अजित गुप्‍ता का कोना

हुकूमत इनके खून में बहती है

www.sahityakar.comयदि आप ध्यान से सुने और गौर करें तो टीवी के चैनल बदलते-बदलते न जाने कितने ऐसे बोल सुनाई दे जाएंगे जो आपको सोचने पर विवश करते हैं। कल ऐसा ही हुआ, टीवी ...
clicks 37  Vote 0 Vote  10:37am 25 Jan 2019

हीन भावना से ग्रस्त हैं हम

www.sahityakar.comकल मैंने एक आलेख लिखा था - पाई-पाई बचाते हैं और रत्ती-रत्ती मन को मारते हैं । हम भारतीयों का पैसे के प्रति ऐसा ही अनुराग है। लेकिन इसके मूल में हमारी ...
clicks 28  Vote 0 Vote  10:41am 19 Jan 2019

पाई-पाई बचाते हैं और रत्ती-रत्ती मन को मारते हैं

www.sahityakar.comकल ज्वैलर की दुकान पर खड़ी थी, छोटा-मोटा कुछ खरीदना था। मुझे जब कुछ खरीदना होता है तब मैं अपनी आवश्यकता देखती हूँ, भाव नहीं। मुझे लगता है कि भाव देखक...
clicks 23  Vote 0 Vote  2:23pm 17 Jan 2019

कष्ट के बाद ही सुख है

www.sahityakar.comयदि मैं आप से पूछूं कि जिन्दगी के किस कार्य में सबसे बड़ा कष्ट है? तो आप दुनिया जहान का चक्कर कटा लेंगे अपने दीमाग को लेकिन यदि यही प्रश्न में किसी म...
clicks 37  Vote 0 Vote  11:09am 5 Jan 2019

यह लड़ाई है गड़रियों की ना की भेड़ों की

www.sahityakar.comकभी हम यह गीत सुना करते थे – यह लड़ाई है दीये की और तूफान की, लेकिन मोदीजी ने कहा कि यह लड़ाई है महागठबंधन और जनता की। मैं पहली बार मोदी जी के कथन से इत...
clicks 31  Vote 0 Vote  10:16am 3 Jan 2019

पधारो म्हारा देश या?

www.sahityakar.comआखिर हमारे छोटे शहर सैलानियों का बढ़ता आवागमन क्यों नहीं झेल पाते हैं? अब आप मेरे शहर उदयपुर को ही ले लीजिए, शहर में बीचों-बीच झीलें हैं तो झीलों से ...
clicks 9  Vote 0 Vote  10:34am 27 Dec 2018

रूमाल ढूंढना सीख लो

www.sahityakar.comन जाने कितनी फिल्मों में, सीरियल्स में, पड़ोस की ताकाझांकी में और अपने घर में तो रोज ही सुन रही हूँ, सुबह का राग! पतियों को रूमाल नहीं मिलता, चश्मा नह...
clicks 26  Vote 0 Vote  11:01am 22 Dec 2018

दरबार में कितने रत्न?

www.sahityakar.comबिना घुमावदार घाटियों पर घुमाए अपनी  बात को सीधे ही कहती हूँ, एक टीवी सीरीयल आ रहा है – चन्द्रगुप्त मौर्य, उसमें चाणक्य है, धनानन्द है और हैं चन्द्...
clicks 26  Vote 0 Vote  10:18am 21 Dec 2018

काश हम एक नहीं अनेक होते

www.sahityakar.comरोज सुनाई पड़ता है कि यदि एक सम्प्रदाय की संख्या इसी गति से बढ़ती रही तो देश का बहुसंख्यक समाज कहाँ जाएगा? उसे केवल डूबने के लिये हिन्द महासागर ही म...
clicks 38  Vote 0 Vote  9:17am 19 Dec 2018

शेष 20 प्रतिशत पर ध्यान दें

40 प्रतिशत इधर और 40 प्रतिशत उधर, शेष 20 प्रतिशत या तो नदारद या फिर कभी इधर और कभी उधर। सत्ता का फैसला भी ये ही 20 प्रतिशत करते हैं, ये सत्ता की मौज लेते रहते हैं। ...
clicks 8  Vote 0 Vote  9:39am 17 Dec 2018
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