सफर के सजदे में

जब न होंगीं राहें हक़ में

कैसे चलोगे जब न होंगीं राहें हक़ में जब भी कोई गुजर रहा होता है जिस्मानी तकलीफों से वो सिर्फ जिस्मानी दर्दों से ही नहीं गुजरता है ,वो गुजर रहा होता है,रू...
clicks 54  Vote 0 Vote  8:37am 13 Sep 2018

फ्रैंकफर्ट से आने के बाद

दिन उड़ गये पँछियों की तरह , खबर न रही वक़्त की फितरत है , फिसल जाता है हाथों से ,उम्र की ही तरह अब ये आलम है कि कुछ छूट गया सा लगता है लम्हा-दर-लम्हा पकड़ पान...
clicks 74  Vote 0 Vote  6:26pm 4 Aug 2018

केदारनाथ में एक रात

सहलाओ मेरे ज़ख्म भोले ताकि मैं सो जाऊँ शिव के प्राँगण में , नींद क्यूँ रूठी है लाशों के ढेर जहाँ कभी गाजर-मूली से बिछ गये हों दफन हुए अपने जहाँ ,साथ-साथ ...
clicks 49  Vote 0 Vote  1:58pm 29 May 2018

आँखों में सितारे भर

चिया चली गई ससुरालआँखों में सितारे भर ,लहँगा पहन ,चुनरी ओढ़ ,डाल कर उसके हाथों में हाथसोचा भी बहुत था ,लिखा भी थाबोला मगर कुछ भी न गयान तो गाये विदाई के गीतन ह...
clicks 18  Vote 0 Vote  11:27am 17 Mar 2018

सवाल आरुषि की माँ से

 जैसे है हक़ तुम्हें जीने का वैसे ही हक़ था उस नन्हीं जान को भी दुनिया में रहने का हाँ तुम्हारी आँखों में नहीं है तड़प ये जान लेने की कि किसने काटा गला त...
clicks 39  Vote 0 Vote  3:46pm 16 Oct 2017

कैसे कोई उड़ान भरे

सूने हो गये घर-अँगना , जो आबाद हुये थे बच्चों के आने से ,मन की ये फितरत है , सजा लेता है दुनिया जिन क़दमों की आहट से भी ,बुन लेता है रँगी सपने उन लम्हों के अफसानो...
clicks 77  Vote 0 Vote  2:14pm 6 Sep 2017

और ज़माना धूप ही धूप

दुनिया की सारी माँओं के लिये माँ  ये क्या बात है कि सुख में तुम मुझे याद आओ या न आओ दुख में तुम हमेशा मेरे सिरहाने खड़ी होती हो जब मैं नन्हीं बच्...
clicks 58  Vote 0 Vote  7:55am 29 May 2017

श्रद्धाँजलि

राकेश गुप्ता जी के निधन पर श्रद्धाँजलि   आज रोया है आसमाँ भी हाय खो दिया है हमने एक नम सीना तुमने जिया था ज़िन्दगी को एक शायर की तरह दर्द की इन्तिहाँ ...
clicks 116  Vote 0 Vote  1:51pm 10 Apr 2017

कुछ यादगार लम्हे ,

थोड़े लम्हे चुरा लें थोड़ी बात बना लें जीवन की आपा-धापी से फुर्सत का कोई सामान जुटा लें पेड़ों के झुरमुट से झाँकता हुआ ,तारों भरा आसमाँ मद्धिम सी र...
clicks 111  Vote 0 Vote  1:32pm 6 Apr 2017

तुम्हारे जाने के अहसास

चलो तुम्हारे जाने के अहसास को अभी ही जी लेते हैं थोड़ा गम पी लेते हैं ताकि तुम्हारे जाने के वक़्त आँख में आँसू न हो तुम्हारी बाइसिकिल जो तुम घर आ कर चला...
clicks 125  Vote 0 Vote  5:00pm 19 Dec 2016
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