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कहो भीड़ बन जाऊं क्या

ग़ज़लमैं भी प्यार ‘जताऊं’ क्याझूठों में मिल जाऊं क्या15-03-2019जिस दिनकोई नहीं होताउस दिन घर पर आऊं क्याजीवन बड़ा कठिन है रेफिर जीकर दिखलाऊं क्याइकला हूं मैं...
clicks 19  Vote 0 Vote  10:39pm 14 Apr 2019

मैं पशोपेश में रहा

ग़ज़लमैं अपने देश में रहामैं पशोपेश में रहासदा तक़लीफ़ में रहाज़रा आवेश में रहावही होगा मेरा रक़ीबजो कई वेश में रहामैं क्यों ईमानदार हूंबहुत वो तैश में रहान म...
clicks 56  Vote 0 Vote  3:33pm 15 Mar 2019

संवाद का स्तर और उसे करनेवालों की नीयत (decency in dialogue and fraudulence of behaviour)

जब पढ़ते थे तो तरह-तरह के लोगों को पढ़ते थे। साहित्य अच्छा तो लगता ही था मगर यह दिखाना भी अच्छा लगता था कि ‘देखो, हम दूसरों से अलग हैं, हम वह साहित्य भी पढ़ते है...
clicks 2  Vote 0 Vote  12:07am 13 Mar 2019

संवाद का स्तर और उसे करनेवालों की नीयत (decency in language but fraudulence of behavior)

जब पढ़ते थे तो तरह-तरह के लोगों को पढ़ते थे। साहित्य अच्छा तो लगता ही था मगर यह दिखाना भी अच्छा लगता था कि ‘देखो, हम दूसरों से अलग हैं, हम वह साहित्य भी पढ़ते है...
clicks 53  Vote 0 Vote  12:07am 13 Mar 2019

अलग तरह की अहिंसा

व्यंग्यभक्त बताते हैं कि गांधीजी धर्मनिरपेक्ष आदमी थे। आपको मालूम ही है आजकल भक्तों से तो भक्त भी पंगा नहीं लेते। लेकिन इससे एक बात पता लगती है कि धर्मन...
clicks 76  Vote 0 Vote  4:59pm 9 Jan 2019

‘मां की ममता’ बनाम ‘मुन्नी डिग पयी’

मैं तब के वक़्त को याद करना चाहता हूं जब मेरी मां के मैं और मेरी छोटी बहन बस दो ही बच्चे थे। छोटी बहिन आठ या नौ महीने की और मैं शायद साढ़े तीन या चार साल का था। ...
clicks 61  Vote 0 Vote  3:30pm 29 Dec 2018

बात यूं है कि बात कुछ भी नहीं

गज़लहाथ आई हयात कुछ भी नहींबात यूं है कि बात कुछ भी नहीं                          11-01-2013यू तो मेरी औक़ात कुछ भी नहींकाट लूं दिन तो रात कुछ भी नहीं  &...
clicks 138  Vote 0 Vote  10:28pm 29 Oct 2018

बैन करेगा क्या / ख़ुद क़िताब हो लें

ग़ज़लआओ सच बोलेंदुनिया को खोलेंझूठा हंसने सेबेहतर है रो लेंपांच बरस ये, वोइक जैसा बोलेंअपना ही चेहराक्यों ना ख़ुद धो लेंराजा की तारीफ़जो पन्ना खोलेंक्या ...
clicks 130  Vote 0 Vote  7:48pm 1 Oct 2018

सच बोलना है मुश्क़िल, लेकिन है गाना आसां

ग़ज़लजब खुल गई पहेली तो है समझना आसांसच बोलना है मुश्क़िल, लेकिन है गाना आसां पहले तो झूठ बोलो, ख़ुद रास्ता बनाओफिर दूसरों को सच का रस्ता बताना आसांवैसे त...
clicks 130  Vote 0 Vote  7:03pm 26 Aug 2018

जाने कैसा ख़ालीपन है ख़ानदानों में

ग़ज़लभागते फिरते हैं वो सुंदर मकानों मेंठग कभी टिकते नहीं अपने बयानों मेंशादियों में नोंचते हैं फूल अलबत्ताप्यार की भी कुछ तड़प होगी सयानों में      &nbs...
clicks 148  Vote 0 Vote  9:15pm 8 Aug 2018
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