सफर के सजदे में

झूल आयें सुकून की बाहें

हजारों मील का सफर ,और बाहें फैलाए हुए दिलकुछ रिश्ते तो हों ऐसे भी ,के झूल आयें सुकून की बाहेंहमारी राहों में चांद उग आता ,न दिन का पता होता न रात कानींद से बो...
clicks 4  Vote 0 Vote  8:58am 27 Feb 2019

अन्दर से हम वही होते हैं

हम घूम आयें चाहे जितना देश-विदेश दुबई,मॉरीशस,यूरोप हो या हो कोई भी देश अन्दर से हम वही होते हैं अपनी जड़ों से जुड़े अपने बचपन की अमानत ओढ़ लें चाहे हम...
clicks 40  Vote 0 Vote  7:36pm 27 Jan 2019

जब न होंगीं राहें हक़ में

कैसे चलोगे जब न होंगीं राहें हक़ में जब भी कोई गुजर रहा होता है जिस्मानी तकलीफों से वो सिर्फ जिस्मानी दर्दों से ही नहीं गुजरता है ,वो गुजर रहा होता है,रू...
clicks 85  Vote 0 Vote  8:37am 13 Sep 2018

फ्रैंकफर्ट से आने के बाद

दिन उड़ गये पँछियों की तरह , खबर न रही वक़्त की फितरत है , फिसल जाता है हाथों से ,उम्र की ही तरह अब ये आलम है कि कुछ छूट गया सा लगता है लम्हा-दर-लम्हा पकड़ पान...
clicks 114  Vote 0 Vote  6:26pm 4 Aug 2018

केदारनाथ में एक रात

सहलाओ मेरे ज़ख्म भोले ताकि मैं सो जाऊँ शिव के प्राँगण में , नींद क्यूँ रूठी है लाशों के ढेर जहाँ कभी गाजर-मूली से बिछ गये हों दफन हुए अपने जहाँ ,साथ-साथ ...
clicks 74  Vote 0 Vote  1:58pm 29 May 2018

आँखों में सितारे भर

चिया चली गई ससुरालआँखों में सितारे भर ,लहँगा पहन ,चुनरी ओढ़ ,डाल कर उसके हाथों में हाथसोचा भी बहुत था ,लिखा भी थाबोला मगर कुछ भी न गयान तो गाये विदाई के गीतन ह...
clicks 26  Vote 0 Vote  11:27am 17 Mar 2018

सवाल आरुषि की माँ से

 जैसे है हक़ तुम्हें जीने का वैसे ही हक़ था उस नन्हीं जान को भी दुनिया में रहने का हाँ तुम्हारी आँखों में नहीं है तड़प ये जान लेने की कि किसने काटा गला त...
clicks 58  Vote 0 Vote  3:46pm 16 Oct 2017

कैसे कोई उड़ान भरे

सूने हो गये घर-अँगना , जो आबाद हुये थे बच्चों के आने से ,मन की ये फितरत है , सजा लेता है दुनिया जिन क़दमों की आहट से भी ,बुन लेता है रँगी सपने उन लम्हों के अफसानो...
clicks 92  Vote 0 Vote  2:14pm 6 Sep 2017

और ज़माना धूप ही धूप

दुनिया की सारी माँओं के लिये माँ  ये क्या बात है कि सुख में तुम मुझे याद आओ या न आओ दुख में तुम हमेशा मेरे सिरहाने खड़ी होती हो जब मैं नन्हीं बच्...
clicks 70  Vote 0 Vote  7:55am 29 May 2017

श्रद्धाँजलि

राकेश गुप्ता जी के निधन पर श्रद्धाँजलि   आज रोया है आसमाँ भी हाय खो दिया है हमने एक नम सीना तुमने जिया था ज़िन्दगी को एक शायर की तरह दर्द की इन्तिहाँ ...
clicks 130  Vote 0 Vote  1:51pm 10 Apr 2017
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