बेचैन आत्मा

माँ

पिता स्वर्ग में रहतेघर मेंबच्चों के संगमां रहती थीं।बच्चों के सुख की खातिरजाने क्या-क्यादुःख सहती थीं।क्या बतलाएं साथी तुमकोमेरी अम्माक्या-क्या थी...
clicks 15  Vote 0 Vote  8:44pm 13 May 2019

नदी और कंकड़

वहघाट की ऊँची मढ़ी पर बैठनदी में फेंकता हैकंकड़!नदी किनारेनीचे घाट पर बैठे बच्चेखुश हो, लहरें गिनने लगते हैं...एक कंकड़कई लहरें!एक, दो...सात, आठ, नौ दस...बस्स!!!वहऊ...
clicks 18  Vote 0 Vote  1:20pm 12 May 2019

बनारस की गलियाँ-9(कर्फ्यू)

अच्छा हैबनारस कीपूरी एक युवा पीढ़ीदेखे बिनाजवान हो गई लेकिनअपने किशोरावस्था मेंहमने खूब देखेकर्फ्यू।गंगा तट के ऊपर फैलेपक्के महाल की तंग गलियों मेंकर...
clicks 37  Vote 0 Vote  8:13pm 27 Apr 2019

बनारस की गलियाँ-8

बनारस की एक गलीगली में चबूतराचबूतरे पर खुलतीबड़े से कमरे की खिड़कीखिड़की से झाँकोकमरे में टी.वी.टी.वी. में दूरदर्शनएक से बढ़कर एकसीरियलहम लोग, बुनियाद, नीम क...
clicks 63  Vote 0 Vote  12:39pm 25 Apr 2019

लोहे का घर-51

लोहे के घर की खिड़की से बाहर झाँक रहे हैं एक वृद्ध। सामने की खिड़की पर उनकी श्रीमती जी बैठी हैं। वे भी देख रही हैं तेजी से पीछे छूटते खेत, घर, मकान, वृक्ष....। ढल ...
clicks 44  Vote 0 Vote  11:58am 24 Apr 2019

बनारस की गलियाँ-7 (क्रिकेट)

गली मेंबच्चे खेलते थेक्रिकेटबड़ेपान की दुकान के पासखड़े-खड़ेदेर तकसुनते रहते थे कमेंट्रीबूढ़ेचबूतरे पर बैठ करकोसते रहते थे..क्रिकेट ने बरबाद कर दियादेश...
clicks 10  Vote 0 Vote  11:49am 24 Apr 2019

बनारस की गलियाँ-6

ढूँढ रहा था अपने ही शहर की गलियों में भटकते हुए बचपन का कोई मित्र जिसके साथ खेले थे हमने आइस-पाइस, विष-अमृत या लीलो लीलो पहाड़िया. हार कर बैठ गया पान की एक दुक...
clicks 10  Vote 0 Vote  12:57pm 21 Apr 2019

बनारस की गलियाँ-5

गली में भीड़ देखठिठक जाते थे कदमघुसकरझाँकते थे हम भीचबूतरे परबिछी होती थीशतरंज की बाजीखेलने वाले तोदो ही होते थेचाल बताने वाले होते थेकई।हर मोहल्ले में...
clicks 46  Vote 0 Vote  7:03pm 20 Apr 2019

बनारस की गलियाँ-4 (प्रभु दर्शन)

सोम से रवि तकअलग-अलगसभी भगवानों के दिन निर्धारित हैं।जब हम छोटे थेजाते थे समय निकालनिर्धारित वारनिर्धारित भगवान के दरबारसोमवार-विश्वनाथ जी,मंगलवार-स...
clicks 17  Vote 0 Vote  12:10am 20 Apr 2019

बनारस की गलियाँ-3

चबूतरे पर बैठे होते थेप्याऊबड़े-से मिट्टी के घड़े में लेकरठंडा-ठंडा पानीपेट भर पीते थे हमहोने पर कभी दे भी देेते थेएक पइसा, दो पइसा या फिर पूरे पाँच पैसे ...
clicks 13  Vote 0 Vote  11:29pm 19 Apr 2019
[ Prev Page ] [ Next Page ]
 
CONTACT US ADVERTISE T&C [ FULL SITE ]

Copyright © 20018-2019