ज़िन्दगी…एक खामोश सफ़र

ईश्वर गवाह है इस बार ....

मुझे बचाने थे पेड़ और तुम्हें पत्तियां मुझे बचाने थे दिन और तुम्हें रातें यूँ बचाने के सिलसिले चले कि बचाते बचाते अपने अपने हिस्से से ही हम महरूम ह...
clicks 22  Vote 0 Vote  1:04pm 17 Dec 2018

मुझे ऊपर उठना था

मुझे ऊपर उठना था अपनी मानवीय कमजोरियों से आदान प्रदान के साँप सीढ़ी वाले खेल से मैंने खुद को साधना शुरू किया रोज खुद से संवाद किया अपनी ईर्ष्या अपनी कटुता ...
clicks 14  Vote 0 Vote  1:03pm 15 Dec 2018

उम्र के तीसरे पहर में मिलने वाले

ओ उम्र के तीसरे पहर में मिलने वाले ठहर, रुक जरा, बैठ , साँस ले कि अब चौमासा नहीं जो बरसता ही रहे और तू भीगता ही रहे यहाँ मौन सुरों की सरगम पर की जाती है अराधना ...
clicks 23  Vote 0 Vote  1:28pm 9 Dec 2018

कुछ_ख्याल_कुछ_ख्वाब

1मेरे इर्द गिर्द टहलता हैकोई नगमे सामैं गुनगुनाऊं तो कहता हैरुक जरा इस कमसिनी पर कुर्बान हो तो जाऊँजो वो एक बार मिले तो सहीखुदा की नेमत सा2दिल अब न दरिया...
clicks 54  Vote 0 Vote  2:37pm 22 Nov 2018

राम तुम आओगे

राम क्या तुम आ रहे हो क्या सच में आ रहे हो राम तुम जरूर आओगे राम तुम्हें जरूर आना ही होगा आह्वान है ये इस भारतभूमि का हे मर्यादापुरुषोत्तम मर्य...
clicks 56  Vote 0 Vote  4:43pm 6 Nov 2018

बुरा वक्त कहता है

बुरा वक्त कहता है चुप रहो सहो कि अच्छे दिन जरूर आयेंगे सब मिटा दूँ, हटा दूँ कि आस की नाव पर नहीं गुजरती ज़िन्दगी छोड़ दूँ सब कुछ हो जाऊँ गायब समय के परिदृश्य स...
clicks 18  Vote 0 Vote  4:31pm 29 Oct 2018

जिसकी लाठी उसकी भैंस की तरह

हुआ करते थे कभी चौराहों पर झगडे तो कभी सुलह सफाई वक्त की आँधी सब ले उड़ी आज बदल चुका है दृश्य आपातकाल के मुहाने पर खड़ा देश नहीं सुलझा पा रहा मुद्दे चौराहों प...
clicks 88  Vote 0 Vote  12:44pm 23 Oct 2018

चौराहे हमारी आरामस्थली हैं

आजकल हम उस चौराहे पर खड़े हैं जिससे किसी भी ओरकोई भी रास्ता नहीं जाता एक दिशाहीन जंगल में भटकने के सिवा जैसे कुछ हाथ नहीं लगता वैसे ही अब न कोई पथ प्रदर्शक म...
clicks 49  Vote 0 Vote  5:17pm 2 Oct 2018

मुद्दा ये है, कि हम प्यार में हैं

न जाने किसके अख्तियार में हैं मुद्दा ये है, कि हम प्यार में हैं वो कह दें इक बार जो हमको अपना हम समझेंगे उनके दिल-ओ-जान में हैं अब पराई अमानत है न परायेपन का ...
clicks 69  Vote 0 Vote  1:14pm 26 Sep 2018

अदृश्य हमसफ़र मेरी नज़र में

आज एक हफ्ते बाद यहाँ वापसी हुई है. मम्मी एडमिट थीं उन्हें खून की उल्टियाँ हो गयी थीं लेकिन ईश्वर की कृपा से बहुत बड़ी बीमारी नहीं निकली और जो आई है उसके लिए ...
clicks 88  Vote 0 Vote  12:22pm 11 Sep 2018
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