm 9 Oct 2019

युद्ध

पृथ्वी पर आधिपत्य स्थापित करने के लिए सदियों से मनुष्य और प्रकृति में युद्ध होता आ रहा हैमनुष्य के हथियार हैं आरी, कुल्हाड़ी और बड़ी बड़ी मशीनें। जबकि प्रक...
clicks 1  Vote 0 Vote  4:37pm 1 Oct 2019

नीरस जीवन

कभी कभी ज्यादा ज्ञान अर्जित कर लेने से भी जीवन नीरसता से भर जाता है। जब हमें सब कुछ पता चल जाता है तो उत्सुकता मर जाती है और जीवन का ध्येय ख़त्म हो जाता है।ह...
clicks 10  Vote 0 Vote  4:36pm 29 Sep 2019

कहना ये था

लाख वादे हज़ार कसमेंयूँ ही फ़ना हुएशिकायतों की फ़ेहरिश्त लिएपास रह ना सकाकितना कुछ कहना थाआख़िरी अलविदा से पहलेपर हुआ यूँ किमैं तुमसे कुछ कह ना सकाकहना ये थ...
clicks 21  Vote 0 Vote  4:34pm 27 Sep 2019

दूसरा प्यार

जब आप किसी का दूसरा प्यार होते हैं तब आपसे उम्मीदें कम होती हैं और आपक...
clicks 33  Vote 0 Vote  11:35am 19 Sep 2019

आत्ममंथन

किसी इंसान की ज़िंदगी का वह दौर सबसे भयावह होता है जहाँ पूरी दुनिया की ...
clicks 24  Vote 0 Vote  11:38am 12 Sep 2019

क्यों जीवन व्यर्थ गंवाता है

निश्छल और निष्पाप रूप मेंजीव  धरा  पर  आता हैआसक्ति और मोह के वश मेंé...
clicks 26  Vote 0 Vote  9:34am 10 Sep 2019

अग्निपरीक्षा

व्यर्थ बहाता क्यों है मानवआँसू  भी  एक  मोती  हैजीवन पथ पर अग्निपरी&...
clicks 79  Vote 0 Vote  9:42am 2 Sep 2019
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