saMVAdGhar संवादघर

अलग तरह की अहिंसा

व्यंग्यभक्त बताते हैं कि गांधीजी धर्मनिरपेक्ष आदमी थे। आपको मालूम ही है आजकल भक्तों से तो भक्त भी पंगा नहीं लेते। लेकिन इससे एक बात पता लगती है कि धर्मन...
clicks 23  Vote 0 Vote  4:59pm 9 Jan 2019

‘मां की ममता’ बनाम ‘मुन्नी डिग पयी’

मैं तब के वक़्त को याद करना चाहता हूं जब मेरी मां के मैं और मेरी छोटी बहन बस दो ही बच्चे थे। छोटी बहिन आठ या नौ महीने की और मैं शायद साढ़े तीन या चार साल का था। ...
clicks 28  Vote 0 Vote  3:30pm 29 Dec 2018

बात यूं है कि बात कुछ भी नहीं

गज़लहाथ आई हयात कुछ भी नहींबात यूं है कि बात कुछ भी नहीं                          11-01-2013यू तो मेरी औक़ात कुछ भी नहींकाट लूं दिन तो रात कुछ भी नहीं  &...
clicks 89  Vote 0 Vote  10:28pm 29 Oct 2018

बैन करेगा क्या / ख़ुद क़िताब हो लें

ग़ज़लआओ सच बोलेंदुनिया को खोलेंझूठा हंसने सेबेहतर है रो लेंपांच बरस ये, वोइक जैसा बोलेंअपना ही चेहराक्यों ना ख़ुद धो लेंराजा की तारीफ़जो पन्ना खोलेंक्या ...
clicks 74  Vote 0 Vote  7:48pm 1 Oct 2018

सच बोलना है मुश्क़िल, लेकिन है गाना आसां

ग़ज़लजब खुल गई पहेली तो है समझना आसांसच बोलना है मुश्क़िल, लेकिन है गाना आसां पहले तो झूठ बोलो, ख़ुद रास्ता बनाओफिर दूसरों को सच का रस्ता बताना आसांवैसे त...
clicks 90  Vote 0 Vote  7:03pm 26 Aug 2018

जाने कैसा ख़ालीपन है ख़ानदानों में

ग़ज़लभागते फिरते हैं वो सुंदर मकानों मेंठग कभी टिकते नहीं अपने बयानों मेंशादियों में नोंचते हैं फूल अलबत्ताप्यार की भी कुछ तड़प होगी सयानों में      &nbs...
clicks 109  Vote 0 Vote  9:15pm 8 Aug 2018

एक मुर्दा कहीं से ले आओ

photo by Sanjay Groverग़ज़लभीड़, तन्हा को जब डराती हैमेरी तो हंसी छूट जाती हैसब ग़लत हैं तो हम सही क्यों होंभीड़ को ऐसी अदा भाती हैदिन में इस फ़िक़्र में हूं जागा हुआरात में न...
clicks 66  Vote 0 Vote  9:40pm 27 Jun 2018

है शुक्र कि मेरा कोई उस्ताद नहीं है

ग़ज़लcreated by Sanjay Groverहिंदू कि मुसलमां, मुझे कुछ याद नहीं हैहै शुक्र कि मेरा कोई उस्ताद नहीं हैजो जीतने से पहले बेईमान हो गएमेरी थके-हारों से तो फ़रियाद नहीं हैजो ...
clicks 72  Vote 0 Vote  11:54pm 20 Jun 2018

इसकी ख़ातिर अपनी नज़रों से भी क्या गिर जाऊं मैं !

ग़ज़लदूसरों के वास्ते बेहद बड़ा हो जाऊं मैंइसकी ख़ातिर अपनी नज़रों से भी क्या गिर जाऊं मैंएक इकले आदमी की, कैसी है जद्दोजहदकौन है सुनने के क़ाबिल, किसको ये दिख...
clicks 44  Vote 0 Vote  11:01pm 19 Jun 2018

किसीसे, बात छुपाओ, कभी कहा ही नहीं

ग़ज़लराज खुल जाने के डर में कभी रहा ही नहींकिसीसे, बात छुपाओ, कभी कहा ही नहींमैंने वो बात कही भीड़ जिससे डरती हैये कोई जुर्म है कि भीड़ से डरा ही नहीं !जितना ख़...
clicks 107  Vote 0 Vote  4:46pm 26 Apr 2018
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