Blogger: Anshu Mali Rastogi at चिकोटी...
लोगभी न फिक्रमंद होने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देते। अब देखिए, लोग इस बात पर फिक्रमंद हैं कि सिक्का ने इंफोसिस को क्यों छोड़ा? किसलिए छोड़ा? काहे इतनी बड़ी नौकरी को दो सेकंड में लात मार दी? आदि-आदि।सिक्का ने अगर इंफोसिस को त्यागा तो उसके पीछे कुछ तो ठोस कारण रहे ही हों...
clicks 0 View   Vote 0 Vote   8:45am 19 Aug 2017
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at चर्चामंच...
मित्रों! शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')  -- दोहे   "माँगे सबकी खैर"   उच्चारण  -- तुम मुझे खून दो  मै तुम्हे आजादी दूंगा  VMW Team  -- बयान !!  प्रकृति के बीच अंकुरित संस्कारों का ताजा संस्करण हैं आशीष - बटरोह...
clicks 1 View   Vote 0 Vote   4:00am 19 Aug 2017
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
नदीअब वैसी नहीं रहीनदी में तैरते हैंनोटों के बंडल, बच्चों की लाशेंगिरगिट हो चुकी हैनदी!माझी नहीं होतानदी की सफाई के लिए जिम्मेदारवो तो बस्सइस पार बैठो तोपहुँचा देगाउस पारनदीके मैली होने के लिए जिम्मेदार हैंइसमें गोता लगानेऔरहर डुबकी के साथपाप कटाने वालेपाप ऐसे कट...
clicks 3 View   Vote 0 Vote   11:15pm 18 Aug 2017
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
करती धन की लालसा, जग को मटियामेट।दौलत से भरता नहीं, कभी किसी का पेट।।ज्ञान बाँटने के लिए, लिखते लोग निबन्ध।लेकिन सबके हैं यहाँ, धन से ही सम्बन्ध।। जो होते धनहीन हैं, उनको मिलता चैन।जब से धन आने लगा, तब से ही बेचैन।।क्षमा-सरलता-धैर्य का, मन में नहीं निवेश।धन की गरमी ला रही...
clicks 2 View   Vote 0 Vote   5:01pm 18 Aug 2017
Blogger: सु-मन (Suman Kapoor) at अर्पित ‘सुमन...
... स्थितियाँ बदल देती हैं राह जिंदगी की ...... मंजिलेंअक्सर अकेली रह शापित हो जाया करती हैं !!सु-मन ...
clicks 4 View   Vote 0 Vote   3:19pm 18 Aug 2017
Blogger: माधवी रंजना at DAANA PAANI...
सुबह के तीन बजे हैं। टैक्सी हमें हरिद्वार रेलवे स्टेशन के पास छोड़ देती है। हम विचार कर रहे हैं क्या करें अभी हर की पौड़ी की तरफ प्रस्थान करें या फिर थोड़ी देर यहीं बैठकर कर इंतजार करें। हरिद्वार रेलवे स्टेशन परिसर में और बाहर हर तरफ हजारों लोग सो रहे हैं। जून का महीना ...
clicks 11 View   Vote 0 Vote   12:30pm 18 Aug 2017
Blogger: Dr T S Daral at अंतर्मंथन...
मेरा मेरा करती है दुनिया सारी,मोहमाया से मुक्ति पाओ , तो जाने ।कितना आसाँ है आसाराम बन जाना ,राम बनकर दिखलाओ , तो जाने। दावत तो फाइव स्टार थी लेकिन,भूखे को रोटी खिलाओ , तो जाने ।राह जो दिखाई है ज्ञानी बनकर,खुद भी चलकर दिखाओ , तो जाने ।देवी देवता बसते हैं करोड़ों यहाँ,इंसान बन ...
clicks 12 View   Vote 0 Vote   10:14am 18 Aug 2017
Blogger: Archana saxena at राहें...
 दिल पर कविताएं दोस्तों ये जो दिल है ना ,कहते हैं बड़ा ही पागल होता है|ये जानकार भी कि अगर आपने किसी से दिल लगाया तो आपको बहुत सारी परेशानियां हो सकती हैं मगर ये कहाँ मानता है | दिल की कुछ नादानी और बचकानी हरकतों को बयान करती यह दो कवितायें पढ़िये| |जब दो दिल मिल गएजब ...
clicks 0 View   Vote 0 Vote   8:54am 18 Aug 2017
Blogger: प्रमोद जोशी at जिज्ञासा...
पिछलेकुछ वर्षों का अनुभव है कि देश के राजनीतिक दलों ने वोटिंग मशीन के विरोध पर जितना वक्त लगाया है, उतना वक्त वे चुनाव सुधार से जुड़े मसलों पर नहीं लगाते। वे चाहें तो आसानी से संसद ऐसा कानून बना सकती है, जिसमें चंदे की व्यवस्था पारदर्शी बन जाए। सभी (खासतौर से बीजेपी -कां...
clicks 13 View   Vote 0 Vote   8:51am 18 Aug 2017
Blogger: प्रमोद जोशी at Gyaankosh ज्ञानकोश...
इस प्रवृत्ति को प्रकाशानुवर्तन (Phototropism)और हीलियोट्रॉपिज्म (Heliotropism)कहते हैं. सूरजमुखी के पौधे में ऑक्सिन (Auxin ) नाम का एक हॉरमोन होता है. यह हॉर्मोन सूरज की किरणों के प्रति संवेदनशील होता है. पौधे में यह तने के छाया वाले हिस्से में जमा होता है. फूल से छाया बनती है. छाया में ही यह ...
clicks 20 View   Vote 0 Vote   7:18pm 17 Aug 2017
Blogger: j chaube at (VIKALP) विकल्प...
        रायपुर शहर एक छोटे से कस्बे से धीरे धीरे आज छत्तीसगढ़ की राजधानी के रूप में लगातार विकसित हो रहा है । इत्तेफाक ये भी है कि इस वर्ष हम अपने नगर की पालिका का150 वॉ वर्ष भी मना रहे हैं ।         हमारी पीढ़ी अपने शहर के पुराने दौर के बारे में लगभग अनभिज्...
clicks 10 View   Vote 0 Vote   6:17pm 17 Aug 2017
Blogger: Sanskritjagat at संस्‍कृतजगत...
(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});     अस्मिन् च‍लचित्रे चित्रसहितं 50 शाकानां नामानि संस्‍कृतभाषायामस्ति ।इति ...
clicks 7 View   Vote 0 Vote   1:04pm 17 Aug 2017
Blogger: suresh sawpnil at साझा आसमान ...
क़त्ल  करके  हसीं  बहारों  कातन  गया  सर  रसूख़दारों  कालाशे-अत्फ़ाल  रौंद  कर  ख़ुश  हैंतुफ़ ! ये:  किरदार  ताजदारों  कामुंह  छुपा  लें  कि  सर  कटा  डालेंहै  पसोपेश  शर्मसारों  काहै  हमारी  कमी  कि  क़ायम  हैदबदबा  ज़ुल्म  के  इदार...
clicks 11 View   Vote 0 Vote   7:16am 17 Aug 2017
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
   पेंसिलिन के अविष्कार से स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी परिवर्तन आया। 1940 के दशक से पहले, कीटाणुओं से होने वाला संक्रमण अकसर घातक सिद्ध होता था। परन्तु पेंसिलिन के आने के बाद से हानिकारक जीवाअणुओं के नाश द्वारा अनगिनित जानें बचाई गई हैं। जिन व्यक्तियों ने पेंस...
clicks 13 View   Vote 0 Vote   8:45pm 16 Aug 2017
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
फूल ढूँढने निकला खुशबू पानी मथे जाता संसार बाहर ढूँढ रहा है प्यार, फूल ढूँढने निकला खुशबू मानव ढूँढे जग में सार ! लगे यहाँ  राजा भी भिक्षुक नेता मत के पीछे चलता, सबने गाड़े अपने खेमे बंदर बाँट खेल है चलता ! सही गलत का भेद खो रहा लक्ष्मण रेखा मिटी कभी की. मूल्यों की फ़िक...
clicks 6 View   Vote 0 Vote   5:55pm 16 Aug 2017
Blogger: Shah Nawaz at प्रेमरस...
"लोकतंत्र कमज़ोर है, वोट खरीदे जाते है, बूथ कैप्चर किये जाते है, मतगणना मे धांधली करवाई जाती है, विधायक और सांसद खरीदे जाते है, पूंजीवादी व्यवस्था है, भ्रष्टाचार फैला हुआ है, व्यवस्था को हरगिज़ नहीं बदला जा सकता है"इत्यादि-इत्यादि.... यह सब लोकतंत्र के विरोध की कमज़ोर दलीलें ब...
clicks 12 View   Vote 0 Vote   3:27pm 16 Aug 2017
Blogger: Alpana at गुनगुनाती धू...
फिल्म- रज़िया सुल्तान [१९६१]मूल गायक : रफ़ी, आशा भोंसलेसंगीतकार: लच्छी रामगीतकार: आनंद  बख्शीप्रस्तुत गीत में स्वर - सफ़ीर और अल्पना----------------------------Mp3 download or playगीत के बोल -ढ़लती  जाए रात कह ले दिल की बातशमा-परवाने का न होगा फिर साथढलती जाए रात …१.मस्त नज़ारे चाँद सितारे रात के मेहमा...
clicks 16 View   Vote 0 Vote   1:41pm 16 Aug 2017
Blogger: वन्दना गुप्ता at ज़ख्म…जो फूल...
अम्बुआ की डाली पर चाहे न कुहुके कोयलकिसी अलसाई शाम से चाहे न हो गुफ्तगू कोई बेनामी ख़त चाहे किसी चौराहे पर क्यों न पढ़ लिया जाए ज़िन्दगी का कोई नया शब्दकोष ही क्यों न गढ़ लिया जाये अंततः बातें हैं बातों का क्या ...अब के देवता नहीं बाँचा करते यादों की गठरी से ... मृत्युपत्र न दिन...
clicks 1 View   Vote 0 Vote   1:28pm 16 Aug 2017
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