बेचैन आत्मा

लोहे का घर-56

पाण्डे जी का चप्पल.................................जैसे सभी के पास होता है, ट्रेन में चढ़ने समय पाण्डे जी के पास भी एक जोड़ी चप्पल था। चढ़े तो अपनी बर्थ पर किसी को सोया देख, प्रेम स...
clicks 12  Vote 0 Vote  4:31pm 18 Aug 2019

लोहे का घर-55

क्या मैं सही ट्रेन में बैठा हूँ?.................................न जाने कौन टेसन उतरेगा, बनारस से चढ़ा, पैसिंजर ट्रेन के बाथरूम में घुस कर, सफर कर रहा देसी कुत्ता! सौ/दो सौ किमी क...
clicks 0  Vote 0 Vote  4:25pm 18 Aug 2019

न बिकने वाले घोड़े

वह अस्तबल नहीं, देश का जाना माना, एक प्राइवेट प्रशिक्षण संस्थान था जहाँ देश भर से घोड़े उच्च शिक्षा के लिए आते। संस्थान में कई घोड़े थे। मालिक चाहता कि सभी घ...
clicks 72  Vote 0 Vote  8:25pm 14 Jul 2019

लोहे का घर-54

ट्रेन बहुत देर से रुकी थी। उस प्लेटफॉर्म पर रुकी थी जहाँ उसे नहीं रुकना चाहिए। ऐसे रुकी थी जैसे पढ़ाई पूरी करने के बाद, नौकरी की तलाश में, अनचाहे प्लेटफार्...
clicks 49  Vote 0 Vote  12:33pm 12 Jul 2019

लोहे का घर-53

इस मौसम की पहली बारिश हुई जफराबाद स्टेशन में। झर्र से आई, फर्र से उड़ गई। ढंग से सूँघ भी नहीं पाए, माटी की खुशबू। प्रयागराज जाने वाली एक पैसिंजर आ कर भींगती ...
clicks 39  Vote 0 Vote  9:21am 22 Jun 2019

पिता जी

        गंगा की लहरें, नाव, बाबूजी और तीन बच्चे। इन तीन बच्चों में मैं नहीं हूँ। तब मेरा जन्म ही नहीं हुआ था।पिताजी के साथ अपनी बहुत कम यादें जुड़ी हैं ...
clicks 57  Vote 0 Vote  11:03am 18 Jun 2019

लोहे का घर-52

गरमी के तांडव से घबराकर घुस गए ए. सी. बोगी में। दम साधकर बैठे हैं लोअर बर्थ पर। बाहर प्रचण्ड गर्मी, यहाँ इतनी ठंडी कि यात्री चादर ओढ़े लेटे हैं बर्थ पर! ए. सी.ब...
clicks 33  Vote 0 Vote  10:58am 18 Jun 2019

गर्मी का ताण्डव

इतने तनाव में क्यों हो? धूप में पैदल चलकर आ रहे हो? नहीं भाई, समाचार देख कर आ रहा हूँ। अरे! रे! रे! इतना जुलुम क्यों किया अपने ऊपर? जेठ की दोपहरी में दस किमी ...
clicks 18  Vote 0 Vote  10:46am 18 Jun 2019

हे माँ शारदे !

कुछ शब्द दोउछालूँ दर्द भर कर हवा मेंनभ चीर कर बरसें बादल उमड़-घुमड़भर जाएताल-तलैयों सेधरती का ओना-कोनाहरी-भरी होधरती।कुछ शब्द दोतट पर जाअंजुलि-अंजुलि चढ़ा...
clicks 62  Vote 0 Vote  10:00pm 4 Jun 2019

बुद्धिजीवी

बुद्धिजीवी वह जो खाली पेट तो भगवान से भोजन की याचना करे और जब पेट भरा हो, उसी भगवान को गाली देने में रत्ती भर भी संकोच न करे। बुद्धिजीवी वह परजीवी होता है ज...
clicks 54  Vote 0 Vote  5:22pm 31 May 2019
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