ज़ख्म…जो फूलों ने दिये

हम शर्मिंदा हैं

मरे हुए लोग हाय हाय नहीं करतेमरे हुए लोगों की कोई आवाज़ नहीं होतीमरे हुए लोगों की कोई कम्युनिटी नहीं होतीजो कोशिशों के परचम लहराएऔर हरी भरी हो जाए धरा मनो...
clicks 24  Vote 0 Vote  6:34pm 18 Jun 2019

मैं बस इक जलता अलाव हूँ

न जाने किस पर गुस्सा हूँ न जाने क्यों उदास हूँ खोज के बिंदु चुक गए मौसम सारे रुक गए फिर किस चाह की आस में हूँ जब कोई कहीं नहीं अपना पराया भी नहीं मृग तृष्णा क...
clicks 81  Vote 0 Vote  11:30am 12 Dec 2018

तुम खुदा नहीं हो

मैं सो रहा था मुझे सोने देते चैन तो था अब न सो पाऊंगा और न जागा रह पाऊँगामझधार में जैसे हो नैया कोई एक विशालकाय प्रेत की मानिंद हो गया हूँ अभिशप्त तुम्हारी ...
clicks 90  Vote 0 Vote  12:46pm 5 Nov 2018

गौरतलब कहानियाँ मेरी नज़र में

कहानियां, हमारे जीवन का आधार रही हैं आदिम काल से. जैसे जैसे सभ्यता विकसित होती गयी, कहानियाँ उसी के अनुसार आकार लेती रहीं. वक्त के साथ कहानियों के स्वरुप म...
clicks 97  Vote 0 Vote  4:33pm 25 Sep 2018

मृत्यु , वास्तव में जाना नहीं होती....

किसी के जाने के बाद झरती हैं यादें रह रह ये जाना वास्तव में जाना नहीं होता जाने वाला भी तो समेटे होता है रिश्तों की धार कराता है अहसास पल पल मैं हूँ तुम्हार...
clicks 194  Vote 0 Vote  1:18pm 27 Aug 2018

और मैं .... शर्मिंदा हूँ

मेरे चेहरे पर एक जंगल उगा है मतलबपरस्ती का मेरी दाढ़ों में माँस अटका है खुदगर्जी का आँखों पर लगा है चश्मा बेहयाई का मारकाट के आईने में लहू के कतरे सहमा रहे ...
clicks 90  Vote 0 Vote  11:22am 26 Jul 2018

फिर भी जिंदा हूँ

मेरे पास उम्मीद की कोई सड़क नहीं कोई रास्ता नहीं कोई मंजिल नहीं फिर भी जिंदा हूँ मेरे पास मोहब्बत का कोई महबूब नहीं कोई खुदा नहीं कोई ताजमहल नहीं फिर भी जि...
clicks 89  Vote 0 Vote  12:00pm 11 Jul 2018

'ठहरना एक खामोश क्रिया है'

मेरी ये कविता शनिवार 16 जून को जयपुर से प्रकाशित होने वाले पेपर 'बुलेटिन टुडे'में प्रकाशित कविता हुई और आज @kusum kapoor जी के पति सुरेन्द्र नाथ कपूर जी द्वारा उस...
clicks 88  Vote 0 Vote  1:10pm 30 Jun 2018

हसीनाबाद मेरी नज़र में

उपन्यास लेखन एक साधना है. सिर्फ शब्दों का खेल भर नहीं. ऐसे में जब कोई पहला उपन्यास लिखता है तो पाठकों को उम्मीद होती है कुछ नया मिलेगा. पहले उपन्यास में लेख...
clicks 132  Vote 0 Vote  12:32pm 19 Jun 2018

वक्त की नदी में

मैं वक्त की नदी में तैरती इकलौती कश्ती ...दूर दूर तक फैले सूने पाट और ऊपर नीला आकाश...गुनगुनाऊं गीत तो तैरता है नदी की छाती पर हिलोर बनकर तो कभी हवाएं बेशक ले ...
clicks 96  Vote 0 Vote  11:35am 25 May 2018
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