Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
फूल ढूँढने निकला खुशबू पानी मथे जाता संसार बाहर ढूँढ रहा है प्यार, फूल ढूँढने निकला खुशबू मानव ढूँढे जग में सार ! लगे यहाँ  राजा भी भिक्षुक नेता मत के पीछे चलता, सबने गाड़े अपने खेमे बंदर बाँट खेल है चलता ! सही गलत का भेद खो रहा लक्ष्मण रेखा मिटी कभी की. मूल्यों की फ़िक...
clicks 6 View   Vote 0 Vote   5:55pm 16 Aug 2017
Blogger: प्रमोद जोशी at जिज्ञासा...
करीब डेढ़ दशक पहले कहावत प्रसिद्ध हुई थी, ‘सौ में नब्बे बेईमान, फिर भी मेरा भारत महान।’ यह बात ट्रकों के पीछे लिखी नजर आती थी। यह एक प्रकार का सामाजिक अंतर्मंथन था। कि हम अपना मजाक उड़ाना भी जानते हैं। यह एक सचाई की स्वीकृति भी थी।  घटनाओं को एकसाथ मिलाकर पढ़ें तो विचि...
clicks 9 View   Vote 0 Vote   4:00pm 16 Aug 2017
Blogger: Shah Nawaz at प्रेमरस...
"लोकतंत्र कमज़ोर है, वोट खरीदे जाते है, बूथ कैप्चर किये जाते है, मतगणना मे धांधली करवाई जाती है, विधायक और सांसद खरीदे जाते है, पूंजीवादी व्यवस्था है, भ्रष्टाचार फैला हुआ है, व्यवस्था को हरगिज़ नहीं बदला जा सकता है"इत्यादि-इत्यादि.... यह सब लोकतंत्र के विरोध की कमज़ोर दलीलें ब...
clicks 12 View   Vote 0 Vote   3:27pm 16 Aug 2017
Blogger: Alpana at गुनगुनाती धू...
फिल्म- रज़िया सुल्तान [१९६१]मूल गायक : रफ़ी, आशा भोंसलेसंगीतकार: लच्छी रामगीतकार: आनंद  बख्शीप्रस्तुत गीत में स्वर - सफ़ीर और अल्पना----------------------------Mp3 download or playगीत के बोल -ढ़लती  जाए रात कह ले दिल की बातशमा-परवाने का न होगा फिर साथढलती जाए रात …१.मस्त नज़ारे चाँद सितारे रात के मेहमा...
clicks 16 View   Vote 0 Vote   1:41pm 16 Aug 2017
Blogger: वन्दना गुप्ता at ज़ख्म…जो फूल...
अम्बुआ की डाली पर चाहे न कुहुके कोयलकिसी अलसाई शाम से चाहे न हो गुफ्तगू कोई बेनामी ख़त चाहे किसी चौराहे पर क्यों न पढ़ लिया जाए ज़िन्दगी का कोई नया शब्दकोष ही क्यों न गढ़ लिया जाये अंततः बातें हैं बातों का क्या ...अब के देवता नहीं बाँचा करते यादों की गठरी से ... मृत्युपत्र न दिन...
clicks 1 View   Vote 0 Vote   1:28pm 16 Aug 2017
Blogger: डॉ.सुभाष भदौरिया at डॉ.सुभाष भदौर...
ग़ज़लतुम तपिश दिल की बढ़ने तो दो, बर्फ पिघलेगी ही एक दिन.तोड़कर सारी जंज़ीरें वो, घर से निकलेगी ही एक दिन.शौक़ जलने का परवाने को, होगया आजकल इस कदर,लाख कोशिश करे कोई भी, शम्आ मचलेगी ही एक दिन.अश्क बहते नहीं उम्र भर, ग़म न कर अय मेरे हमसफ़र.बात बिगड़ी है जो आजकल, वो तो सँभलेगी ...
clicks 0 View   Vote 0 Vote   1:04pm 16 Aug 2017
Blogger: माधवी रंजना at DAANA PAANI...
दिल्ली से हरिद्वार। कई बार जा चुका हूं। एक बार फिर बेटे के अनादि के साथ। रात्रि भोजन के बाद हम पहुंचे मोहन नगर चौराहे पर। हरिद्वार के लिए बस का इंतजार है। शनिवार है, लोगों की काफी भीड़ है। तभी एक एसयूवी मिली। वे हरिद्वार जा रहे हैं। दो सौ रुपये प्रति सवारी। हमने आगे की दो...
clicks 13 View   Vote 0 Vote   12:30pm 16 Aug 2017
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at आपका ब्लॉग...
               एक गीत : --------तो क्या हो गयातेरी खुशियों में शामिल सभी लोग हैं ,एक मैं ही न शामिल तो क्या हो  गया !ज़िन्दगी थी गुज़रनी ,गुज़र ही गईबाक़ी जो भी बची है ,गुज़र जाएगीदो क़दम साथ देकर चली छोड़ करज़िन्दगी अब न जाने किधर जाएगी तेरी यादों का मुझको सहारा बहुत ,एक तू ही न ...
clicks 6 View   Vote 0 Vote   11:46am 16 Aug 2017
Blogger: Archana saxena at राहें...
हास्यकविता "अपने बच्चे कम थे क्या "अपने बच्चे कम थे क्या कि पड़ोस के भी आ गएअब तो लगता है जैसेमेरे बच्चों के भी भाव बड़ेकभी मांगते चिप्स के पैकेटऔर कभी मांगते कुरकुरेनींद तो पहली ही कम मिलती अब होश भी हैं मेरे उड़ गए न जाने शाम तक आते-आतेकितनी बार बर्तन धोने पड़ेंघर को ब...
clicks 6 View   Vote 0 Vote   9:56am 16 Aug 2017
Blogger: Ajit at अजित गुप्‍ता ...
#हिन्दी_ब्लागिंगमनुष्य प्रकृति की गोद खोजता है, नन्हा शिशु भी माँ की गोद खोजता है। शिशु को माँ की गोद में जीवन मिलता है, उसे अमृत मिलता है और मिलती है सुरक्षा। बस इंसान भी इसी खोज में आजीवन जुटा रहता है। बचपन छूट जाता है लेकिन जहाँ जीवन मिले, जहाँ अमृत मिले और जहाँ सुरक्ष...
clicks 1 View   Vote 0 Vote   9:40am 16 Aug 2017
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
करते-करते भजन, स्वार्थ छलने लगे। करते-करते यजन, हाथ जलने लगे।।  झूमती घाटियों में, हवा बे-रहम, घूमती वादियों में, हया  बे-शरम, शीत में है तपन, हिम पिघलने लगे। करते-करते यजन, हाथ जलने लगे।।  उम्र भर जख्म पर जख्म खाते रहे, फूल गुलशन में हरदम खिलाते रहे, ...
clicks 14 View   Vote 0 Vote   7:15am 16 Aug 2017
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at चर्चामंच...
मित्रों! बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')  -- श्री कृष्ण और स्वाधीन भारत :   ज्योतिषीय समरूपता   विजय राजबली माथुर  क्रांति स्वर पर विजय राज बली माथुर  -- गीतिका  "आजादी की वर्षगाँठ"  (डॉ.रूपचन्द्र शास...
clicks 11 View   Vote 0 Vote   4:00am 16 Aug 2017
Blogger: साहित्य शिल्पी at साहित्य शिल्...
रचनाकार परिचय:-बम्बई महानगर मे पली बडी हुई स्वर्गीय पँ. नरेन्द्र शर्मा व श्रीमती सुशीला शर्मा के घर मेरा जन्म १९५० नवम्बर की २२ तारीख को हुआ. जीवन के हर उतार चढाव के साथ कविता, मेरी आराध्या, मेरी मित्र, मेरी हमदर्द रही है. विश्व-जाल के जरिये, कविता पढना, लिखना और इन से जुडे ...
clicks 6 View   Vote 0 Vote   12:00am 16 Aug 2017
Blogger: Pratibha Saksenas at लालित्यम्...
               *                 इंसानी कारस्तानियों से तो अब सारी दुनिया पनाह माँगने लगी है .एक छोटा सा उदाहरण अभी हाल ही में सामने आया है.अमेरिका का, अपनी विविधता के लिये विख्यात येलोस्टोन नेशनल पार्क , जो इतना विशाल है कि  तीन राज्यों में - मोंटाना,व्य...
clicks 7 View   Vote 0 Vote   11:13pm 15 Aug 2017
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
सच हैयह मौसमसृजन और संहार का है।खूब बारिश होती हैइस मौसम मेंलहलहाने लगते हैंसूखे/बंजर खेतधरती मेंअवतरित होते हैंझिंगुर/मेंढक/मच्छर और..न जाने कितनेकीट,पतंगे!आंवला या कदम्ब के नीचेबैठ कर देखोहवा चली नहीं किटप-टपशाख से झरते हैंनन्हे-मुन्नेफल।सबतुम्हारी तरहनहीं कर ...
clicks 13 View   Vote 0 Vote   9:28pm 15 Aug 2017
Blogger: erunfun at ERunFun...
The post अंगाकर रोटी appeared first on ERunFun. ...
clicks 0 View   Vote 0 Vote   8:37pm 15 Aug 2017
Blogger: pratibha kushwaha at ठिकाना ...
मैं सुबह की मीठी नींद सो रहा था कि किसी भारी-भरकम आवाज का कानों में प्रवेश हुआ। और मैं स्वप्न लोक से इहलोक में आ गया। आंख खोलकर देखा तो मेरे सात जन्मों की संगनी भृकुटी चढ़ाये खड़ी है। मुझे अलसाते देख यथाशक्ति कोमल स्वर में बोली-‘आपकेा आपिफस नहीं जाना है?’ ‘हां! जाना है पर इ...
clicks 8 View   Vote 0 Vote   5:55pm 15 Aug 2017
Blogger: डॉ. जेन्नी शबनम at लम्हों का सफ़...
कैसी आज़ादी पाई  (स्वतंत्रता दिवस पर 4 हाइकु)  *******  1.  मन है क़ैदी,  कैसी आज़ादी पाई?  नहीं है भायी!  2.  मन ग़ुलाम  सर्वत्र कोहराम,  देश आज़ाद!  3.  मरता बच्चा  मज़दूर किसान,  कैसी आज़ादी?  4.  हूक उठती,  अपने ही देश में  हम ग़ुलाम!  - जेन्नी शबनम (15. 8. 2017)  _______...
clicks 14 View   Vote 0 Vote   5:24pm 15 Aug 2017
Blogger: devendra gautam at ग़ज़लगंगा.dg...
हम उनकी उंगलियों में थे कब से पड़े हुए.कागज में दर्ज हो गए तो आंकड़े हुए.ऊंची इमारतों में कहीं दफ्न हो गईंवो गलियां जिनमें खेलके हम तुम बड़े हुए.मुस्किल है कोई बीच का रस्ता निकल सकेदोनों तरफ के लोग हैं जिद पर अड़े हुए.दरिया में थे तो हम सभी कश्ती की तरह थेमिट्टी के पास आ ग...
clicks 11 View   Vote 0 Vote   2:52pm 15 Aug 2017

 
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